New Delhi: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग (ECI) के उस अंतरिम आदेश को चुनौती दी है, जिसमें आयोग ने ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसके आरक्षित चुनाव चिह्न को फिलहाल फ्रीज कर दिया है। दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को आगामी उपचुनाव के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए गए हैं।
ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की याचिका
ममता बनर्जी की ओर से 18 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। रिपोर्टों के मुताबिक, याचिका में भारत निर्वाचन आयोग, उसके सचिव और रीतब्रत बनर्जी को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में आयोग के अंतरिम फैसले को चुनौती दी गई है।
मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अगले सप्ताह होने की संभावना बताई जा रही है। हालांकि, सुनवाई की अंतिम तारीख अदालत की सूची के अनुसार तय होगी।
ECI ने TMC के नाम और चिह्न को किया फ्रीज
चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम व्यवस्था के तहत ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी। आयोग ने दोनों गुटों को नए नाम और मुक्त चुनाव चिह्न के विकल्प देने को कहा था। यह व्यवस्था आगामी पश्चिम बंगाल उपचुनावों के संदर्भ में की गई है।
इसके बाद आयोग ने दोनों गुटों के लिए अस्थायी नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए।

ममता गुट को मिला ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चिह्न
चुनाव आयोग की अंतरिम व्यवस्था के तहत ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया गया है और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।
वहीं, दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न दिया गया है। ये नाम और चिह्न फिलहाल आगामी उपचुनावों के लिए लागू किए गए हैं और मूल पार्टी नाम व चिह्न पर अंतिम अधिकार का फैसला नहीं माने जा रहे हैं।
6 अक्टूबर के उपचुनाव से पहले बढ़ा विवाद
चुनाव आयोग की यह अंतरिम व्यवस्था पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले सामने आई है। आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चिह्न दिए हैं ताकि उपचुनाव की प्रक्रिया में दोनों पक्षों की पहचान स्पष्ट रहे।
अब सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी की याचिका पर होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि आयोग के अंतरिम आदेश के खिलाफ दायर चुनौती पर अदालत क्या निर्देश देती है।

