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Women health News: क्या आप भी बच्चे के पास फोन रखकर सोती हैं? डॉक्टर ने दी चेतावनी, ब्रेन डैमेज से लेकर कैंसर तक का है खतरा

Women health News: आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है, लेकिन यही फोन आपके नवजात शिशु (infant) के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। कई माता-पिता बच्चे को सुलाने के लिए तकिये के पास फोन पर लोरी बजाकर रख देते हैं या उन्हें चुप कराने के लिए फोन पकड़ा देते हैं। डॉक्टरों ने इस आदत के खिलाफ सख्त चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि फोन से निकलने वाला रेडिएशन और स्क्रीन लाइट शिशुओं के नाजुक दिमाग के विकास को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है, और यहां तक कि यह भविष्य में कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ा सकता है।

शिशुओं पर क्यों होता है फोन रेडिएशन का ज्यादा असर?

डॉक्टरों के अनुसार, वयस्कों की तुलना में शिशुओं का शरीर बहुत अलग होता है। एक बच्चे की खोपड़ी (skull) की हड्डी बहुत पतली होती है और उनका मस्तिष्क तेजी से विकसित हो रहा होता है। मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडियोफ्रीक्वेंसी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (RF-EMF) इस पतली हड्डी को आसानी से पार कर सकती है और मस्तिष्क के ऊतकों (tissues) द्वारा अवशोषित (absorb) हो सकती है। जहां वयस्कों पर इसके प्रभाव पर बहस जारी है, वहीं विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि विकासशील मस्तिष्क इस रेडिएशन के प्रति कहीं अधिक संवेदनशील होता है।

मस्तिष्क के विकास और नींद में डालता है बाधा

फोन को पास रखने का सबसे तात्कालिक खतरा नींद की गड़बड़ी है। फोन की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी (Blue Light) शरीर में ‘मेलाटोनिन’ नामक नींद के हार्मोन के उत्पादन को रोक देती है। यह न केवल बच्चे की नींद के पैटर्न को बिगाड़ता है, बल्कि गहरी नींद में ही बच्चे का मस्तिष्क सबसे तेजी से विकसित होता है। नींद की कमी का सीधा असर उनके सीखने की क्षमता, याददाश्त और स्वभाव पर पड़ता है, जिससे वे चिड़चिड़े हो सकते हैं।

क्या सच में है कैंसर का खतरा?

हालांकि मोबाइल फोन से कैंसर के खतरे पर अभी तक कोई ठोस वैज्ञानिक सहमति नहीं बन पाई है, लेकिन कई डॉक्टरों और शोधों ने इस पर चिंता जताई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी मोबाइल फोन रेडिएशन को ‘संभावित कार्सिनोजेन’ (possibly carcinogenic) की श्रेणी में रखा है। डॉक्टरों की चेतावनी है कि चूंकि बच्चों का शरीर इस रेडिएशन को ज्यादा सोखता है, इसलिए उनमें भविष्य में ब्रेन ट्यूमर जैसी बीमारियों का खतरा वयस्कों की तुलना में अधिक हो सकता है। इसलिए, जब तक हम निश्चित रूप से नहीं जानते, तब तक सावधानी बरतना ही सबसे अच्छा है’।

माता-पिता क्या करें? सुरक्षित दूरी के उपाय

अपने बच्चे को इस खतरे से बचाने के लिए, कुछ आसान नियमों का पालन करना जरूरी है। फोन को कभी भी बच्चे के तकिये के नीचे, सिराहने या स्ट्रॉलर में न रखें। अगर आपको बच्चे के लिए फोन पर लोरी या सफेद शोर (white noise) बजाना ही है, तो फोन को ‘एयरप्लेन मोड’ (Airplane Mode) पर रखें और उसे कमरे के दूसरे कोने में रखें। दो साल से कम उम्र के बच्चों को चुप कराने के लिए खिलौने के तौर पर फोन कभी न दें। यह न केवल उनके दिमाग पर, बल्कि उनकी आंखों और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता पर भी बुरा असर डालता है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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