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एग फ्रीजिंग का बढ़ता चलन: करियर और फैमिली प्लानिंग के बीच संतुलन, जानें इसकी पूरी प्रक्रिया और होने वाला दर्द

Health News: आधुनिक जीवनशैली और बदलती प्राथमिकताओं के बीच महिलाओं के जीवन में कई बड़े बदलाव आए हैं। आज की महिलाएं पढ़ाई, करियर और आर्थिक आत्मनिर्भरता को पहले स्थान पर रख रही हैं। इस होड़ में अक्सर शादी और मां बनने का फैसला टल जाता है। हालांकि, प्रकृति और शरीर की अपनी एक जैविक घड़ी (Biological Clock) होती है, जो उम्र के साथ प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है। इसी चुनौती का समाधान लेकर आई है ‘एग फ्रीजिंग’ तकनीक। पिछले कुछ वर्षों में भारत के मेट्रो शहरों में एग फ्रीजिंग का क्रेज काफी तेजी से बढ़ा है। बॉलीवुड सेलेब्रिटीज से लेकर कॉर्पोरेट जगत की महिलाओं तक, अब हर कोई अपनी फर्टिलिटी को सुरक्षित रखने के लिए इस विकल्प को चुन रहा है। लेकिन क्या यह प्रक्रिया वाकई दर्दनाक है? क्या इसके कोई साइड इफेक्ट्स हैं? आइए विस्तार से जानते हैं एग फ्रीजिंग की पूरी कहानी।

Health News: क्या है एग फ्रीजिंग और क्यों है यह चर्चा में?

एग फ्रीजिंग को चिकित्सा जगत में ‘ओओसाइट क्रायोप्रिजर्वेशन’ (Oocyte Cryopreservation) के नाम से जाना जाता है। सरल शब्दों में कहें तो यह एक ऐसी मेडिकल तकनीक है जिसमें एक महिला के अंडों को उसके शरीर से निकालकर बहुत ही कम तापमान पर सुरक्षित रख दिया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य अंडों की मौजूदा गुणवत्ता को समय के साथ खराब होने से बचाना है। जब महिला भविष्य में मां बनने के लिए मानसिक और आर्थिक रूप से तैयार होती है, तब इन्हीं सुरक्षित रखे गए अंडों का उपयोग गर्भधारण के लिए किया जा सकता है। यह तकनीक उन महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो अपनी उम्र के 30वें या 40वें साल में मां बनना चाहती हैं, लेकिन उस समय अंडों की गुणवत्ता कम होने के जोखिम से बचना चाहती हैं।

कैसे काम करती है एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया?

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एग फ्रीजिंग की यात्रा एक फर्टिलिटी एक्सपर्ट या डॉक्टर के साथ परामर्श से शुरू होती है। इस प्रक्रिया को मुख्य रूप से तीन चरणों में समझा जा सकता है। सबसे पहले महिला की ओवरी (अंडाशय) को उत्तेजित करने के लिए कुछ हार्मोनल इंजेक्शन और दवाएं दी जाती हैं। प्राकृतिक रूप से एक महीने में केवल एक अंडा बनता है, लेकिन इन दवाओं की मदद से शरीर एक साथ कई अंडे बनाने के लिए प्रेरित होता है। दूसरा चरण ‘एग रिट्रीवल’ का होता है, जिसमें एक छोटी सी सर्जिकल प्रक्रिया के माध्यम से अंडों को शरीर से बाहर निकाला जाता है। अंतिम चरण में, इन अंडों को प्रयोगशाला में तरल नाइट्रोजन के माध्यम से जमा दिया जाता है और इन्हें ‘एग बैंक’ में सुरक्षित स्टोर कर लिया जाता है।

क्या एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया में बहुत दर्द होता है?

