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गर्मियों की छुट्टियों में पैरेंट्स की ये 5 बड़ी गलतियां बच्चों के भविष्य और सेहत पर पड़ सकती हैं भारी

Parenting Guide 2026: भीषण गर्मी के साथ ही देशभर के स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियां शुरू हो चुकी हैं। बच्चों के लिए यह साल का सबसे खुशनुमा समय होता है जब वे पढ़ाई के बोझ और सुबह जल्दी उठने की जल्दबाजी से दूर होकर पूरी आजादी का आनंद लेते हैं। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि बच्चों की इस आजादी के बीच माता-पिता कुछ ऐसी अनजानी गलतियां कर बैठते हैं जो उनके बच्चों की आदतों और शारीरिक सेहत को लंबे समय के लिए नुकसान पहुँचा सकती हैं। मनोवैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि छुट्टियों का सही प्रबंधन न केवल बच्चों को तरोताजा करता है बल्कि उनके व्यक्तित्व विकास में भी बड़ी भूमिका निभाता है। यदि आप भी एक पैरेंट हैं तो आपको यह समझना बहुत जरूरी है कि छुट्टियों के दौरान कौन सी 5 गलतियां आपके बच्चे के लिए मुसीबत बन सकती हैं और उन्हें कैसे सुधारा जा सकता है।

Parenting Guide 2026: डिजिटल स्क्रीन को बेबीसिटर बनाने की भूल

आजकल के दौर में जब माता-पिता दोनों कामकाजी होते हैं तो छुट्टियों में बच्चों को व्यस्त रखने का सबसे आसान तरीका मोबाइल फोन या टेलीविजन बन जाता है। अक्सर पैरेंट्स अपने काम निपटाने के चक्कर में बच्चे के हाथ में स्मार्टफोन थमा देते हैं। शुरुआत में यह एक छोटी सी राहत लगती है लेकिन धीरे-धीरे यह एक गंभीर लत का रूप ले लेती है। जब बच्चा दिन का अधिकांश समय स्क्रीन के सामने बिताता है तो उसकी आंखों पर बुरा असर पड़ता ही है साथ ही उसके सामाजिक विकास की गति भी धीमी हो जाती है। स्क्रीन टाइम की अधिकता के कारण बच्चे बाहरी दुनिया से कट जाते हैं और उनमें चिड़चिड़ापन बढ़ने लगता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि पैरेंट्स को बच्चे के स्क्रीन टाइम की एक निश्चित सीमा तय करनी चाहिए और उन्हें गैजेट्स के बजाय रचनात्मक कार्यों जैसे पेंटिंग, मिट्टी के खिलौने बनाना या बागवानी में शामिल करना चाहिए।

बिगड़ा हुआ डेली रूटीन और सोने के समय में लापरवाही

गर्मियों की छुट्टियों का मतलब यह मान लिया जाता है कि अब किसी भी नियम का पालन करने की आवश्यकता नहीं है। इस चक्कर में बच्चे रात को देर तक जागते हैं और अगली सुबह दोपहर तक सोए रहते हैं। सुनने में यह सामान्य लग सकता है लेकिन यह आदत बच्चे की ‘बायोलॉजिकल क्लॉक’ यानी शरीर की आंतरिक घड़ी को पूरी तरह से बिगाड़ देती है। जब नींद का चक्र खराब होता है तो इसका सीधा असर बच्चे की भूख, पाचन और मानसिक सतर्कता पर पड़ता है। पैरेंट्स को चाहिए कि वे छुट्टियों में भी एक लचीला लेकिन प्रभावी टाइम टेबल जरूर बनाएं। यह जरूरी नहीं कि उन्हें सुबह 6 बजे ही उठाया जाए लेकिन एक निश्चित समय पर जागने और सोने की आदत उन्हें अनुशासित बनाए रखेगी जिससे स्कूल दोबारा खुलने पर उन्हें किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

