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TMC Election Symbol Dispute पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग को फैसले के लिए 4 महीने की डेडलाइन

28 सितंबर 2026
TMC Election Symbol Dispute
TMC Election Symbol Dispute

TMC Election Symbol Dispute: TMC के चुनाव चिह्न विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को चार महीने के भीतर अंतिम फैसला लेने का निर्देश दिया है। तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद पर सोमवार को सुनवाई हुई। अदालत ने साफ कहा कि यह स्थिति अनिश्चित समय तक नहीं चल सकती। पार्टी पर नियंत्रण को लेकर दो गुटों में खींचतान चल रही है और इसी बीच चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को अंतरिम व्यवस्था के तौर पर वैकल्पिक नाम और चिह्न दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर आयोग को चार महीने में मामला निपटाने में कोई दिक्कत आती है, तो वह अदालत में आवेदन दाखिल कर सकता है। यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को चार महीने का समय देते हुए कहा कि विवाद का निपटारा जल्द होना चाहिए। अदालत के मुताबिक मौजूदा अनिश्चितता को अनिश्चित काल तक जारी नहीं रखा जा सकता।

अदालत ने आयोग को राहत का रास्ता भी खुला रखा है। अगर तय समय में मामला निपटाने में कोई समस्या आती है, तो आयोग सुप्रीम कोर्ट में आवेदन देकर अपनी बात रख सकता है।

गुरुवार की सुनवाई में क्या हुआ था

यह मामला पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका से जुड़ा है। उन्होंने टीएमसी के नाम और घास-फूल चुनाव चिह्न को फ्रीज करने के चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी है। इस याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई थी।

उस दिन सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से कहा था कि वह सोमवार तक बताए कि सिंबल फ्रीज करने के मामले में अंतिम फैसला कब तक लेगा। अदालत ने तब भी कहा था कि आयोग को इस मामले का जल्द निपटारा करना चाहिए। अगली सुनवाई के लिए 28 सितंबर की तारीख तय की गई थी।

तीन जजों की बेंच और कपिल सिब्बल की दलील

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने ममता बनर्जी की याचिका सुनी। ममता गुट की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा।

सिब्बल ने कहा कि वे चुनाव रोकने की मांग नहीं कर रहे। उनकी मांग है कि पार्टी को उसका मूल नाम और चुनाव चिह्न बनाए रखने दिया जाए। उन्होंने इसे पार्टी के अस्तित्व का सवाल बताया और अदालत से उचित उपाय करने का आग्रह किया।

कॉरपोरेशन चुनाव पर असर का तर्क

ममता बनर्जी गुट ने अदालत में दलील दी कि अगर आयोग जल्द अंतिम फैसला नहीं लेता, तो नवंबर में होने वाला कॉरपोरेशन चुनाव प्रभावित होगा। यही वजह है कि गुट ने मामले के तेज निपटारे पर जोर दिया।

चुनाव आयोग ने फिलहाल उपचुनाव को देखते हुए अंतरिम फैसला लिया है। यानी अभी की व्यवस्था स्थायी नहीं, बल्कि एक अस्थायी इंतजाम है। स्थायी फैसला आने तक दोनों गुट अलॉट किए गए नए नाम और चिह्न के साथ ही मैदान में उतरेंगे।

आयोग ने किस गुट को क्या नाम और चिह्न दिया

चुनाव आयोग ने हाल में ममता बनर्जी के गुट को ममता टीएमसी नाम और फुटबॉल प्लेयर का चिह्न आवंटित किया है। वहीं बागी गुट को डेमोक्रेटिक टीएमसी नाम और लिफाफा चिह्न दिया गया है।

ममता बनर्जी ने इसी अंतरिम फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दोनों गुटों में पार्टी पर नियंत्रण को लेकर विवाद है, और आयोग का अंतिम फैसला तय करेगा कि तृणमूल कांग्रेस का मूल नाम और घास-फूल का चिह्न किसके पास रहेगा। विवाद की शुरुआत और गुटों के गठन का ब्योरा उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

आगे क्या होगा

अब गेंद चुनाव आयोग के पाले में है। उसे चार महीने के भीतर तय करना होगा कि नाम और चिह्न को लेकर अंतिम निर्णय क्या होगा। समय सीमा में दिक्कत आने पर वह सुप्रीम कोर्ट से और वक्त मांग सकता है।

राजनीतिक रूप से भी यह फैसला अहम रहेगा। नवंबर में कॉरपोरेशन चुनाव प्रस्तावित हैं, और ममता गुट पहले ही इन पर असर की आशंका जता चुका है। चार महीने की समय सीमा इस चुनाव के बाद भी खत्म हो सकती है, इसलिए दोनों गुटों की नजर आयोग के अगले कदम पर रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर जारी विवाद में चुनाव आयोग को चार महीने में फैसला लेने का निर्देश दिया है। अदालत ने साफ कहा कि अनिश्चितता अनिश्चित काल तक नहीं चल सकती, हालांकि आयोग को जरूरत पड़ने पर आवेदन देने की छूट भी मिली है। फिलहाल ममता गुट के पास ममता टीएमसी नाम और फुटबॉल प्लेयर का चिह्न है, जबकि बागी गुट के पास डेमोक्रेटिक टीएमसी और लिफाफा। अब आयोग के अंतिम फैसले से तय होगा कि मूल नाम और घास-फूल चिह्न किसे मिलेगा।

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Author: Sanjna Gupta

Sanjana Gupta Hindi Content Writer | New Media Kiran Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

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कवरेज: Sanjna Gupta, News Media Kiran

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