
Odisha News: ओडिशा के बालासोर जिले में एक दुखद घटना घटी। गंगाधर गांव के पास करीब 70 लोगों की भीड़ ने दो कैथोलिक पादरियों, एक धर्म शिक्षक और दो ननों पर हमला कर दिया। ये लोग एक स्मृति सेवा से लौट रहे थे। भीड़ ने उन पर जबरन धर्म बदलने का आरोप लगाया और मारपीट की। पहले धर्म शिक्षक को रोका गया, फिर बाकी लोगों पर हमला हुआ। गांव की महिलाओं ने ननों को बचाया, लेकिन पादरियों और शिक्षक को बुरी तरह पीटा गया। एक पादरी का फोन भी छीन लिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि भीड़ में कई बाहरी लोग थे।
छत्तीसगढ़ की घटना से जुड़ाव, ननों की गिरफ्तारी और जमानत
यह हमला हाल की एक और घटना से जुड़ा लगता है। 25 जुलाई को छत्तीसगढ़ के दुर्ग स्टेशन पर दो कैथोलिक ननों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। उन पर मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण का आरोप लगा। पूरे देश में इसकी निंदा हुई। चर्च और नागरिक समूहों ने कहा कि आरोप झूठे हैं। केरल के मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं ने इसे अल्पसंख्यकों पर हमला बताया। अगस्त में अदालत ने ननों को जमानत दे दी, क्योंकि सबूत कमजोर थे। जमानत की शर्तों में 50 हजार रुपये का बॉन्ड और पासपोर्ट जमा करना शामिल है।
चर्च की चिंता, हिंसा का बढ़ता पैटर्न और न्याय की मांग
भारतीय कैथोलिक बिशप्स सम्मेलन (सीबीसीआई) ने इस हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह ईसाइयों पर हिंसा का एक बड़ा पैटर्न है। सीबीसीआई ने ओडिशा सरकार से अपराधियों को जल्द पकड़ने और सजा देने की मांग की। वे कहते हैं कि ऐसी घटनाएं धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के खिलाफ हैं। पहले भी कई मामलों में न्याय नहीं मिला, जिससे हिंसा बढ़ रही है। राजनीतिक नेता और चर्च अब संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठा रहे हैं।
भारत में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, क्या होगा आगे?
ये घटनाएं दिखाती हैं कि भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर खतरा बढ़ रहा है। राज्य सरकारों को सख्त कदम उठाने चाहिए। अगर ऐसी हिंसा रुकी नहीं, तो देश की एकता पर असर पड़ेगा। सीबीसीआई ने सभी नागरिकों की सुरक्षा की मांग की है। अब देखना है कि सरकार क्या कार्रवाई करती है।