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पश्चिम बंगाल ने विद्यांजलि योजना को किया नजरअंदाज, केंद्र का आरोप, 82 हजार स्कूलों में से केवल 55 ने लिया पंजीकरण

West Bengal News: केंद्र सरकार ने बुधवार को पश्चिम बंगाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार ने सितंबर 2021 में शुरू की गई स्कूल स्वयंसेवक पहल विद्यांजलि योजना को पूरी तरह से नकार दिया है। राज्यसभा में अनुपूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि पश्चिम बंगाल के 82 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में से केवल 55 स्कूलों ने इस योजना में पंजीकरण कराया है।

पश्चिम बंगाल के भाजपा सांसद समीक चट्टोपाध्याय ने प्रश्नकाल के दौरान अन्य राज्यों की तुलना में पश्चिम बंगाल की विद्यांजलि योजना में भागीदारी के बारे में पूछा था। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की योजनाएं राज्य में लागू नहीं की जा रही हैं। इस पर मंत्री ने जो जवाब दिया, उसने सदन में हंगामे की स्थिति पैदा कर दी।

केवल 2134 स्वयंसेवकों ने किया पंजीकरण

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शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने सदन को बताया कि पश्चिम बंगाल की 82159 सरकारी स्कूलों में से केवल 55 स्कूलों ने योजना में पंजीकरण कराया है। यह आंकड़ा राज्य में योजना के प्रति उदासीनता को दर्शाता है। मंत्री ने कहा कि चूंकि सरकार इस योजना को लागू नहीं करना चाहती, इसलिए स्वयंसेवकों की संख्या भी बेहद कम है।

केंद्रीय मंत्री ने विस्तार से बताया कि पश्चिम बंगाल से केवल 2134 व्यक्तियों ने स्वयंसेवकों के रूप में पंजीकरण कराया है। यह संख्या एक बड़े राज्य के लिए नगण्य है। उन्होंने कहा कि इसी कारण राज्य में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व परियोजनाएं भी नहीं हो रही हैं और कोई भी परियोजना पूरी नहीं हुई है।

यह आंकड़े अन्य राज्यों के साथ तुलना में और भी चिंताजनक हैं। देश भर में 817711 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों ने योजना में पंजीकरण कराया है, जबकि पश्चिम बंगाल की भागीदारी नगण्य है।

संकीर्ण राजनीतिक सोच का आरोप

मंत्री जयंत चौधरी ने तीखे शब्दों में पश्चिम बंगाल सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि संकीर्ण राजनीतिक सोच के कारण देश भर के 2 करोड़ छात्रों को जहां इस योजना का लाभ मिला है, वहीं पश्चिम बंगाल के बच्चे इससे वंचित रह गए हैं। उन्होंने कहा कि यह स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।

चौधरी ने पश्चिम बंगाल की सरकार से अपील करते हुए कहा कि यह युवाओं के लिए एक मंच है। उन्होंने सवाल किया कि क्या पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूल पुस्तकालय नहीं चाहते, क्या उन्हें खेल के मैदान नहीं चाहिए और क्या वे कंप्यूटर और स्मार्ट कक्षाएं नहीं चाहते। मंत्री ने कहा कि जब समुदाय संसाधन देना चाहता है तो सरकार को उन्हें सक्षम बनाना चाहिए।

उन्होंने सदस्यों से अपील की कि वे अपनी सरकार से संपर्क करें और पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों को विद्यांजलि योजना में आने दें। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह राजनीति का नहीं बल्कि बच्चों के भविष्य का मामला है।

टीएमसी सांसदों का हंगामा

जब भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री बोल रहे थे तब सदन में तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने हंगामा किया। टीएमसी सांसदों ने इस आरोप का विरोध किया और शोर-शराबे के साथ अपनी नाराजगी जताई। हालांकि मंत्री ने अपनी बात पूरी की और तथ्यों के साथ अपना पक्ष रखा।

