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West Bengal News: कोलकाता में डेंगू का कहर, 7 दिन में 10 मौतें, 800 मरीज अस्पताल में भर्ती

31 अगस्त 2026
West Bengal News
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West Bengal News: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में डेंगू का प्रकोप अब खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। महज सात दिनों के भीतर डेंगू से 10 मरीजों की जान जा चुकी है, जबकि 800 से ज्यादा लोग अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें से पांच मरीजों की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस रफ्तार से हर साल डेंगू के मामलों में कमी आती रही है, इस बार वह गिरावट लगभग आधी रह गई है। आखिर कोलकाता में मच्छरों को रोकने की मुहिम कहां चूक गई, यह सवाल अब हर किसी के जेहन में है।

शहर के स्वास्थ्य महकमे से लेकर नगर निगम तक इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। मामला कुछ इस तरह से बिगड़ा है कि खुद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री को भी सार्वजनिक रूप से चिंता जतानी पड़ी है।

West Bengal News: जनवरी से अगस्त तक के आंकड़ों में क्या दिखा बदलाव

कोलकाता में डेंगू के आंकड़ों पर गौर करें तो जनवरी से 23 अगस्त के बीच इस साल 327 मामले दर्ज किए गए हैं। पिछले साल यानी 2025 में इसी अवधि में 387 मामले सामने आए थे। सुनने में यह गिरावट अच्छी लगती है, लेकिन विशेषज्ञ इसे राहत की खबर नहीं मान रहे। दरअसल आमतौर पर हर साल मामलों में 30 से 40 प्रतिशत तक की कमी दर्ज होती रही है, जबकि इस बार यह गिरावट सिर्फ 15 फीसदी पर सिमट गई है। यही आंकड़ा असली चिंता की वजह बन गया है।

धीमी गिरावट का क्या है मतलब

विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू के मामलों में इतनी धीमी गिरावट सीधे तौर पर यह इशारा करती है कि जमीनी स्तर पर मच्छरों को पनपने से रोकने के जरूरी उपायों में कहीं न कहीं ढिलाई बरती गई। जानकार बताते हैं कि फॉगिंग, जल-जमाव की सफाई और नियमित निगरानी जैसे कदम अगर समय पर और सख्ती से उठाए जाते, तो हालात इतने नहीं बिगड़ते। अब यही सुस्ती शहर के लोगों पर भारी पड़ रही है।

डेथ रिव्यू कमेटी की रिपोर्ट में सामने आया सच

इस साल हुई 10 मौतों की जांच के लिए बनाई गई डेथ रिव्यू कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ किया है कि इनमें से 7 मौतों की सीधी वजह डेंगू ही रही। बाकी 3 मरीजों में डेंगू पॉजिटिव पाया गया था, लेकिन उनकी मौत की असली वजह अन्य गंभीर बीमारियां बताई गई हैं। पिछले वर्षों के आंकड़ों से तुलना करें तो 2025 में डेंगू से 19 और 2024 में 31 मौतें हुई थीं। इस लिहाज से देखा जाए तो मौत के आंकड़े में कमी जरूर आई है, लेकिन सिर्फ सात दिनों में 10 मौतें होना अपने आप में एक गंभीर संकेत है।

सौंदर्यीकरण या मच्छरों का अड्डा, मंत्री ने उठाया तीखा सवाल

इस पूरे मामले में एक दिलचस्प और थोड़ा चौंकाने वाला पहलू भी सामने आया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखर्जी ने शहर में सौंदर्यीकरण के नाम पर बनाए जा रहे ‘कमल-पूल’ यानी कमल के तालाबों पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया। उनका कहना था कि इन तालाबों में न तो कभी कमल खिलते देखे गए, न ही किसी मछली को तैरते हुए। मंत्री के मुताबिक ये तालाब बना तो दिए जाते हैं, लेकिन बाद में इनकी देखभाल नहीं होती, और यही अनदेखी इन्हें मच्छरों के पनपने की जगह बना देती है। यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि यह सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही की तरफ इशारा करता है, जिसे अब तक ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया गया था।

