Lucknow: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कांग्रेस नेता और रायबरेली से लोकसभा सांसद राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता को चुनौती देने वाली याचिका को याचिकाकर्ता द्वारा वापस लिए जाने के बाद खारिज कर दिया।
- अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि राहुल गांधी के ब्रिटिश नागरिक होने के आरोप के समर्थन में याचिकाकर्ता कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सका।
- न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की पीठ के समक्ष अशोक पांडेय और रजनीश कुमार सिंह की ओर से याचिका दाखिल की गई थी।
- इसमें राहुल गांधी के रायबरेली सांसद के रूप में पद पर बने रहने के अधिकार को चुनौती देते हुए को वारंटो (अधिकार-पृच्छा) रिट जारी करने की मांग की गई थी।
- याचिका में दावा किया गया था कि राहुल गांधी भारतीय नागरिक नहीं, बल्कि ब्रिटिश नागरिक हैं।
2015 और 2019 में भी उठ चुका है मुद्दा
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर इसी तरह की याचिकाएं 2015 और 2019 में भी दाखिल की गई थीं।
2015 में हाईकोर्ट की समन्वय पीठ ने कहा था कि नागरिकता से संबंधित शिकायत का समाधान नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 9(2) के तहत केंद्र सरकार के समक्ष किया जाना चाहिए। 2019 में भी याचिकाकर्ता को केंद्र सरकार के समक्ष नई शिकायत रखने की अनुमति दी गई थी।

आरोपों के समर्थन में दस्तावेज नहीं
मौजूदा मामले में याचिकाकर्ता राहुल गांधी के ब्रिटिश नागरिक होने के आरोप को साबित करने के लिए कंपनी रिकॉर्ड, ब्रिटिश रजिस्ट्रार के दस्तावेज या ब्रिटिश नागरिकता का दावा करने वाला कोई प्रमाण अदालत के सामने नहीं रख सका।
अदालत के समक्ष एक कथित कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय का पत्र पेश किया गया, जिसमें ‘राउल विंची’ नामक व्यक्ति की पढ़ाई से संबंधित जानकारी थी। अदालत ने माना कि यह दस्तावेज लगाए गए आरोपों को साबित नहीं करता। इसके बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
नोट: यह मामला कर्नाटक के एक भाजपा कार्यकर्ता द्वारा राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर लगाए गए अलग आरोपों से अलग है।

