Tamil Nadu Election 2026: तमिलनाडु में 23 अप्रैल 2026 को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान अपने चरम पर है। हर पार्टी का हर नेता जी-जान से मैदान में उतरा हुआ है। लेकिन इसी गर्माहट के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सियासी माहौल को और दिलचस्प बना दिया है। तमिलगा वेट्री कड़गम यानी TVK के नेता और फिल्म अभिनेता से नेता बने विजय ने अपनी कई निर्धारित रैलियां और कार्यक्रम अचानक रद्द कर दिए हैं।
15 मार्च को चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के बाद से विजय ने कई ऐसे कार्यक्रम रद्द किए हैं जहां उन्हें सीधे मतदाताओं से जुड़ना था। चुनाव आयोग से अनुमति मिलने के बावजूद यह कार्यक्रम क्यों नहीं हुए, इसका पार्टी ने कोई साफ और आधिकारिक कारण नहीं बताया है। इसी वजह से विरोधी दलों को मौका मिल गया और सत्ताधारी DMK समेत कई दलों ने विजय पर तीखे तंज कसे हैं।
कौन-कौन से कार्यक्रम हुए रद्द और क्या बताई वजह?
विजय इस चुनाव में दो सीटों से किस्मत आजमा रहे हैं। उन्होंने 30 मार्च को अपना नामांकन दाखिल किया था। इसके बाद उन्होंने पेरम्बूर में प्रचार किया जहां से वो चुनाव लड़ रहे हैं और फिर कोलाथुर में भी प्रचार किया।
लेकिन इसके बाद रद्दीकरण का सिलसिला शुरू हो गया। विल्लीवाक्कम में एक बड़ा कार्यक्रम रखा गया था जिसे रद्द कर दिया गया। TVK ने इसके पीछे पुलिस की तरफ से सुरक्षा में चूक का हवाला दिया। इसके बाद 6 अप्रैल को टी नगर और विल्लीवाक्कम में होने वाले रोड शो भी रद्द हो गए। इस बार पार्टी ने समय की कमी को वजह बताया।
8 अप्रैल को विजय ने तिरुनेलवेली और थूथुकुडी में रोड शो किया लेकिन 9 अप्रैल को कुड्डालोर का कार्यक्रम फिर से रद्द हो गया। इसके बाद 11 अप्रैल को कुड्डालोर और 13 अप्रैल को तिरुवल्लूर में होने वाली बैठकें भी नहीं हो सकीं। यानी एक के बाद एक कई कार्यक्रम रद्द होते चले गए और पार्टी की तरफ से हर बार अलग-अलग सफाई दी गई जो राजनीतिक जानकारों को पूरी तरह संतोषजनक नहीं लगी।
DMK का ‘WFH’ वाला तंज जो बन गया चुनावी चर्चा का केंद्र

विजय की रैलियां रद्द होने की खबरें जब सामने आईं तो सत्ताधारी DMK ने इसे एक मौके की तरह इस्तेमाल किया। DMK ने तंज कसते हुए कहा कि विजय घर बैठकर ही अपना चुनाव प्रचार कर रहे हैं यानी वो ‘वर्क फ्रॉम होम’ कर रहे हैं। यह तंज सोशल मीडिया पर तुरंत वायरल हो गया और राजनीतिक हलकों में खूब चर्चा का विषय बन गया।
DMK का यह WFH वाला तंज सिर्फ एक मजाक नहीं था बल्कि इसके पीछे एक राजनीतिक संदेश भी था। DMK यह बताना चाहती थी कि जो नेता जनता से मिलने, उनके बीच जाने और उनसे सीधे बात करने से कतरा रहा हो वो एक नए राज्य का नेतृत्व कैसे करेगा।
राज्य के उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कुछ नेता जमीन पर उतरकर दिन-रात मेहनत करते हैं और लोगों से सीधे जुड़ते हैं जबकि कुछ नेता रुक-रुककर थोड़ा प्रचार करते हैं और फिर गायब हो जाते हैं। उनका इशारा साफ था।
बाकी दल मैदान में, विजय पर दबाव बढ़ा
तमिलनाडु के इस चुनावी मैदान में कई बड़े नेता पूरी ताकत से प्रचार में जुटे हैं। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पूरे राज्य में दौरे कर रहे हैं। AIADMK के महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी लगातार रैलियां कर रहे हैं। NTK के प्रमुख सीमान भी जमकर प्रचार में लगे हैं। इन दिग्गज नेताओं की तुलना में जब विजय की रैलियां रद्द हो रही हैं तो स्वाभाविक रूप से TVK पर दबाव बढ़ रहा है।
चुनाव प्रचार की आखिरी तारीख नजदीक आ रही है और विजय को अभी भी राज्य के कई जिलों का दौरा करना बाकी है। अगर वो इन इलाकों में नहीं पहुंच पाए तो उनकी पार्टी के उम्मीदवारों को नुकसान हो सकता है क्योंकि विजय का नाम और उनका चेहरा ही TVK की सबसे बड़ी ताकत है।
विजय की राजनीतिक यात्रा और TVK की चुनौतियां
विजय तमिल सिनेमा के बेहद लोकप्रिय अभिनेता रहे हैं। उनके प्रशंसकों की संख्या करोड़ों में है और उन्होंने इसी लोकप्रियता को आधार बनाकर TVK की स्थापना की। पार्टी को खड़ा करना और उसे चुनावी मैदान में उतारना एक बड़ा कदम था लेकिन अब असली परीक्षा जनता के बीच जाने और उनसे सीधे जुड़ने की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की लोकप्रियता बड़ी है लेकिन राजनीति में सिर्फ लोकप्रियता काफी नहीं होती। जमीनी काम, पार्टी संगठन और मतदाताओं से सीधा जुड़ाव भी उतना ही जरूरी है। जब रैलियां रद्द होती हैं तो यह संदेश जाता है कि या तो पार्टी का संगठन कमजोर है या फिर नेता खुद तैयार नहीं हैं।
TVK के लिए यह पहला विधानसभा चुनाव है और पार्टी इसे अपनी पहचान बनाने का मौका मान रही है। लेकिन रैलियों के रद्द होने से पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह भी प्रभावित हो सकता है।
23 अप्रैल का चुनाव तय करेगा विजय का राजनीतिक भविष्य
23 अप्रैल को होने वाले मतदान में तमिलनाडु की जनता यह फैसला करेगी कि विजय की राजनीतिक पारी आगे बढ़ेगी या नहीं। विजय दो सीटों पेरम्बूर और तिरुचिरापल्ली पूर्व से चुनाव लड़ रहे हैं। अगर वो खुद जीत गए लेकिन पार्टी कमजोर प्रदर्शन करे तो यह उनके लिए आगे की राजनीति की राह मुश्किल कर सकता है।
दूसरी तरफ अगर TVK अच्छा प्रदर्शन करती है तो विजय तमिल राजनीति में एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर सकते हैं। लेकिन इसके लिए उन्हें अभी भी बचे हुए दिनों में जोरदार प्रचार करना होगा और मतदाताओं तक सीधे पहुंचना होगा। रद्द होती रैलियां और DMK का WFH वाला तंज उनके लिए एक चेतावनी की तरह है।
अब देखना यह है कि विजय बाकी बचे प्रचार के दिनों में कितनी तेजी से मैदान में उतरते हैं और क्या वो अपनी पार्टी के लिए पर्याप्त जोश जगा पाते हैं। 23 अप्रैल का मतदान और उसके बाद आने वाले नतीजे ही इस सवाल का जवाब देंगे।
Read More Here:-