एग फ्रीजिंग को लेकर महिलाओं के मन में सबसे बड़ा डर इसके दर्द को लेकर होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रक्रिया बहुत अधिक दर्दनाक नहीं है, लेकिन इसमें थोड़ी असहजता जरूर हो सकती है। हार्मोनल दवाओं के कोर्स के दौरान कुछ महिलाओं को सूजन (Bloating), मूड में बदलाव, सिरदर्द या भारीपन महसूस हो सकता है। जब अंडों को निकालने की प्रक्रिया (एग रिट्रीवल) की जाती है, तो मरीज को हल्की बेहोशी या एनेस्थीसिया दिया जाता है, जिससे उस समय दर्द महसूस नहीं होता। प्रक्रिया के बाद एक या दो दिन तक पेट के निचले हिस्से में हल्का दर्द या ऐंठन महसूस हो सकती है, जो सामान्य दवाओं से ठीक हो जाती है। अधिकांश महिलाएं अगले ही दिन से अपने सामान्य कामकाज पर वापस लौट सकती हैं।

फर्टिलिटी के लिए कौन सी उम्र है सबसे सही?

एग फ्रीजिंग की सफलता काफी हद तक महिला की उम्र पर निर्भर करती है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, एग फ्रीजिंग के लिए 30 से 34 साल की उम्र को सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस उम्र में महिला के अंडों की संख्या और उनकी गुणवत्ता दोनों ही बेहतर स्थिति में होती हैं। 35 साल की उम्र पार करने के बाद महिलाओं की प्रजनन क्षमता में तेजी से गिरावट आने लगती है, जिससे बाद में सफलता की संभावना कम हो सकती है। इसलिए, यदि कोई महिला देर से फैमिली प्लानिंग करने का सोच रही है, तो उसे 30 की शुरुआत में ही इस विकल्प पर विचार कर लेना चाहिए।

आखिर क्यों बढ़ रहा है इस तकनीक का ट्रेंड?

एग फ्रीजिंग के क्रेज के पीछे कई सामाजिक और व्यक्तिगत कारण हैं। पहला बड़ा कारण है करियर की प्राथमिकता। आज की महिलाएं अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती हैं, जिसके कारण वे 30 से पहले शादी या बच्चे का दबाव नहीं लेना चाहतीं। दूसरा कारण व्यक्तिगत परिस्थितियों जैसे कि सही जीवनसाथी का न मिलना या शादी में देरी होना है। इसके अलावा, कुछ विशेष मेडिकल स्थितियों में भी एग फ्रीजिंग जरूरी हो जाती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी महिला को कैंसर है और उसे कीमोथेरेपी या रेडिएशन से गुजरना है, तो ये इलाज भविष्य में उसकी फर्टिलिटी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर इलाज शुरू होने से पहले ही एग फ्रीजिंग की सलाह देते हैं ताकि भविष्य में मां बनने की संभावना बनी रहे।

कितना आता है एग फ्रीजिंग का खर्च?

एग फ्रीजिंग एक आधुनिक और महंगी तकनीक है। भारत के अलग-अलग शहरों और अस्पतालों में इसका खर्च अलग-अलग हो सकता है। आमतौर पर एक बार के एग फ्रीजिंग साइकिल का खर्च 1.5 लाख रुपये से लेकर 3 लाख रुपये के बीच आता है। इसमें दवाओं का खर्च, डॉक्टर की फीस और एग निकालने की प्रक्रिया शामिल होती है। इसके अलावा, अंडों को स्टोर करने के लिए सालाना फीस भी देनी पड़ती है, जो लगभग 20,000 से 50,000 रुपये के बीच हो सकती है। हालांकि यह खर्च काफी अधिक लग सकता है, लेकिन भविष्य की सुरक्षा और मानसिक शांति के लिए कई महिलाएं इसे एक निवेश की तरह देखती हैं।

सफलता की दर और कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां

एग फ्रीजिंग भविष्य में बच्चे की 100 प्रतिशत गारंटी नहीं है, लेकिन यह मां बनने की संभावना को काफी हद तक बढ़ा देती है। जब महिला इन अंडों का उपयोग करना चाहती है, तो उन्हें पिघलाकर (Thawing) स्पर्म के साथ फर्टिलाइज किया जाता है और फिर भ्रूण को गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है। सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि अंडे किस उम्र में फ्रीज किए गए थे। इस प्रक्रिया को अपनाने से पहले एक अच्छे फर्टिलिटी क्लिनिक का चुनाव करना और अपने डॉक्टर से सभी संभावित जोखिमों और खर्चों के बारे में खुलकर बात करना बहुत जरूरी है। यह तकनीक महिलाओं को सशक्त बनाती है कि वे अपने जीवन के फैसले अपनी शर्तों पर ले सकें।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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