UP News: उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में गुरुवार को एक बेहद दर्दनाक हादसा हो गया। सहावर थाना क्षेत्र के नगला माधव गांव में मक्का की फसल को बारिश से बचाने गए एक ही परिवार के तीन सदस्य आकाशीय बिजली की चपेट में आ गए और उनकी मौत हो गई। मृतकों में देवर, भाभी और उनकी 11 वर्षीय बेटी शामिल हैं। घटना की खबर फैलते ही पूरे गांव में मातम छा गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
यह हादसा 15 अक्टूबर को दिन के समय मौसम खराब होने के दौरान हुआ। गांव से करीब 100 मीटर दूर खेत में मक्का की फसल सूख रही थी। बारिश शुरू होने की आशंका को देखते हुए तीनों सदस्य फसल पर तिरपाल डालने के लिए घर से निकले थे। बारिश शुरू होते ही वे पास में लगे पीपल के पेड़ के नीचे शरण लेने चले गए, तभी अचानक बिजली गिर गई।
नगला माधव गांव में क्या हुआ था?
जानकारी के अनुसार, नीरज, उनकी भाभी रामवती और रामवती की बेटी कशिश मक्का की फसल को बारिश से नुकसान न होने देने के लिए खेत गए थे। फसल अभी सूख रही थी और पानी गिरने से नुकसान होने का डर था। तीनों ने मिलकर तिरपाल डालने का काम शुरू किया। इसी बीच आसमान में बादल छा गए और बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचने के लिए तीनों पास स्थित पीपल के पेड़ के नीचे खड़े हो गए। अचानक तेज आकाशीय बिजली गिरी और तीनों उसकी चपेट में आ गए। वे गंभीर रूप से झुलस गए। फसल बचाने की कोशिश में तीनों की जान चली गई।
हादसे के बाद गांव में चीख-पुकार मच गई। पास के लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे। उन्हें देखकर सभी सदमे में आ गए। ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सहावर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर तीनों को उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाया। चिकित्सकों ने जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया। एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत की खबर गांव में फैलते ही लोग दौड़े-दौड़े पहुंचे और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
मृतकों की पहचान क्या है और परिवार पर क्या असर पड़ा?
मृतकों की पहचान नीरज पुत्र अतर सिंह, रामवती उर्फ रामू पत्नी सुभाष और उनकी 11 वर्षीय बेटी कशिश के रूप में हुई है। नीरज अपने परिवार के सहारे थे। उनकी मौत से घर के छोटे बच्चों पर संकट आ गया है। वहीं रामवती और उनकी बेटी कशिश की एक साथ मौत ने पूरे परिवार को गहरा सदमा दिया। एक ही हादसे में मां-बेटी का साथ छूट गया। परिवार के तीन सदस्य हमेशा के लिए बिछड़ गए। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। गांव के लोग भी इस घटना से स्तब्ध हैं।
रामवती और नीरज दोनों मिलकर खेत का काम संभालते थे। फसल बचाने के लिए वे घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौट सके। कशिश भी अपनी मां के साथ खेत गई थी। इस उम्र में उसकी मौत ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। कई लोग इस बात पर अफसोस जता रहे हैं कि अगर वे पेड़ के नीचे न खड़े होते तो शायद यह हादसा टल जाता।
हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन ने क्या किया?
घटना की सूचना मिलते ही सहावर पुलिस मौके पर पहुंची। तीनों को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया। पुलिस ने मौके का मुआयना किया और आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी। गांव में शोक के माहौल को देखते हुए स्थानीय प्रशासन भी अलर्ट रहा। परिजनों को सांत्वना दी गई और आगे की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
कासगंज जिले में इस तरह की घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में मौसम के खतरों की याद दिला दी है। बारिश के मौसम में फसल बचाने के लिए लोग अक्सर खुले में निकलते हैं, लेकिन आकाशीय बिजली का खतरा हमेशा बना रहता है।
ऐसी घटनाओं में क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
बारिश और बिजली गिरने के दौरान खुले मैदान या ऊंचे पेड़ों के नीचे खड़ा होना खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पीपल जैसे बड़े पेड़ों के नीचे शरण लेना बिजली गिरने की संभावना बढ़ा देता है। फसल बचाने के लिए निकलते समय मौसम का सही अंदाजा लगाना जरूरी है। अगर आसमान में काले बादल छाए हों और बिजली चमक रही हो, तो घर में ही रहना बेहतर होता है।
ग्रामीण इलाकों में फसल के मौसम में ऐसी घटनाएं समय-समय पर होती रहती हैं। लोगों को जागरूक करने और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी जाती है। कासगंज की इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया कि मौसम कितना अप्रत्याशित हो सकता है। परिवार के तीन सदस्यों की मौत से नगला माधव गांव शोक में डूबा हुआ है। पुलिस और प्रशासन आगे की कार्रवाई में जुटे हुए हैं।
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