Sheikh Hasina: पूर्व बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना ने फर्स्टपोस्ट को दिए विशेष साक्षात्कार में अंतरिम मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि यूनुस ने सत्ता हासिल करने के लिए जानबूझकर ‘चरमपंथी ताकतों’ से हाथ मिलाया है, जिससे बांग्लादेश भारत से दूर हो रहा है। हसीना ने इसे देश के लिए घातक बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि यूनुस की दिशाहीन विदेश नीति दक्षिण एशिया की स्थिरता को खतरे में डाल रही है। यह साक्षात्कार बांग्लादेश की मौजूदा राजनीति पर नई बहस छेड़ रहा है।
यूनुस पर आरोप: चरमपंथियों से गठजोड़, भारत को दरकिनार
शेख हसीना ने कहा कि यूनुस की नीतियां बांग्लादेश को भारत से अलग-थलग कर रही हैं। भारत भौगोलिक, आर्थिक और सुरक्षा मामलों में ढाका का सबसे स्वाभाविक साझेदार है। 4,000 किमी लंबी साझा सीमा, सांस्कृतिक रिश्ते और सुरक्षा चुनौतियां दोनों को जोड़ती हैं। हसीना ने चेतावनी दी कि चीन से जुड़ाव ठीक है, लेकिन भारत को दरकिनार करना घातक कदम है। वर्तमान प्रशासन अंतरराष्ट्रीय मान्यता की जल्दबाजी में अवसरवादी फैसले ले रहा है, जो राष्ट्रीय हितों की बजाय दबाव में हैं। इससे सुरक्षा सहयोग कमजोर हो रहा और क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ रहा। भारत को चुनावों पर चिंता जायज है, क्योंकि अवामी लीग जैसी प्रमुख पार्टियों के बिना चुनाव वैध नहीं माने जा सकते।
अल्पसंख्यकों पर हिंसा: यूनुस की चुप्पी सहमति दर्शाती
हसीना ने अगस्त 2024 से अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू समुदाय पर हो रहे हमलों को यादृच्छिक नहीं बताया। यह सुनियोजित अभियान है, जो वर्तमान शासन के संरक्षण में हो रहा। सत्ता के लिए चरमपंथियों से गठजोड़ करने पर हिंसा रुकती नहीं। प्रशासन की चुप्पी सहमति दर्शाती है। हसीना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बांग्लादेश के हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हमलों पर चुप न रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि ढाका में भरोसेमंद, जनमत-आधारित सरकार जरूरी है।
हसीना की विदेश नीति: भारत-चीन संतुलन का उदाहरण
हसीना ने अपने कार्यकाल में संतुलित विदेश नीति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और चीन दोनों से मजबूत सहयोग रखा गया, लेकिन पड़ोसी को अलग-थलग नहीं किया। यूनुस का रुख अवसरवादी है। यह बांग्लादेश की राजनीति पर नई बहस छेड़ रहा। हसीना का दावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनेगा। अधिक अपडेट्स के लिए न्यूज फॉलो करें।



