नई दिल्ली- कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने एक ही दिन में 20 साल पुरानी मनरेगा योजना को ध्वस्त कर दिया। यह बयान संसद में ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-G RAM G बिल पास होने के बाद आया है। यह बिल मनरेगा की जगह लेगा और ग्रामीण रोजगार की पुरानी व्यवस्था को बदल देगा। राहुल गांधी ने इसे गांव विरोधी और राज्य विरोधी बताया।
मनरेगा क्या थी और क्यों महत्वपूर्ण थी?
मनरेगा योजना साल 2005 में यूपीए सरकार ने शुरू की थी। इसका पूरा नाम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम है। इस योजना के तहत हर ग्रामीण परिवार को साल में 100 दिन का गारंटी वाला रोजगार मिलता था। अगर कोई व्यक्ति काम मांगता था, तो उसे काम देना जरूरी था। मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी और सामग्री की लागत का 75 प्रतिशत भी।यह योजना गांवों में खुद विकास के काम चुनने की आजादी देती थी। कोविड महामारी के समय यह करोड़ों गरीबों के लिए सुरक्षा कवच बनी। जब शहरों से लोग गांव लौटे, तो मनरेगा ने उन्हें भुखमरी और कर्ज से बचाया। महिलाओं को भी इससे बहुत फायदा हुआ, क्योंकि आधे से ज्यादा काम महिलाएं करती थीं। राहुल गांधी कहते हैं कि यह योजना महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने को साकार करती थी।
नया बिल क्या बदलाव ला रहा है? 18 दिसंबर 2025 को संसद ने VB-G RAM G बिल पास कर दिया। यह मनरेगा को पूरी तरह खत्म कर देगा। नए बिल में कुछ मुख्य बदलाव हैं:
. रोजगार के दिन 100 से बढ़ाकर 125 कर दिए गए हैं, जो अच्छा लगता है।
. लेकिन अब योजना मांग पर आधारित नहीं रहेगी। केंद्र सरकार बजट और नियम खुद तय करेगी।
. खर्च का हिस्सा बदल गया है। पहले मजदूरी का पूरा पैसा केंद्र देता था, अब केंद्र 60 प्रतिशत और राज्य 40 प्रतिशत देंगे।
. फसल के मौसम में काम पर रोक लग सकती है।
. योजना अब दिल्ली से नियंत्रित होगी, गांवों और राज्यों की आजादी कम हो जाएगी।
राहुल गांधी कहते हैं कि यह बिल ग्रामीण मजदूरों की ताकत छीन लेगा। पहले मजदूर काम मांगकर अपनी मजदूरी बढ़वा सकते थे, अब ऐसा नहीं होगा।
राहुल गांधी का तीखा हमला
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “कल रात मोदी सरकार ने एक ही दिन में मनरेगा के 20 सालों को ध्वस्त कर दिया। VB-G RAM G बिल मनरेगा का सुधार नहीं, बल्कि उसकी बुनियाद खत्म करने वाला है। यह राज्य विरोधी और गांव विरोधी है।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को दो चीजों से नफरत है – महात्मा गांधी के विचारों से और गरीबों के अधिकारों से। यह बिल दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों की ताकत कमजोर करेगा। राहुल ने ऐलान किया कि कांग्रेस सड़क से संसद तक इसका विरोध करेगी। विपक्षी दल भी एकजुट होकर प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने बिल को बिना चर्चा के जल्दी पास करवाया। स्थायी समिति को नहीं भेजा गया। प्रियंका गांधी ने भी कहा कि यह योजना अब खत्म हो जाएगी, जो गरीबों के लिए नुकसानदायक है।
सरकार का पक्ष क्या है?
सरकार कहती है कि नया बिल मनरेगा में सुधार है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और गांवों का विकास बेहतर होगा। रोजगार के दिन बढ़ाए गए हैं और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जोड़ा गया है। लेकिन विपक्ष इसे प्रचार योजना बता रहा है, जिसमें गरीबों के अधिकार कम हो रहे हैं।
ग्रामीण भारत पर क्या असर पड़ेगा?
मनरेगा से लाखों ग्रामीण परिवारों को सालाना आय मिलती थी। नए बदलाव से राज्यों पर बोझ बढ़ेगा, खासकर गरीब राज्यों पर। अगर बजट खत्म हो गया, तो काम रुक जाएगा। मजदूरों की मोलभाव की ताकत कम होगी, जिससे शोषण बढ़ सकता है। कोविड जैसे संकट में फिर गरीब असहाय हो जाएंगे। विपक्ष का डर है कि यह बिल केंद्र की ताकत बढ़ाएगा और गांवों की स्वायत्तता खत्म करेगा।
निष्कर्ष :
मनरेगा ग्रामीण भारत की रीढ़ थी, जो गरीबों को अधिकार देती थी। अब VB-G RAM G बिल से यह व्यवस्था बदल रही है। राहुल गांधी का हमला बताता है कि यह राजनीतिक लड़ाई है – एक तरफ गरीबों के अधिकार, दूसरी तरफ केंद्र की नियंत्रण वाली योजना। अगर यह बिल लागू हुआ, तो ग्रामीण मजदूरों की जिंदगी पर गहरा असर पड़ेगा। विपक्ष का विरोध जारी रहेगा, लेकिन सरकार इसे सुधार बता रही है। अंत में, असली परीक्षा जमीन पर होगी – क्या नए बिल से गरीबों को ज्यादा फायदा मिलेगा या उनके अधिकार छिन जाएंगे? यह समय बताएगा।



