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‘ट्रंप का तीखा वार: सीरिया हमले में अमेरिकियों की मौत पर ISIS को चेताया – अब सब्र का बांध टूटा’

वाराणसी –सीरिया के मध्य हिस्से में पलमायरा शहर के पास एक घातक हमले में तीन अमेरिकी नागरिकों की मौत हो गई। इस हमले में दो अमेरिकी सैनिक और एक सिविलियन अनुवादक मारे गए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना को ISIS का हमला बताया और कड़ी चेतावनी दी कि इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। यह हमला पिछले साल बशर अल-असद की सरकार गिरने के बाद सीरिया में अमेरिकी बलों पर पहला घातक हमला है।

हमला कैसे हुआ?Image result for सीरिया हमले में अमेरिकियों की मौत पर ISIS को चेताया

13 दिसंबर 2025 को सीरिया के ऐतिहासिक शहर पलमायरा के पास यह घटना हुई। अमेरिकी सैनिक और सीरियाई सुरक्षा बल एक संयुक्त गश्त पर थे। वे वहां ISIS के खिलाफ आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन चला रहे थे। अचानक एक अकेले बंदूकधारी ने उन पर हमला कर दिया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह एक घात लगाकर किया गया हमला था।हमले में दो अमेरिकी सैनिक और एक अमेरिकी अनुवादक की मौत हो गई। तीन अन्य अमेरिकी सैनिक घायल हुए, लेकिन उनकी हालत स्थिर है और वे ठीक हो रहे हैं। सीरियाई पक्ष से भी दो सुरक्षा कर्मी घायल हुए। हमलावर को मौके पर ही सीरियाई और अमेरिकी बलों ने मार गिराया।अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हमलावर ISIS से जुड़ा था। हालांकि, सीरियाई आंतरिक मंत्रालय के प्रवक्ता नूरेद्दीन अल-बाबा ने कहा कि जांच चल रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि हमलावर सीधे ISIS का सदस्य था या सिर्फ उसकी कट्टर विचारधारा से प्रभावित था। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि हमलावर सीरियाई सुरक्षा बलों का सदस्य हो सकता था, लेकिन सीरियाई अधिकारियों ने इसे खारिज कर दिया।

ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस हमले पर बहुत गुस्से में हैं। व्हाइट हाउस से बाहर निकलते समय उन्होंने पत्रकारों से कहा, “यह ISIS का हमला था। हम तीन महान अमेरिकी देशभक्तों की मौत पर शोक मना रहे हैं। घायलों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। हम बदला लेंगे।”ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “यह अमेरिका और सीरिया दोनों पर ISIS का हमला था। यह सीरिया का एक बहुत खतरनाक इलाका है, जो पूरी तरह सरकार के नियंत्रण में नहीं है। सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शराह इस हमले से बहुत नाराज और परेशान हैं। इसके बहुत गंभीर परिणाम होंगे।”ट्रंप ने यह भी बताया कि सीरिया के नए राष्ट्रपति अहमद अल-शराह अमेरिकी बलों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। पिछले महीने ही अल-शराह व्हाइट हाउस आए थे और दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर बात हुई थी। ट्रंप ने कहा कि सीरिया भी ISIS से लड़ रहा है और यह हमला दोनों देशों के लिए झटका है।अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “अगर आप अमेरिकियों को निशाना बनाओगे, तो अमेरिका आपको ढूंढेगा, पकड़ेगा और बेरहमी से मार गिराएगा।”

सीरिया में अमेरिकी बलों की मौजूदगी

सीरिया में अमेरिकी सैनिक कई सालों से हैं। उनका मुख्य काम ISIS को खत्म करना है। 2019 में ISIS को क्षेत्रीय रूप से हराया गया था, लेकिन उसके स्लीपर सेल अभी भी सक्रिय हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, सीरिया और इराक में ISIS के 5,000 से 7,000 लड़ाके अभी भी बचे हैं। वे छिपकर हमले करते रहते हैं।पिछले साल दिसंबर में बशर अल-असद की सरकार गिरने के बाद सीरिया में नई अंतरिम सरकार बनी है। अहमद अल-शराह इसके नेता हैं। अमेरिका ने असद पर लगे प्रतिबंध हटाए और नए नेतृत्व के साथ सहयोग बढ़ाया है। अमेरिका के करीब 1,000 सैनिक अभी सीरिया में हैं, जो मुख्य रूप से पूर्वी हिस्से में तैनात हैं। वे स्थानीय बलों को ट्रेनिंग देते हैं और ISIS के ठिकानों पर हमले करते हैं।सीरियाई अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने अमेरिकी बलों को इस इलाके में ISIS के हमले की चेतावनी दी थी, लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया गया।

ISIS की मौजूदा स्थिति

ISIS को 2019 में हरा दिया गया था, लेकिन वह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। उसके लड़ाके छिपे हुए हैं और समय-समय पर हमले करते हैं। हाल के महीनों में अमेरिकी बलों ने सीरिया में ISIS के कई हथियारों के ठिकाने नष्ट किए हैं। नवंबर में ही 15 से ज्यादा जगहों पर हमले किए गए थे।यह हमला दिखाता है कि ISIS अभी भी खतरा बना हुआ है। सीरिया में 14 साल के गृहयुद्ध के बाद देश फिर से बन रहा है, लेकिन सुरक्षा की चुनौतियां बड़ी हैं।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं

सीरियाई सरकार ने इस हमले की निंदा की है। विदेश मंत्री असद अल-शैबानी ने पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। अमेरिकी दूत टॉम बैरेक ने इसे कायरतापूर्ण हमला बताया और कहा कि अमेरिका सीरिया के साथ मिलकर आतंकवाद से लड़ेगा।अमेरिकी कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने भी कहा कि ISIS जैसे आतंकी समूहों को गंभीर खतरे के रूप में देखना चाहिए।

निष्कर्ष :

यह हमला सीरिया में शांति और स्थिरता के लिए एक बड़ा झटका है। नए सीरियाई नेतृत्व और अमेरिका के बीच बढ़ता सहयोग इस घटना से प्रभावित हो सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनी से साफ है कि अमेरिका ISIS के खिलाफ और सख्त कदम उठाएगा। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। अमेरिकी सैनिकों की कुर्बानी याद दिलाती है कि शांति के लिए कितनी कीमत चुकानी पड़ती है। उम्मीद है कि दोनों देश मिलकर ISIS को जड़ से खत्म करेंगे और सीरिया में स्थायी शांति आएगी। इस घटना से दुनिया को फिर से आतंकवाद के खतरे का

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

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