Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के जालान रोड और अपर बाजार के दुकानदारों को बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने रांची नगर निगम की ओर से दुकानों का लाइसेंस रद्द करने और दुकान खाली कराने से संबंधित आदेशों को निरस्त कर दिया। अदालत ने आठ रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए नगर निगम को याचिकाकर्ताओं का पक्ष सुनने और दस्तावेजों पर विचार करने के बाद नया कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। जब तक अंतिम निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक दुकानदारों का कब्जा प्रभावित नहीं होगा। पूरी प्रक्रिया 12 सप्ताह के भीतर पूरी करने को कहा गया है।
Ranchi News: रांची के दुकानदारों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, नगर निगम का लाइसेंस रद्द करने का आदेश निरस्त

हाईकोर्ट का फैसला और दुकानदारों को मिली राहत
न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की एकल पीठ ने रांची नगर निगम के 14 अक्टूबर 2014, 4 दिसंबर 2014 और 13 फरवरी 2015 के आदेशों को निरस्त कर दिया। ये आदेश जालान रोड और अपर बाजार स्थित दुकानों के लाइसेंस रद्द करने और परिसर खाली करने से जुड़े थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि नगर निगम को याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का पूरा अवसर देना होगा और संबंधित दस्तावेजों पर विचार करने के बाद नया आदेश पारित करना होगा। 12 सप्ताह की समयसीमा तय की गई है।
इस फैसले से दुकानदारों को अस्थायी राहत मिली है। जब तक नगर निगम नया आदेश नहीं जारी करता, तब तक उनकी दुकानों पर कब्जा बरकरार रहेगा। अदालत ने माना कि वैधानिक प्राधिकारी को तथ्यों और दस्तावेजों पर समुचित विचार किए बिना आदेश पारित नहीं करना चाहिए। यह फैसला प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित है।
जालान रोड और अपर बाजार के मामले की पृष्ठभूमि
इन याचिकाओं में जालान रोड और अपर बाजार स्थित दुकानों तथा जमीन के लाइसेंस और दोबारा आवंटन से जुड़े विवाद शामिल थे। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने बताया कि जालान रोड स्थित 5100 वर्गफीट जमीन वर्ष 1966-67 में तत्कालीन रांची नगरपालिका ने मोहन लाल कच्ची को आवंटित की थी। वहां टेंट हाउस का कारोबार चल रहा था। बाद में उनके उत्तराधिकारी महेंद्र कुमार कच्ची ने वर्ष 2000 में कुछ प्रार्थियों के साथ साझेदारी में कारोबार शुरू किया।
आपसी सहमति से साझेदारी समाप्त होने के बाद जमीन को प्रार्थियों के पक्ष में पुनः आवंटित करने का अनुरोध किया गया। रांची नगर निगम ने 9 दिसंबर 2003 को जमीन प्रार्थियों के नाम आवंटित की। इसके बाद 5 जून 2004 को लाइसेंस शुल्क के आधार पर समझौता हुआ। जमीन पर स्थायी निर्माण के लिए अनुमति मांगी गई, जिसे 6 अगस्त 2004 को स्वीकृति मिल गई। बाद में दुकानों के पुनः आवंटन को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ।
नगर निगम की कार्रवाई और दोनों पक्षों की दलीलें
नगर निगम ने 9 सितंबर 2014 को कारण बताओ नोटिस जारी किया। जवाब मिलने के बाद 14 अक्टूबर 2014 को लाइसेंस रद्द कर दुकानें खाली करने का आदेश दिया। 4 दिसंबर 2014 को दुकान खाली करने का निर्देश जारी हुआ और 13 फरवरी 2015 को एक और आदेश पारित किया गया। याचिकाकर्ताओं ने इन आदेशों को चुनौती दी थी।
नगर निगम की ओर से अधिवक्ता राहुल कुमार ने दलील दी कि लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने कहा कि यह मामला दुकानों को दूसरे पक्ष को देने यानी सबलेटिंग से जुड़ा है। नगर निगम को संबंधित जमीन पर विकास कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने आदेशों को उचित बताते हुए याचिकाओं को खारिज करने का आग्रह किया। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि आवंटन और समझौता वैध थे और उन्हें सुनवाई का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
अदालत का अवलोकन और आदेश निरस्त करने के कारण
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने पाया कि नगर निगम की ओर से 14 अक्टूबर 2014 को पारित आदेश महज तीन पंक्तियों का था। उसमें प्रार्थियों की दलीलों और दस्तावेजों पर कोई विचार नहीं किया गया था। इसी तरह 13 फरवरी 2015 के आदेश में भी तथ्यों पर समुचित विचार नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि किसी वैधानिक प्राधिकारी को सभी संबंधित तथ्यों और दस्तावेजों पर विचार करने के बाद ही आदेश पारित करना चाहिए।
इसी आधार पर अदालत ने 14 अक्टूबर 2014, 4 दिसंबर 2014 और 13 फरवरी 2015 के आदेशों को निरस्त कर दिया। अदालत ने रांची नगर निगम को प्रार्थियों को सुनवाई का अवसर देकर 12 सप्ताह के भीतर कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया। तब तक दुकानों पर प्रार्थियों का कब्जा बरकरार रहेगा। यह फैसला प्राकृतिक न्याय और प्रक्रियात्मक उचितता के सिद्धांतों को मजबूत करता है।
आगे की कार्यवाही और दुकानदारों पर प्रभाव
अब रांची नगर निगम को 12 सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का मौका देना होगा और दस्तावेजों पर विचार करने के बाद नया आदेश पारित करना होगा। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, दुकानदार अपनी दुकानों का इस्तेमाल जारी रख सकेंगे। यह फैसला उन दुकानदारों के लिए राहत की बात है जो लंबे समय से इस विवाद में उलझे हुए थे।
अदालत के निर्देश के अनुसार नगर निगम को सभी तथ्यों पर ध्यान देना होगा। यदि नया आदेश पारित होता है तो दुकानदारों को उसके खिलाफ फिर से कानूनी रास्ता अपनाने का अधिकार रहेगा। यह मामला रांची के व्यस्त व्यावसायिक इलाकों जालान रोड और अपर बाजार से जुड़ा है, जहां कई दुकानदार अपना कारोबार चला रहे हैं। हाईकोर्ट का फैसला प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने का संकेत देता है।
रांची नगर निगम को झारखंड हाईकोर्ट से लगा यह झटका दुकानदारों के लिए अस्थायी राहत लेकर आया है। 12 सप्ताह की समयसीमा में नया आदेश पारित होने तक कब्जा सुरक्षित रहेगा। अब देखना होगा कि नगर निगम दस्तावेजों और दलीलों पर विचार करने के बाद क्या फैसला लेता है।
Read More Here:-
Air India Express: पटना से बेंगलुरु जाने वालों को झटका, 15 नवंबर तक नहीं उड़ेंगी फ्लाइट्स
West Bengal CAA: 2.5 लाख लोगों को नागरिकता देने की तैयारी तेज, शुभेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलान
Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.
कवरेज: Sanjna Gupta, News Media Kiran
