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देश में बच्चों को गोद लेने के लंबित मामलों में पश्चिम बंगाल सबसे आगे

मुख्य बातें

  • किन राज्यों में कितने मामले लंबित
  • देरी रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए
  • 2024-25 में रिकॉर्ड 4,515 बच्चों को मिला परिवार
  • क्यों अहम हैं ये आंकड़े
10 अगस्त 2025

नई दिल्ली: देश में बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया की निगरानी करने वाली नोडल संस्था केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के आंकड़ों के अनुसार, गोद लेने के लंबित मामलों में पश्चिम बंगाल सबसे आगे है। राज्य में सबसे ज़्यादा 352 मामले लंबित हैं। CARA महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन काम करने वाली संस्था है, जिसे देश के भीतर और विदेशों में होने वाले गोद लेने की निगरानी और विनियमन का दायित्व सौंपा गया है।

पश्चिम बंगाल के बाद उत्तर प्रदेश (318), ओडिशा (262), महाराष्ट्र (250), तेलंगाना (201), बिहार (196), दिल्ली (176) और मध्य प्रदेश (139) का स्थान है। आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में इस समय 2,768 बच्चे गोद लिए जाने की प्रतीक्षा में हैं।

किन राज्यों में कितने मामले लंबित

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में CARA के हवाले से बताया गया है कि ऊपर दिए गए आठ राज्यों के अलावा आंध्र प्रदेश (128), पंजाब (112), कर्नाटक (106), राजस्थान (75), तमिलनाडु (53) और केरल (45) में भी गोद लेने के मामले लंबित हैं। यानी लंबित मामलों की समस्या किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के बड़े हिस्से में देखी जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार, गोद लेने के इच्छुक माता-पिता (PAPs) केयरिंग्स (CARINGS) पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण के समय बच्चे की उम्र, स्वास्थ्य की स्थिति और राज्य को लेकर अपनी पसंद बताते हैं। बच्चे का रेफरल और गोद लेने की प्रक्रिया काफी हद तक इन्हीं प्राथमिकताओं पर निर्भर करती है, इसलिए कई बार इसमें काफी देरी हो जाती है। दत्तक ग्रहण विनियम, 2022 में अधिकारियों और एजेंसियों के लिए समय-सीमा तय है, फिर भी कई पक्षों के शामिल होने के कारण प्रक्रिया में समय लगता है।

देरी रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए

लंबित मामलों को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 में 2021 में संशोधन किया। इस संशोधन के बाद जिलाधिकारी (DM) को गोद लेने से जुड़े मामलों सहित जेजे अधिनियम लागू करने वाली एजेंसियों के कामकाज के समन्वय और निगरानी का अधिकार मिला है। पहले गोद लेने के आदेश अदालतों से जारी होते थे, अब यह जिम्मेदारी जिलाधिकारी स्तर पर है।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पदाधिकारी राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसियों (SARA), स्थानीय बाल कल्याण समितियों (CWC) और जिला बाल संरक्षण इकाइयों (डीसीपीयू) जैसी संस्थाओं के माध्यम से जेजे अधिनियम को लागू करते हैं। केयरिंग्स पोर्टल के माध्यम से गोद लेने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी है। CARA नियमित रूप से प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित करता है, जिनमें देशभर में उपलब्ध साप्ताहिक वर्चुअल रिफ्रेशर कार्यक्रम शामिल हैं।

2024-25 में रिकॉर्ड 4,515 बच्चों को मिला परिवार

वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत में रिकॉर्ड 4,515 बच्चों को गोद लिया गया। पत्र सूचना कार्यालय (PIB) की 1 अप्रैल 2025 की विज्ञप्ति के अनुसार, यह 2015-16 के बाद का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। इनमें 4,155 घरेलू (देश के भीतर) और 360 अंतर-देशीय गोद लेने के मामले शामिल हैं। CARA की पहचान मुहिम के तहत 8,598 नए बच्चों को गोद लेने के पूल में जोड़ा गया और राज्य सरकारों के साथ मिलकर 245 नई दत्तक ग्रहण एजेंसियां भी शुरू की गईं।

CARA के राज्यवार आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में सबसे अधिक 849 बच्चे महाराष्ट्र में गोद लिए गए। इसके बाद तमिलनाडु (465), पश्चिम बंगाल (328), कर्नाटक (306), ओडिशा (287) और तेलंगाना (267) का स्थान रहा। यानी पश्चिम बंगाल गोद लेने के कुल मामलों में तीसरे स्थान पर है, लेकिन लंबित मामलों में सबसे ऊपर है।

क्यों अहम हैं ये आंकड़े

विशेषज्ञ मानते हैं कि कानूनी रूप से गोद लेने की बढ़ती संख्या समाज में इसकी बढ़ती स्वीकार्यता को दिखाती है। वहीं लंबित मामलों के आंकड़े बताते हैं कि बच्चों और परिवारों को जल्दी जोड़ने के लिए अभी और काम करने की जरूरत है। बड़ी उम्र के बच्चों और विशेष देखभाल की जरूरत वाले बच्चों को परिवार मिलने में अक्सर ज्यादा समय लगता है, क्योंकि ज्यादातर इच्छुक माता-पिता कम उम्र के बच्चों को प्राथमिकता देते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सवाल: गोद लेने के सबसे ज्यादा लंबित मामले किस राज्य में हैं?
जवाब: CARA के आंकड़ों के अनुसार पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा 352 मामले लंबित हैं, इसके बाद उत्तर प्रदेश (318) और ओडिशा (262) हैं।

सवाल: 2024-25 में देश में कितने बच्चों को गोद लिया गया?
जवाब: PIB के अनुसार 2024-25 में रिकॉर्ड 4,515 बच्चों को गोद लिया गया, जिनमें 4,155 घरेलू और 360 अंतर-देशीय मामले थे।

सवाल: गोद लेने के लिए आवेदन कहां किया जाता है?
जवाब: गोद लेने की पूरी प्रक्रिया CARA के केयरिंग्स (CARINGS) पोर्टल पर ऑनलाइन होती है।

सवाल: गोद लेने का आदेश कौन जारी करता है?
जवाब: जेजे अधिनियम में 2021 के संशोधन के बाद गोद लेने का आदेश जिलाधिकारी जारी करते हैं।

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Author: newsmedia kiran.com

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