इस साल के फिजियोलॉजी या मेडिसिन के नोबेल पुरस्कार की घोषणा कर दी गई है। यह सम्मान मैरी ई. ब्रुनको (Mary E. Brunkow), फ्रेड रामस्डेल (Fred Ramsdell) और शिमोन सकागुची (Shimon Sakaguchi) को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया है। तीनों वैज्ञानिकों ने मिलकर यह महत्वपूर्ण खोज की कि मानव प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) अपने ही शरीर पर हमला क्यों नहीं करती और Regulatory T Cells (नियामक टी कोशिकाएं) किस तरह इस संतुलन को बनाए रखती हैं।
नोबेल पुरस्कार 2025: मेडिसिन में तीन वैज्ञानिकों को सम्मान, यहाँ मिलेगी सारी जानकारी
मुख्य बातें
- सख्शियत और उपलब्धि
- Foxp3 जीन और Immune Balance

सख्शियत और उपलब्धि
मैरी ई. ब्रुनको (जन्म 1961)
प्रिंसटन विश्वविद्यालय से पीएचडी।
वर्तमान में Institute for Systems Biology, सिएटल में वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधक।
2001 में Foxp3 जीन की खोज में अहम भूमिका निभाई।
फ्रेड रामस्डेल (जन्म 1960)
कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजिल्स से पीएचडी।
वर्तमान में Sonoma Biotherapeutics, सैन फ्रांसिस्को में वैज्ञानिक सलाहकार।
Foxp3 जीन और Autoimmune बीमारियों के बीच संबंध स्थापित किया।
शिमोन सकागुची (जन्म 1951)
क्योटो विश्वविद्यालय से पीएचडी।
Osaka University Immunology Frontier Research Center में प्रोफेसर।
2003 में साबित किया कि Foxp3 जीन नियामक टी कोशिकाओं के विकास को नियंत्रित करता है।
Foxp3 जीन और Immune Balance
2001: ब्रुनको और रामस्डेल ने Foxp3 जीन की खोज की।
इस जीन में गड़बड़ी होने पर प्रतिरक्षा तंत्र नियंत्रण खो देता है और IPEX Syndrome जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है।
2003: सकागुची ने बताया कि यही जीन Regulatory T Cells के विकास और कार्य के लिए आवश्यक है।
इन कोशिकाओं की मदद से शरीर खुद पर हमला नहीं करता और Autoimmune Diseases (स्वप्रतिरक्षा रोगों) से सुरक्षा मिलती है।
नोबेल समिति के अध्यक्ष ओले काम्पे ने कहा: “इन खोजों ने यह समझना संभव किया कि हम सभी गंभीर स्वप्रतिरक्षा रोगों से क्यों नहीं पीड़ित होते।”
अब इन खोजों के आधार पर नई थेरपी विकसित की जा रही हैं:
Autoimmune Diseases जैसे टाइप-1 डायबिटीज, रूमेटॉयड आर्थराइटिस के इलाज के लिए।
कैंसर थेरपी में Immune Modulation के लिए।
Organ Transplantation में रिजेक्शन रोकने के लिए।
कवरेज: Krishan Mohan shukla, News Media Kiran
