वाराणसी –केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस मामले में 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी हुई है। CBI ने चार चीनी नागरिकों सहित 17 लोगों और 58 कंपनियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। जांच में पता चला कि ठगी के पीछे 111 फर्जी कंपनियां थीं, जिनके जरिए पैसे को इधर-उधर घुमाया गया। यह ठगी कोविड महामारी के समय से चल रही थी और हजारों आम लोगों को निशाना बनाया गया।
ठगी का तरीका: लोन ऐप, निवेश और नौकरी का झांसा
ठगों ने लोगों को फर्जी लोन ऐप्स, ऑनलाइन निवेश योजनाओं, पॉन्जी स्कीम, पार्ट-टाइम जॉब ऑफर और फेक ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म का लालच दिया। वे गूगल ऐड्स, बल्क एसएमएस, क्लाउड सर्वर और फिनटेक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते थे। लोगों से पैसे लेने के बाद वे उन्हें अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर देते थे।इस नेटवर्क ने सैकड़ों फर्जी बैंक खाते और पेमेंट गेटवे का उपयोग किया। ठगी का हर कदम इतनी सफाई से प्लान किया गया था कि असली मास्टरमाइंड की पहचान छिपी रहे। हजारों लोग इस जाल में फंसकर अपनी मेहनत की कमाई गंवा बैठे।
चीन कनेक्शन: चार चीनी नागरिक मुख्य आरोपी
CBI की जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि इस ठगी के पीछे चीन से कनेक्शन है। चार चीनी नागरिक – जोउ यी, हुआन लियू, वेइजियान लियू और गुआनहुआ वांग – इस नेटवर्क के मुख्य संचालक थे। ये विदेश से ही पूरे ऑपरेशन को कंट्रोल करते थे।सबूत के तौर पर एक UPI ID मिला, जो दो भारतीय आरोपियों के बैंक खातों से जुड़ा था। यह ID अगस्त 2025 तक विदेशी लोकेशन से एक्टिव था। इससे साफ पता चलता है कि विदेश से रियल-टाइम में ठगी पर नजर रखी जा रही थी। ठग भारत में बैठे लोगों का इस्तेमाल करते थे, लेकिन असली निर्देश चीन से आते थे।
111 फर्जी कंपनियां: पैसे छिपाने का जाल
जांच में 111 शेल कंपनियां सामने आईं। ये कंपनियां फर्जी डायरेक्टरों, नकली दस्तावेजों, झूठे पतों और गलत बिजनेस उद्देश्यों के साथ रजिस्टर की गई थीं। इनका इस्तेमाल बैंक खाते और मर्चेंट अकाउंट खोलने के लिए किया जाता था।ठगी के पैसे को ‘म्यूल अकाउंट्स’ (दूसरों के नाम पर खाते) के जरिए लेयरिंग की जाती थी। CBI के मुताबिक, इन खातों से 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा ट्रांसफर हुए। सिर्फ एक खाते में ही थोड़े समय में 152 करोड़ रुपये आए। ये कंपनियां पैसे को जल्दी-जल्दी घुमाने और छिपाने का मुख्य तरीका थीं।
जांच कैसे शुरू हुई और क्या हुआ
यह मामला गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) से मिली शिकायतों पर शुरू हुआ। शुरुआत में अलग-अलग ठगी के केस लग रहे थे, लेकिन जांच में सब एक ही नेटवर्क से जुड़े पाए गए।अक्टूबर में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। फिर कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, झारखंड और हरियाणा में 27 जगहों पर छापे मारे गए। डिजिटल डिवाइस, दस्तावेज और फाइनेंशियल रिकॉर्ड जब्त किए गए। फोरेंसिक जांच से सारे राज खुले। अब चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, जिसमें 17 लोग और 58 कंपनियां आरोपी हैं।
निष्कर्ष: साइबर ठगी से बचाव जरूरी
यह मामला बताता है कि साइबर ठग कितने संगठित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम कर रहे हैं। चीन जैसे विदेशी कनेक्शन से ठगी और खतरनाक हो गई है। आम लोग आसानी से लालच में फंस जाते हैं और लाखों-करोड़ों गंवा बैठते हैं।CBI की यह कार्रवाई सराहनीय है, क्योंकि इससे बड़ा नेटवर्क टूटा है। लेकिन हमें खुद सतर्क रहना होगा। कोई अनजान लिंक पर क्लिक न करें, निवेश या जॉब ऑफर की अच्छे से जांच करें और संदिग्ध कॉल पर पैसे ट्रांसफर न करें। सरकार और पुलिस को ऐसे नेटवर्क पर और सख्ती करनी चाहिए। अंत में, साइबर सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी भी है – जागरूक रहें, सुरक्षित रहें।



