Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि की तैयारियां अब पूरे जोरों पर हैं और बाजारों में पंडाल से लेकर मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाओं की रौनक साफ नजर आने लगी है। इस साल शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू हो रही है, और खास बात यह है कि इस बार कलश स्थापना के लिए चित्रा नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार चित्रा नक्षत्र में नवरात्रि की शुरुआत करना बेहद शुभ माना जाता है। इसी दिन वैधृति योग भी मौजूद रहेगा, जिससे यह अवसर और भी विशेष बन जाता है। नवरात्रि का यह पावन पर्व नौ दिनों तक चलेगा और इसका समापन नवमी तिथि के दिन होगा। देशभर में इस त्योहार को अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है, जहां बंगाल में दुर्गा पूजा की भव्यता देखने को मिलती है, वहीं गुजरात में गरबा और डांडिया की धूम रहती है। इस बार कलश स्थापना के सटीक मुहूर्त और मां दुर्गा के आगमन-प्रस्थान को लेकर भी विशेष ज्योतिषीय गणना सामने आई है।
Shardiya Navratri 2026: कलश स्थापना के लिए चित्रा नक्षत्र का महत्व
इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी और इसी दिन चित्रा नक्षत्र रात 10:32 बजे से आरंभ हो जाएगा। साथ ही वैधृति योग भी रात 9:05 बजे तक बना रहेगा, जिसके चलते इस विशेष योग में कलश स्थापना को अत्यंत शुभ माना जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र में चित्रा नक्षत्र को सृजनात्मकता, सौंदर्य और शुभता से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए इस नक्षत्र में घट स्थापना करने से नवरात्रि की पूरी साधना और भी फलदायी मानी जाती है। श्रद्धालु इस दिन विधि-विधान से कलश स्थापना करके मां दुर्गा की नौ दिवसीय पूजा-अर्चना की शुरुआत करेंगे, जो पूरे नौ दिनों तक विभिन्न स्वरूपों की आराधना के साथ आगे बढ़ेगी।
घट स्थापना और अभिजित मुहूर्त का समय
नवरात्रि की शुरुआत के लिए घट स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 5:46 बजे से लेकर 9:39 बजे तक बताया गया है, जो कलश स्थापना के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जा रहा है। इसके अलावा जो श्रद्धालु किसी कारणवश इस समय पूजा नहीं कर पाते, उनके लिए अभिजित मुहूर्त भी एक बेहतरीन विकल्प है, जो सुबह 11:13 बजे से 11:59 बजे तक रहेगा। ज्योतिष के अनुसार अभिजित मुहूर्त को हर तरह के शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है, इसलिए इस दौरान भी कलश स्थापना करना पूरी तरह फलदायी सिद्ध होगा। इन दोनों ही मुहूर्तों में से किसी एक समय पर विधिपूर्वक पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
हाथी पर सवार होकर आ रही हैं मां दुर्गा
ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार मां दुर्गा का आगमन हाथी की सवारी पर हो रहा है, जिसे अत्यंत शुभ संकेत माना जाता है। मान्यता है कि जब मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं, तो इससे ज्ञान, शांति, अच्छी वर्षा और समृद्धि का संकेत मिलता है। वहीं नवरात्रि के समापन के समय मां दुर्गा की विदाई मुर्गे पर होगी, क्योंकि इस बार नवरात्रि का समापन मंगलवार के दिन हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र में मां दुर्गा के आगमन और प्रस्थान की सवारी से आने वाले वर्ष की स्थिति का अनुमान लगाया जाता है, इसलिए इस बार की सवारी को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
नौ दिनों तक होगी देवी के नौ रूपों की आराधना
शारदीय नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की श्रद्धापूर्वक पूजा करेंगे। इसकी शुरुआत 11 अक्टूबर को मां शैलपुत्री की आराधना से होगी, इसके बाद 12 अक्टूबर को मां ब्रह्मचारिणी, 13 अक्टूबर को मां चंद्रघंटा, 14 अक्टूबर को मां कुष्मांडा और 15 अक्टूबर को मां स्कंदमाता की पूजा की जाएगी। इसके आगे 16 अक्टूबर को मां कात्यायनी, 17 अक्टूबर को मां कालरात्रि, 18 अक्टूबर को मां महागौरी और 19 अक्टूबर को मां सिद्धिदात्री की आराधना होगी। इस पूरे नौ दिवसीय अनुष्ठान का समापन 20 अक्टूबर को विजयादशमी के पावन पर्व के साथ होगा, जब मां दुर्गा की विदाई की जाएगी और रावण के पुतलों का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाया जाएगा।
बंगाल में दुर्गा पूजा और संधि पूजा का विशेष महत्व
पश्चिम बंगाल में शारदीय नवरात्रि का पर्व दुर्गा पूजा के रूप में बड़े ही भव्य और उत्साहपूर्ण तरीके से मनाया जाता है। बंगाली परंपरा के अनुसार इस बार 18 अक्टूबर को मुख्य अष्टमी व्रत और पूजा संपन्न होगी। अष्टमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे तक रहेगी, जिसके बाद नवमी तिथि की शुरुआत हो जाएगी। इसी दिन अष्टमी और नवमी के संधि काल में संधि पूजा, कन्या पूजन और नवमी हवन जैसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे। महानवमी हवन के लिए सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक का समय सबसे श्रेष्ठ माना गया है, जिसमें श्रद्धालु विशेष रूप से हवन-पूजन कर मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
गुजरात में गरबा और देशभर में उत्सव का माहौल
नवरात्रि का यह पर्व सिर्फ बंगाल तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे देश में अलग-अलग परंपराओं और रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। गुजरात में इस दौरान गरबा और डांडिया का भव्य आयोजन होता है, जहां रातभर पारंपरिक वेशभूषा में लोग नृत्य करते हुए मां दुर्गा की आराधना करते हैं। वहीं उत्तर भारत के कई हिस्सों में नौ दिनों तक व्रत रखकर मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस तरह पूरे देश में नवरात्रि का यह पर्व अलग-अलग रंगों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है, लेकिन इसके पीछे की भावना हर जगह एक समान रहती है, यानी बुराई पर अच्छाई की जीत और मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करना।
इस साल शारदीय नवरात्रि चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के विशेष संयोग के साथ शुरू हो रही है, जो श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत शुभ अवसर माना जा रहा है। घट स्थापना के सही मुहूर्त पर पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का वास होता है। मां दुर्गा के हाथी पर सवार होकर आगमन को भी शुभ संकेत के रूप में देखा जा रहा है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व में हर दिन एक अलग स्वरूप की पूजा के साथ श्रद्धालु मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे, और 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ यह उत्सव अपने समापन तक पहुंचेगा।
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Sanjana Gupta
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