भाजपा सांसद समीक चट्टोपाध्याय ने अपने प्रश्न में कहा था कि चाहे रेलवे हो, फ्रेट कॉरिडोर हो, तेल क्षेत्र हो या शिक्षा, सब कुछ अटका हुआ है। उनका आरोप था कि पश्चिम बंगाल में केंद्र की योजनाओं को जानबूझकर रोका जा रहा है।

यह पहली बार नहीं है जब केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच किसी योजना के कार्यान्वयन को लेकर विवाद हुआ है। पहले भी आयुष्मान भारत योजना और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी केंद्रीय योजनाओं को राज्य में लागू करने को लेकर मतभेद रहे हैं।

विद्यांजलि योजना का उद्देश्य और कार्यप्रणाली

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने लिखित उत्तर में बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 स्कूलों में सीखने को बढ़ाने के लिए समुदाय और पूर्व छात्रों की भागीदारी को बढ़ावा देती है। समुदाय के स्वयंसेवकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए सितंबर 2021 में विद्यांजलि नामक स्कूल स्वयंसेवक पहल शुरू की गई थी।

यह पहल समुदाय के सदस्यों, व्यक्तिगत स्वयंसेवकों, संस्थानों, संगठनों, पूर्व छात्रों, अनिवासी भारतीयों, सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारियों और शिक्षकों तथा नागरिक समाज को सीधे सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों से जुड़ने और अपनी सेवाएं, संपत्ति, सामग्री और उपकरण योगदान करने में सक्षम बनाती है।

नवंबर 2025 तक विद्यांजलि पोर्टल पर कुल 817711 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल, 559862 स्वयंसेवक और सीएसआर संस्थाओं, संस्थानों और नागरिक समाज संगठनों सहित 2676 भागीदार संगठन पंजीकृत हो चुके थे। वर्तमान में 843961 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल, 561843 स्वयंसेवक और 2687 भागीदार संगठन पोर्टल पर पंजीकृत हैं।

योजना से मिलने वाले लाभ

बुनियादी ढांचे के समर्थन में शिक्षण-अधिगम सामग्री, आईसीटी और डिजिटल सुविधाएं, एसटीईएम और नवाचार प्रयोगशालाएं, खेल उपकरण, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं, स्वच्छता सुविधाएं, नवीकरणीय ऊर्जा समाधान और छोटे नागरिक कार्य शामिल हैं।

मंत्री ने बताया कि विद्यांजलि ने सीखने की सहायता सेवाओं को मजबूत किया है और सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में बुनियादी ढांचे में सुधार किया है। इसने बेहतर शिक्षण वातावरण, छात्रों की अधिक भागीदारी, अनुभवात्मक और व्यावहारिक शिक्षा के लिए अधिक अवसर और स्कूल संसाधनों की बेहतर उपलब्धता में योगदान दिया है।

प्रधान ने कहा कि आज तक विद्यांजलि पोर्टल के माध्यम से 56734 से अधिक सेवा गतिविधية और 35695 संपत्ति योगदान पूरे किए जा चुके हैं, जिससे पूरे देश में 2 करोड़ से अधिक छात्र लाभान्वित हुए हैं।

West Bengal News: राज्य सरकार का पक्ष

हालांकि पश्चिम बंगाल सरकार ने इस मामले पर अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन अनौपचारिक रूप से राज्य सरकार के सूत्रों का कहना है कि राज्य की अपनी शिक्षा योजनाएं हैं जो बेहतर काम कर रही हैं। उनका तर्क है कि केंद्र की योजनाओं को थोपने की बजाय राज्यों को अपनी जरूरतों के अनुसार योजनाएं बनाने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।

पश्चिम बंगाल सरकार ने पहले भी कई केंद्रीय योजनाओं में भागीदारी से इनकार किया है। राज्य सरकार का तर्क रहा है कि इन योजनाओं में राज्य का वित्तीय योगदान भी होता है और यदि केंद्र पूरा पैसा नहीं देता तो राज्य पर बोझ पड़ता है।

यह विवाद शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में केंद्र-राज्य संबंधों की जटिलता को दर्शाता है और इस बहस को फिर से खड़ा करता है कि संघीय ढांचे में योजनाओं के कार्यान्वयन में सहयोग कैसे सुनिश्चित किया जाए।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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