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NGT Mobile App: पीएम मोदी ने लॉन्च किया NGT मोबाइल ऐप, केस स्टेटस और आदेश फोन पर मिलेंगे

NGT Mobile App: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में एनजीटी मोबाइल ऐप लॉन्च किया। मौका था अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स का। सम्मेलन 19 और 20 सितंबर को राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी एनजीटी आयोजित कर रहा है।

ऐप पर्यावरण से जुड़े मामलों की जानकारी मोबाइल पर देने के लिए बनाया गया है। उपयोगकर्ता केस स्टेटस, कॉज लिस्ट तथा आदेश और फैसले देख सकेंगे। बार बार वेबसाइट खोलने की जरूरत घटाने का उद्देश्य बताया गया है। विकास कार्य राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र यानी एनआईसी ने किया है।

सम्मेलन में भारत समेत 17 देशों के न्यायिक प्रतिनिधि और विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। विषय पर्यावरण और जलवायु से जुड़े हैं। ऐप लॉन्च उसी मंच पर हुआ।

एनजीटी मोबाइल ऐप से क्या देखा जा सकेगा?

प्लेटफॉर्म एनजीटी से जुड़े मामलों की डिजिटल पहुंच है। केस की मौजूदा स्थिति पता चलेगी। कॉज लिस्ट से यह देखा जा सकेगा कि मामला कब सूचीबद्ध है। आदेश और जजमेंट मोबाइल स्क्रीन पर उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

एनजीटी पर्यावरण विवादों की सुनवाई करता है। प्रदूषण, वन, निर्माण और जलवायु से जुड़े कई मामले यहां चलते हैं। अब तक अधिकतर जानकारी वेबसाइट पर निर्भर थी। ऐप उसी जानकारी को फोन तक लाने का माध्यम है।

स्रोत में डाउनलोड लिंक, ऑपरेटिंग सिस्टम या लॉगिन प्रक्रिया नहीं दी गई। उपलब्ध तथ्य यही हैं कि स्टेटस, सूची और आदेश ऐप से देखे जा सकेंगे।

यह सम्मेलन क्यों चल रहा है?

आयोजन एनजीटी का है। दो दिन का सम्मेलन पर्यावरण और जलवायु की गतिशीलता पर केंद्रित है। 17 देशों के न्यायिक प्रतिनिधि और विशेषज्ञ जुटे हैं। विज्ञान भवन स्थल है।

ऐप लॉन्च को डिजिटल माध्यम से न्यायिक जानकारी सुलभ बनाने का प्रयास कहा गया। पर्यावरण न्याय व्यवस्था में मोबाइल कनेक्ट बढ़ाने का उद्देश्य बताया गया। यह दावा सुविधा का है, केस निपटारे की गति का आंकड़ा नहीं।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐप दिखाना संस्था की डिजिटल दिशा का संकेत है। देशों के नाम स्रोत में अलग से नहीं गिनाए गए। केवल 17 देशों की भागीदारी दर्ज है।

आम आदमी के लिए ऐप क्यों मायने रखता है?

जिस नागरिक या संस्था का मामला एनजीटी में है उसे स्टेटस जानने के लिए कंप्यूटर की प्रतीक्षा कम पड़ सकती है। कॉज लिस्ट मोबाइल पर होने से तारीख याद रखना आसान हो सकता है। आदेश पढ़ने के लिए पीडीएफ की खोज वेबसाइट पर सीमित हो सकती है।

यह सुविधा सूचना पहुंचाने तक है। सुनवाई खुद ऐप से नहीं होगी, ऐसा स्रोत नहीं कहता। एनजीटी की भूमिका पर्यावरण मामलों के निपटारे की संस्था के रूप में पहले जैसी रहेगी। ऐप जानकारी का द्वार है।

एनआईसी सरकारी डिजिटल परियोजनाएं बनाता रहा है। इसी इकाई ने यह ऐप विकसित किया। सुरक्षा और अपडेट का विवरण लॉन्च समाचार में नहीं आया।

लॉन्च के बाद आगे क्या देखना होगा?

ऐप उपलब्ध होने के बाद उपयोग कितना सरल है, यह अनुभव पर निर्भर करेगा। केस संख्या से खोज, भाषा विकल्प या नोटिफिकेशन जैसी बातें इस सामग्री में नहीं हैं। इसलिए अतिरिक्त फीचर का दावा नहीं किया जा सकता।

सम्मेलन 20 सितंबर तक चलेगा। पर्यावरण और जलवायु पर न्यायिक संवाद उसी मंच का हिस्सा है। ऐप उसी आयोजन की डिजिटल घोषणा बना।

पीएम मोदी द्वारा विज्ञान भवन में एनजीटी मोबाइल ऐप लॉन्च करना शनिवार की मुख्य सूचना है। केस स्टेटस, कॉज लिस्ट और आदेश फोन पर देखने की सुविधा बताई गई है। एनआईसी डेवलपर है। 17 देशों के प्रतिनिधियों वाले सम्मेलन में यह कदम रखा गया। वेबसाइट पर निर्भरता घटाना घोषित मकसद है। बाकी उपयोगकर्ता अनुभव ऐप खुलने के बाद साफ होगा।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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