केएमसी का दावा, स्थिति अभी काबू में

दूसरी तरफ कोलकाता नगर निगम यानी केएमसी के मुख्य कीट-विज्ञानी देवाशीष विश्वास का कहना है कि हालात अभी पूरी तरह बेकाबू नहीं हुए हैं। हालांकि उन्होंने भी माना कि नागरिकों को सतर्क रहने और घरों के आसपास पानी जमा न होने देने की सख्त जरूरत है। देखने पर लगता है कि प्रशासन और आम लोगों, दोनों की तरफ से थोड़ी सी भी लापरवाही इस मौसम में भारी पड़ सकती है।

केंद्र सरकार के आंकड़ों में बंगाल का जिक्र तक नहीं

इस पूरी रिपोर्ट का सबसे अप्रत्याशित हिस्सा वह है, जो केंद्र सरकार के आंकड़ों से जुड़ा है। पश्चिम बंगाल में डेंगू से अब तक 10 लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन नेशनल सेंटर फॉर वेक्टर बोर्न डिजीजेज कंट्रोल की वेबसाइट पर मौजूद आधिकारिक रिकॉर्ड में बंगाल का जिक्र तक नहीं है। इस वेबसाइट के मुताबिक 2026 में अब तक पूरे देश में डेंगू से सिर्फ 10 मौतें दर्ज हुई हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 9 मौतें अकेले केरल में हुई हैं, जबकि त्रिपुरा में एक व्यक्ति की जान गई है। पश्चिम बंगाल के 2025 और 2026 के आंकड़े इस केंद्रीय रिकॉर्ड में उपलब्ध ही नहीं हैं। यह विसंगति खुद में एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि आखिर राज्य और केंद्र के आंकड़ों में इतना फासला क्यों है।

West Bengal News: पूरे देश में कहां कितना है डेंगू का असर

देशभर की तस्वीर देखें तो सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को मिलाकर कुल 6,927 लोग डेंगू से पीड़ित हैं। इनमें सबसे ज्यादा 2,873 मरीज तमिलनाडु में दर्ज किए गए हैं, जो देश में सबसे आगे है। वहीं नगालैंड, उत्तराखंड और चंडीगढ़ ऐसे इलाके हैं, जहां इस साल अब तक डेंगू का एक भी मामला सामने नहीं आया है। इसी बीच 30 अगस्त को जारी हुए स्वास्थ्य-जोखिम सूचकांक में कोलकाता के लिए डेंगू का रिस्क स्कोर 39 अंक यानी मध्यम श्रेणी में रखा गया है। मगर इसी सूचकांक में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि कोलकाता में डेंगू से भी ज्यादा खतरा अब मलेरिया फैलने का है।

आम लोगों के लिहाज से देखा जाए तो यह पूरी स्थिति सीधे तौर पर हर घर से जुड़ी हुई है। घर के आसपास पानी जमा न होने देना, कूलर और गमलों की नियमित सफाई करना और बुखार आते ही तुरंत जांच कराना, ये तीन आदतें ही फिलहाल सबसे बड़ा बचाव मानी जा रही हैं। कोलकाता में डेंगू के बढ़ते आंकड़े और मलेरिया के बढ़ते खतरे ने प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिकों की जिम्मेदारी भी बढ़ा दी है। अब देखना यह होगा कि आने वाले हफ्तों में स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम मिलकर इस स्थिति पर कितनी जल्दी काबू पाते हैं, क्योंकि बारिश का मौसम अभी पूरी तरह गुजरा नहीं है और खतरा अभी टला नहीं है।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

Sanjana Gupta Hindi Content Writer | New Media Kiran Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

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कवरेज: Sanjna Gupta, News Media Kiran

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