West Bengal Election: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से जुड़ा एक नया खुलासा सामने आया है, जिसमें भाजपा द्वारा राज्य के कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को प्रचार के बदले भारी भरकम रकम चुकाए जाने की बात सामने आई है। चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है कि पार्टी ने चुनाव प्रचार अभियान को मजबूत करने के लिए इन्फ्लुएंसर्स की मदद ली और इसके एवज में उन्हें भुगतान किया। इस सूची में सबसे ज्यादा चर्चा में जो नाम है, वह है बंगाली अभिनेता और इन्फ्लुएंसर सयाक चक्रवर्ती, जिन्हें 2.5 लाख रुपये मिलने की बात सामने आई है। सयाक वही चेहरा हैं जिन्होंने कोलकाता के पार्क स्ट्रीट स्थित मशहूर रेस्तरां ‘ओलिपब’ में मटन स्टेक की जगह बीफ परोसे जाने का विवाद उठाया था, जो बाद में एक बड़ा राजनीतिक और सांप्रदायिक मुद्दा बन गया था। इस खुलासे के बाद राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है और विपक्षी दलों ने भाजपा पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।
West Bengal Election: चुनाव आयोग के आंकड़ों में सामने आया बड़ा खर्च
चुनाव आयोग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक भाजपा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कुल 286.99 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह रकम पार्टी के उस कुल चुनावी खर्च का करीब 54 प्रतिशत हिस्सा है, जो उसने चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में मिलाकर किया। इतनी बड़ी रकम में से एक हिस्सा सीधे तौर पर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को भुगतान के तौर पर गया है, जिसे लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। आंकड़े बताते हैं कि यह भुगतान सीधे तौर पर न होकर राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्मों के माध्यम से किया गया था।
सोशल मीडिया रीच के आधार पर हुआ भुगतान
जानकारी के अनुसार इन्फ्लुएंसर्स से संपर्क करने और उन्हें भुगतान करने का आधार उनकी सोशल मीडिया पर मौजूदगी और पकड़ रही। जिन इन्फ्लुएंसर्स के फॉलोअर्स ज्यादा थे और जिनकी पहुंच बड़े वर्ग तक थी, उन्हें प्राथमिकता दी गई। इसके साथ ही इन्फ्लुएंसर्स को कुछ खास मुद्दों पर फोकस करने के निर्देश भी दिए गए थे। इनमें मुर्शिदाबाद क्षेत्र में सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दे और कोलकाता में चर्चित आरजी कर मामला प्रमुख रूप से शामिल था। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रचार अभियान को क्षेत्रीय और भावनात्मक मुद्दों से जोड़कर आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई गई थी।
सयाक चक्रवर्ती का नाम क्यों है चर्चा में
इस पूरी सूची में जो नाम सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है, वह अभिनेता और इन्फ्लुएंसर सयाक चक्रवर्ती का है। आंकड़ों के अनुसार भाजपा की ओर से उन्हें 2.5 लाख रुपये का भुगतान किया गया। सयाक का नाम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि जनवरी महीने में उन्होंने ही कोलकाता के पार्क स्ट्रीट स्थित प्रसिद्ध रेस्तरां ‘ओलिपब’ में मटन स्टेक की जगह बीफ परोसे जाने का मामला उठाया था। यह मुद्दा उस वक्त तेजी से फैला और आगे चलकर एक बड़े राजनीतिक और सांप्रदायिक विवाद में तब्दील हो गया था। अब जब उन्हें भाजपा से भुगतान मिलने की बात सामने आई है, तो उनकी निष्पक्षता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
शमिक अधिकारी का नाम भी सूची में शामिल
