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टैक्स रिफंड में देरी हो रही? 5 आम ITR गलतियां और इनसे बचने के आसान तरीके

Tax Refund Delayed: टैक्स रिफंड का इंतजार कई लोगों के लिए सिरदर्द बन जाता है। आयकर विभाग की वेबसाइट पर रिफंड स्टेटस चेक करने पर ‘प्रोसेसिंग पेंडिंग’ दिखना आम बात है। लेकिन असल वजह ITR फाइलिंग में की गई छोटी-छोटी गलतियां होती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, 70% रिफंड देरी ITR वेरिफिकेशन या TDS मिसमैच जैसी त्रुटियों से होती है। छोटे शहरों और गांवों के टैक्सपेयर जो पहली बार ITR भरते हैं, वे अक्सर इन गलतियों का शिकार बनते हैं। अच्छी बात यह है कि इनमें से ज्यादातर गलतियां सुधार ली जा सकती हैं। यहां 5 सबसे आम ITR गलतियां और उनके सुधार के आसान तरीके बताए जा रहे हैं। इनसे बचकर आपका रिफंड जल्दी मिल सकता है।

ITR को समय पर वेरिफाई न करना: सबसे बड़ी गलती

ITR भरने के 30 दिनों के अंदर ई-वेरिफिकेशन न करने से रिटर्न अमान्य हो जाता है। इससे प्रोसेसिंग रुक जाती है और रिफंड देरी से आता है। अगर दिसंबर 31, 2025 तक वेरिफाई न करें तो ब्याज भी देना पड़ सकता है। सुधार का तरीका: तुरंत ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें, Aadhaar OTP, ईमेल या ई-वेरिफिकेशन कोड से वेरिफाई करें। अगर समय निकल गया तो रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करें। भविष्य में टिप: ITR भरते ही वेरिफाई करें, अलर्ट सेट करें।

बैंक अकाउंट अपडेट न होना: रिफंड का रास्ता बंद

रिफंड PAN से लिंक वाले वैलिड अकाउंट में ही जाता है। अगर अकाउंट बंद हो गया हो या बैंक मर्जर के बाद IFSC कोड अपडेट न किया हो तो रिफंड ‘अनडिलीवर्ड’ लौट आता है। सुधार: ई-फाइलिंग प्रोफाइल में बैंक डिटेल्स चेक करें, अपडेट करें और वैलिडेशन करें। अगर रिफंड लौटा हो तो ‘रिफंड री-इश्यू’ रिक्वेस्ट करें। टिप: हर साल ITR से पहले बैंक डिटेल्स चेक करें, PAN से लिंकिंग सुनिश्चित करें।

डिफेक्टिव रिटर्न नोटिस को नजरअंदाज करना: ITR रद्द का खतरा

सेक्शन 139(9) के तहत नोटिस आने पर गलतियां (जैसे इनकम मिसमैच) सुधार न करने से ITR अमान्य हो जाता है। सुधार: नोटिस मिलते ही ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें, डिफेक्ट्स सुधारें या स्पष्टीकरण दें। देरी होने पर भी रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करें। टिप: AIS (एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट) चेक करें, नोटिस को 15 दिनों में जवाब दें।

TDS डिटेल्स में मिसमैच: रिफंड रुक जाता है

फॉर्म 26AS या AIS में TDS जमा न होने या गलत स्टेटमेंट से रिफंड रुक जाता है। सुधार: AIS चेक करें, डिडक्टर को गलती सुधारने को कहें। फिर रेक्टिफिकेशन रिक्वेस्ट फाइल करें। टिप: ITR भरने से पहले 26AS डाउनलोड करें, सभी TDS मैच करें।

संदिग्ध क्लेम्स: विभाग की जांच का कारण

छूट या डिडक्शन (जैसे 80C) के दावे अगर बिना डॉक्यूमेंट्स के हों तो सिस्टम फ्लैग कर देता है। सुधार: डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें या रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करें। टिप: क्लेम्स के लिए रसीदें रखें, AIS से मैच करें।

रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने का तरीका: ई-फाइलिंग पर लॉगिन, ‘रिवाइज्ड/बिलेटेड ITR’ चुनें, मूल ITR चुनकर सुधारें। समय सीमा मूल ITR से 2 साल। इन गलतियों से बचें तो रिफंड 10-15 दिनों में आ जाएगा। टैक्स सलाहकार से मदद लें।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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