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राहुल गांधी की ‘डेड इकॉनमी’ वाले बयान पर क्या बोले शशि थरूर ? अमेरिका से रिश्तों का हवाला

कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा अमेरिका की अर्थव्यवस्था को “डेड इकॉनमी” कहने पर टिप्पणी करने से परहेज किया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने जो कहा होगा, उसके पीछे निश्चित ही उनके अपने कारण होंगे।

थरूर ने आगे कहा, “मेरी चिंता इस बात को लेकर है कि अमेरिका हमारे लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक साझेदार है। भारत अमेरिका को लगभग 90 अरब डॉलर का निर्यात करता है। ऐसे में दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में कोई भी कमजोरी हमारे लिए नुकसानदायक हो सकती है।”

अमेरिका से नुकसान की आशंका, अन्य निर्यात बाजारों की जरूरत

थरूर ने सुझाव दिया कि भारत को अमेरिका के साथ मजबूत व्यापारिक रिश्ते बनाए रखने के साथ-साथ दूसरे संभावित निर्यात बाजारों की भी तलाश करनी चाहिए, ताकि अगर अमेरिका से नुकसान होता है, तो उसकी भरपाई अन्य देशों से हो सके। उन्होंने कहा, “हमें अपने आर्थिक वार्ताकारों को पूरी ताकत और समर्थन देना चाहिए, ताकि भारत के हित में ठोस समझौते हो सकें।”

उपराष्ट्रपति पद पर बोले थरूर

जब उनसे पूछा गया कि अगला उपराष्ट्रपति कौन हो सकता है, तो शशि थरूर ने स्पष्ट कहा, “संभावना यही है कि सत्ता पक्ष जिसे भी नामित करेगा, वही उपराष्ट्रपति बनेगा, क्योंकि चुनावी समीकरण पहले से ही उनके पक्ष में हैं। हालांकि हमें उम्मीद है कि इस बार विपक्ष से भी परामर्श किया जाएगा, लेकिन इस वक्त कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी।”

मानहानि केस पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को बताया ‘प्रक्रिया की सज़ा’

सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक भाजपा नेता से उनके खिलाफ दर्ज मानहानि मामला वापस लेने की सलाह देने को लेकर थरूर ने कहा कि यह हमारी न्यायिक व्यवस्था की बड़ी खामी को उजागर करता है। उन्होंने कहा, “कई बार बेहद मामूली और राजनीतिक उद्देश्य से दायर मामलों को वर्षों तक चलने दिया जाता है, जिससे आरोपी को खुद मुकदमेबाजी ही सज़ा बन जाती है।”

छह साल पुराना उद्धरण बना केस का आधार

थरूर ने कहा कि उन्होंने 2011 में छपे एक लेख का संदर्भ दिया था जिसमें संघ से जुड़े एक व्यक्ति का बयान था, जो बाद में भाजपा में शामिल हुआ और पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बना। उस उद्धरण को लेकर छह साल बाद उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ। थरूर ने कहा, “कोर्ट की यह टिप्पणी कि इस तरह के केस खत्म किए जाएं, कोई आश्चर्य की बात नहीं है।”

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