इस सूची में दूसरा बड़ा नाम शमिक अधिकारी का है, जिन्हें भाजपा की ओर से 13 लाख रुपये का भुगतान किया गया। शमिक ने आरजी कर मामले के बाद तत्कालीन तृणमूल सरकार पर निशाना साधते हुए ‘बटन’ नाम से एक वीडियो तैयार किया था। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था और भाजपा के कई नेताओं ने भी इसे अपने प्लेटफॉर्म पर शेयर किया था। हालांकि फरवरी महीने में शमिक अधिकारी को रेप और गलत तरीके से बंधक बनाने के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद उनकी छवि को लेकर पहले से ही विवाद बना हुआ था।
कानूनी और संचार विशेषज्ञों की राय
इस पूरे मामले को लेकर कानूनी और कम्युनिकेशन क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का पेड कंटेंट एक ‘ग्रे एरिया’ में आता है। विशेषज्ञों के मुताबिक जब कोई इन्फ्लुएंसर किसी राजनीतिक दल से पैसे लेकर कंटेंट तैयार करता है, तो उसमें स्पष्ट रूप से डिस्क्लेमर होना जरूरी है। ऐसा न किए जाने पर आम दर्शकों के लिए यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि जो कंटेंट वे देख रहे हैं, वह वास्तविक राय है या प्रायोजित प्रचार। इस पारदर्शिता की कमी को लेकर विशेषज्ञ लगातार चिंता जता रहे हैं।
विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रिया
इस खुलासे के सामने आते ही तृणमूल कांग्रेस, सीपीएम और सिविल सोसायटी से जुड़े लोगों ने कड़ा विरोध जताया है। तृणमूल कांग्रेस की आईटी सेल प्रमुख उपासना चौधरी ने सयाक चक्रवर्ती पर तंज कसते हुए उनका पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सयाक ने 2.5 लाख रुपये की रकम हजम कर ली है। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली, जिससे यह मामला और सुर्खियों में आ गया।
भाजपा ने भुगतान को बताया पूरी तरह वैध
विपक्ष के आरोपों के बीच भाजपा की ओर से भी स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आई है। पश्चिम बंगाल भाजपा के मुख्य प्रवक्ता देबजीत सरकार ने बेबाकी से स्वीकार किया कि पार्टी ने इन्फ्लुएंसर्स को भुगतान किया है। उन्होंने कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है और भविष्य में भी पार्टी इसी तरह काम करती रहेगी। देबजीत सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह भुगतान सरकारी खजाने से नहीं बल्कि पार्टी फंड से किया गया है और इसका पूरा हिसाब मौजूद है। भाजपा के इस रुख से साफ है कि पार्टी इस मुद्दे पर बचाव की मुद्रा में नहीं बल्कि आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
आगे क्या हो सकते हैं इस विवाद के असर
इस पूरे मामले ने चुनाव प्रचार में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की भूमिका और उनकी पारदर्शिता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। आने वाले समय में चुनाव आयोग और अन्य नियामक संस्थाएं इस दिशा में सख्त दिशा-निर्देश ला सकती हैं, ताकि राजनीतिक दलों और इन्फ्लुएंसर्स के बीच होने वाले वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता बनी रहे। साथ ही यह मामला आम जनता के बीच भी यह जागरूकता बढ़ा सकता है कि सोशल मीडिया पर देखे जाने वाले कंटेंट के पीछे कहीं कोई प्रायोजित एजेंडा तो नहीं छिपा है।
पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा द्वारा इन्फ्लुएंसर्स को दिए गए भुगतान का यह खुलासा राजनीतिक प्रचार के बदलते तौर-तरीकों को उजागर करता है। सयाक चक्रवर्ती और शमिक अधिकारी जैसे नामों के सामने आने से यह स्पष्ट हो गया है कि सोशल मीडिया अब चुनावी रणनीति का एक अहम हिस्सा बन चुका है। भाजपा ने भले ही इसे नियमों के दायरे में किया गया वैध खर्च बताया हो, लेकिन पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवाल आसानी से शांत होते नहीं दिख रहे। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी खुलासे और राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल सकती है, जो पश्चिम बंगाल की राजनीति को और गरमा सकती है।
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Sanjana Gupta
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