पढ़ाई और सीखने की प्रक्रिया से पूरी तरह नाता तोड़ना

छुट्टियों का अर्थ अक्सर यह लिया जाता है कि अब किताबों को अलमारी में बंद कर देना चाहिए। कई पैरेंट्स सोचते हैं कि बच्चा पूरे साल मेहनत करता है इसलिए उसे अब बिल्कुल नहीं पढ़ना चाहिए। यह सोच बच्चे के सीखने की निरंतरता को खत्म कर देती है। डेढ़ या दो महीने तक किताबों से पूरी तरह दूर रहने के बाद जब बच्चा दोबारा स्कूल जाता है तो वह पिछली पढ़ी हुई कई महत्वपूर्ण चीजें भूल चुका होता है। इसे ‘समर स्लाइड’ भी कहा जाता है। इसका समाधान यह नहीं है कि उसे घंटों पढ़ाई के लिए बिठाया जाए बल्कि उसे हर दिन कम से कम आधा या एक घंटा कुछ नया पढ़ने या लिखने के लिए प्रेरित करना चाहिए। इसमें कॉमिक्स, रोचक कहानियाँ या सामान्य ज्ञान की किताबें शामिल हो सकती हैं। आप उन्हें कोई नया हुनर जैसे संगीत, कोडिंग या कोई नई भाषा सीखने के लिए भी प्रेरित कर सकते हैं जिससे उनकी बौद्धिक क्षमता का विकास होता रहे।

बच्चों के साथ समय बिताने के मौके को नजरअंदाज करना

छुट्टियों में बच्चे सबसे ज्यादा अपने माता-पिता के करीब रहना चाहते हैं और उनके साथ खेलना चाहते हैं। कई बार पैरेंट्स यह सोचते हैं कि छुट्टियों में बच्चा घर पर है और सुरक्षित है तो उनकी जिम्मेदारी खत्म हो गई। वे अपने ऑफिस के काम या घरेलू उलझनों में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि बच्चे के साथ गुणवत्तापूर्ण समय नहीं बिता पाते। जब बच्चा उपेक्षित महसूस करता है तो वह अकेलापन दूर करने के लिए गलत रास्तों या गैजेट्स की ओर झुकने लगता है। छुट्टियों का यह समय माता-पिता के लिए अपने बच्चों के साथ मजबूत बॉन्डिंग बनाने का सुनहरा अवसर होता है। आपको हर दिन कुछ समय निकालकर उनसे बातें करनी चाहिए, उनके साथ बोर्ड गेम्स खेलने चाहिए या शाम को ठंडी हवा में पार्क की सैर करनी चाहिए। इससे बच्चे को सुरक्षा और प्यार का एहसास होता है जो उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद करता है।

Parenting Guide 2026: डाइट में लापरवाही और जंक फूड की बढ़ती मांग

गर्मियों के मौसम में ठंडी चीजें जैसे आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स और बाहर का तला-भुना खाना बच्चों की पहली पसंद बन जाता है। छुट्टियों में अक्सर घर पर मेहमानों का आना-जाना लगा रहता है या बाहर घूमने के दौरान लगातार बाहर का खाना खाया जाता है। पैरेंट्स भी छुट्टियों के मूड में बच्चों की इन मांगों के आगे झुक जाते हैं। अत्यधिक चीनी और मैदे वाली चीजों का सेवन बच्चों में मोटापा, सुस्ती और पेट की बीमारियों का कारण बनता है। गर्मियों में बच्चों के शरीर को हाइड्रेटेड रखना और पोषक तत्व प्रदान करना सबसे बड़ी चुनौती होती है। आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी डाइट में मौसमी फल जैसे तरबूज, खरबूजा, आम और घर का बना ताजा नींबू पानी या छाछ शामिल हो। जंक फूड के बजाय घर पर ही पौष्टिक और स्वादिष्ट विकल्प तैयार किए जा सकते हैं जिससे उनकी सेहत पर बुरा असर न पड़े।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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