कोलकाता: राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर के नेतृत्व में आयोग की टीम अप्रैल 2025 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा से प्रभावित महिलाओं से मिलने के लिए तीन दिवसीय दौरे पर पहुंची। दौरे की शुरुआत मालदा के राहत शिविर से हुई, जहां मुर्शिदाबाद से विस्थापित लोग शरण लिए हुए थे। इसके बाद टीम मुर्शिदाबाद के हिंसा प्रभावित इलाकों में पहुंची।
West Bengal News LIVE Update:राष्ट्रीय महिला आयोग की तीन दिवसीय यात्रा: मलदा से शुरू होगा मुर्शिदाबाद का जायजा
मुख्य बातें
- किस हिंसा के बाद हुआ दौरा
- मालदा के राहत शिविर में पहुंची टीम
- मुर्शिदाबाद में पीड़ितों से मुलाकात
- कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस

किस हिंसा के बाद हुआ दौरा
वक्फ (संशोधन) कानून के विरोध में 11 और 12 अप्रैल को मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज, सूती, धुलियान और जंगीपुर इलाकों में हिंसा भड़क उठी थी। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, इन झड़पों में तीन लोगों की मौत हुई और सैकड़ों लोग बेघर हो गए। एनसीडब्ल्यू ने इस हिंसा का स्वतः संज्ञान लिया था।
मालदा के राहत शिविर में पहुंची टीम
शुक्रवार, 18 अप्रैल को आयोग की टीम मालदा के वैष्णवनगर स्थित पारलालपुर हाई स्कूल पहुंची, जिसे राहत शिविर में बदला गया था। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, विजया रहाटकर ने वहां महिलाओं से मुलाकात की और उनकी शिकायतें दर्ज कीं। उन्होंने कहा, “यहां महिलाओं और बच्चों की हालत देखकर मैं स्तब्ध हूं। उन्हें जबरन घरों से निकाला गया और वे अकल्पनीय सदमे से गुजरे हैं। वे डरे हुए हैं।” उन्होंने बताया कि आयोग ने जांच समिति गठित की है और विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जाएगी। टीम में आयोग की सदस्य अर्चना मजूमदार भी शामिल थीं। उसी दिन राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम भी मालदा पहुंची थी।
मुर्शिदाबाद में पीड़ितों से मुलाकात
शनिवार, 19 अप्रैल को आयोग की टीम मुर्शिदाबाद के जाफराबाद, बेतबोना, धुलियान और शमशेरगंज इलाकों में पहुंची। पीटीआई के अनुसार, प्रभावित महिलाओं ने हिंसा के दिनों की आपबीती सुनाई और जिले के चुनिंदा इलाकों में स्थायी बीएसएफ कैंप लगाने तथा सांप्रदायिक झड़पों की एनआईए जांच की मांग की।
बेतबोना में रहाटकर ने पीड़ितों से कहा, “हम यहां आपकी तकलीफ देखने आए हैं। चिंता मत कीजिए। देश और आयोग आप सबके साथ है। यह मत सोचिए कि आप अकेले हैं।” उन्होंने कहा कि आयोग अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगा।
कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस
दौरे के आखिरी दिन रविवार, 20 अप्रैल को कोलकाता में इंडिया टुडे के अनुसार, रहाटकर ने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा के सबसे बड़े शिकार हमेशा महिलाएं और बच्चे होते हैं। उन्होंने कहा, “कई घर तोड़े गए और जला दिए गए। लोगों के साथ लूटपाट और अत्याचार हुआ।” उन्होंने कहा कि सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पश्चिम बंगाल सरकार की है।
उन्होंने बताया कि विस्तृत रिपोर्ट केंद्र को सौंपी जाएगी और इसकी प्रतियां पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को भी भेजी जाएंगी। उन्होंने राज्य महिला आयोग से भी प्रभावित इलाकों का दौरा करने की अपील की।
बीएसएफ की भूमिका की सराहना
रहाटकर ने प्रभावित लोगों की मदद के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि वहां के लोगों ने कहा कि बीएसएफ ने उनकी हर संभव मदद की और वे उसी की वजह से जीवित हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार से इस मामले में तुरंत कार्रवाई करने की अपील की।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल: राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष कौन हैं?
जवाब: राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर हैं, जिन्होंने इस दौरे का नेतृत्व किया।
सवाल: आयोग की टीम ने किन जगहों का दौरा किया?
जवाब: टीम ने 18 अप्रैल को मालदा के राहत शिविर, 19 अप्रैल को मुर्शिदाबाद के प्रभावित इलाकों का दौरा किया और 20 अप्रैल को कोलकाता में मीडिया से बात की।
सवाल: मुर्शिदाबाद में हिंसा क्यों हुई थी?
जवाब: 11-12 अप्रैल 2025 को वक्फ (संशोधन) कानून के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़की थी, जिसमें तीन लोगों की मौत हुई।
सवाल: पीड़ितों ने क्या मांग की?
जवाब: प्रभावित लोगों ने अपनी सुरक्षा के लिए स्थायी बीएसएफ कैंप लगाने की मांग की।

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