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US Job Crisis 2025: अमेरिका में नौकरियों का संकट, 9 लाख से ज्यादा जॉब पोस्टिंग्स गायब, BLS डेटा में खुलासा

US Job Crisis 2025: अमेरिका का जॉब मार्केट अब मुश्किलों से जूझ रहा है। अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो (BLS) के ताजा आंकड़ों से पता चला है कि पिछले एक साल में 9 लाख 91 हजार नौकरियां कम हो गईं। यह गिरावट अर्थशास्त्रियों की उम्मीदों से भी ज्यादा है, जिन्होंने सिर्फ 6 लाख 82 हजार नौकरियों के नुकसान का अनुमान लगाया था। 2024 में हर महीने औसतन 1 लाख 6 हजार नौकरियां जुड़ रही थीं, लेकिन 2025 में यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 44 हजार रह गया। यह खबर उन भारतीय स्टूडेंट्स के लिए झटका है जो अमेरिका में पढ़ाई के बाद नौकरी तलाशते हैं।

मार्च 2024 से 2025 तक 9.91 लाख नौकरियां गुम

BLS की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2024 से मार्च 2025 के बीच अमेरिकी जॉब मार्केट में भारी गिरावट आई। कुल 9 लाख 91 हजार नौकरियों का नुकसान हुआ, जो हाल के वर्षों में सबसे ज्यादा है। पहले के साल में हर महीने 1 लाख 68 हजार नौकरियां बढ़ रही थीं, लेकिन अब हालात उलट गए हैं। यह आंकड़ा न सिर्फ अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चिंता बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट महामारी के बाद की रिकवरी को पीछे धकेल रही है।

 टेक सेक्टर पर AI का कहर, हॉस्पिटैलिटी में भी कमी

इस नौकरी संकट के पीछे कई वजहें हैं। सबसे ज्यादा असर सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र पर पड़ा है, जहां इंटरनेट कंपनियां, सॉफ्टवेयर प्रकाशन और प्रसारण सेवाओं में भारी छंटनी हुई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल से कई नौकरियां खतरे में हैं, क्योंकि मशीनें इंसानी काम संभाल रही हैं। इसके अलावा, पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में भी नौकरियों की कमी देखी गई। फेडरल रिजर्व अब ब्याज दरें कम करने पर विचार कर रहा है ताकि अर्थव्यवस्था को झटका लगे। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यह सिलसिला जारी रहा, तो आर्थिक मंदी का डर बढ़ सकता है।

स्टूडेंट्स और विदेशी कामगारों पर असर

अमेरिका हमेशा से नौकरी और करियर के लिए स्वर्ण भूमि माना जाता था, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। भारतीय और अन्य देशों के स्टूडेंट्स, जो H-1B वीजा पर नौकरी तलाशते हैं, अब मुश्किलों से घिरे हैं। कई कंपनियां नए कर्मचारियों की भर्ती रोक रही हैं, जिससे अनुभवहीन युवाओं को मौका मिलना मुश्किल हो गया। विशेषज्ञों का कहना है कि अब स्टूडेंट्स को वैकल्पिक देशों जैसे कनाडा या ऑस्ट्रेलिया पर नजर रखनी चाहिए। साथ ही, AI और टेक स्किल्स सीखना जरूरी हो गया है ताकि भविष्य में प्रतिस्पर्धा में टिक सकें।

भविष्य की तस्वीर: मंदी का साया, लेकिन उम्मीद बाकी

BLS डेटा से साफ है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था धीमी गति पकड़ रही है। अगर नौकरियों की गिरावट रुकी नहीं, तो बेरोजगारी बढ़ सकती है। लेकिन कुछ अर्थशास्त्री मानते हैं कि ब्याज दरें घटने से रिकवरी हो सकती है। स्टूडेंट्स को सलाह है कि नेटवर्किंग बढ़ाएं, इंटर्नशिप करें और लचीला रहें। भारत जैसे देशों में अब अवसर बढ़ रहे हैं, इसलिए घरेलू बाजार पर भी फोकस करें। अधिक जानकारी के लिए BLS की वेबसाइट चेक करें।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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