नई दिल्ली: दिल्ली में हालिया विरोध प्रदर्शनों और प्रशासन की ओर से लगाई गई पाबंदियों को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा है कि कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला उनके अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है। उन्होंने यह टिप्पणी 12 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की 33वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में की।
सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे हर भारतीय नागरिक और निर्वाचित जनप्रतिनिधि के लिए खुले हैं। यदि किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल को कोई शिकायत है, तो वह निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत याचिका दाखिल कर अदालत का रुख कर सकता है।
दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों और उन पर लगाई गई पाबंदियों के संबंध में सवाल पूछे जाने पर CJI ने स्पष्ट किया कि यह कानून-व्यवस्था से जुड़ा विषय है और इस पर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन
दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों और विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं।
विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची की समीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं। इन आरोपों के बीच प्रदर्शनकारियों ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है। हालांकि, ये आरोप हैं और इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
विपक्षी नेताओं से मुलाकात पर क्या कहा?
INDIA गठबंधन के नेताओं की ओर से मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात करने के अनुरोध के बारे में भी सवाल पूछा गया। CJI सूर्यकांत ने बताया कि उन्हें बैठक के अनुरोध से संबंधित पत्र मिला था और उन्होंने उसका जवाब दे दिया था।
उन्होंने विपक्षी नेताओं से मुलाकात करने में असमर्थता जताई और कहा कि यदि उन्हें चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतें हैं, तो उन्हें याचिका दाखिल करके अदालत का रुख करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित मुद्दे पहले से न्यायिक विचाराधीन होने पर उन्हें उचित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से उठाया जाना चाहिए।
याचिका दाखिल कर उठा सकते हैं अपनी बात
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कोई भी आम नागरिक या निर्वाचित प्रतिनिधि सुप्रीम कोर्ट में अपनी शिकायत रख सकता है। अदालत संबंधित मामले पर कानून के अनुसार विचार करेगी और पात्र पक्ष को उचित राहत देने पर निर्णय लेगी।
उनकी टिप्पणी का मुख्य संदेश यह रहा कि न्यायपालिका तक पहुंच सभी नागरिकों के लिए उपलब्ध है, लेकिन शिकायतों पर सुनवाई निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगी।
दिल्ली में पाबंदियों को लेकर चर्चा तेज
दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने, आवाजाही पर प्रतिबंध और मेट्रो सेवाओं से संबंधित कदमों को लेकर भी चर्चा हुई है। प्रशासन की ओर से ऐसे कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के संदर्भ में उठाए गए, जबकि इन प्रतिबंधों की आवश्यकता और उनके प्रभाव पर सवाल भी सामने आए हैं।
CJI सूर्यकांत ने अपने बयान में दिल्ली में लगाए गए प्रतिबंधों की वैधता पर विस्तृत टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए शिकायतों के लिए न्यायिक प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया।
निष्कर्ष: दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विवादों के बीच CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट में शिकायत दर्ज कराने का रास्ता सभी नागरिकों के लिए खुला है। हालांकि, किसी भी शिकायत पर विचार निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और अदालत के अधिकार क्षेत्र के अनुसार ही किया जाएगा
