Dhanbad Update: झारखंड के धनबाद जिले में प्रशासन अब डिजिटल इंडिया की राह पर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। धनबाद जिला परिषद ने अपने राजस्व को बढ़ाने और वर्षों से लंबित बकाया किराए की वसूली के लिए एक क्रांतिकारी फैसला लिया है। जिला परिषद के अधीन आने वाली सभी दुकानों में अब क्यूआर कोड (QR Code) लगाए जाएंगे। इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि दुकानदारों को अब किराया जमा करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और न ही परिषद के कर्मचारियों को वसूली के लिए दुकानों पर दस्तक देनी होगी।
Dhanbad Update: किराया वसूली के लिए परिषद की नई रणनीति
धनबाद जिला परिषद लंबे समय से बकाया किराए की समस्या से जूझ रही है। आंकड़ों पर नजर डालें तो परिषद के अधीन वर्तमान में लगभग 900 से अधिक दुकानें संचालित हो रही हैं। इन दुकानों से किराया वसूलना प्रशासन के लिए हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इन दुकानों पर कुल मिलाकर करीब तीन करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि बकाया है। कई दुकानदार ऐसे हैं, जिन्होंने पिछले कई सालों से किराया नहीं दिया है, जिससे परिषद की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ रहा है।
बकाया राशि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि व्यक्तिगत स्तर पर दुकानदारों पर 20 हजार रुपये से लेकर दो लाख रुपये तक का कर्ज चढ़ा हुआ है। कुछ दुकानदार तो भारी बकाया होने के कारण नाममात्र की राशि जमा कर अपनी दुकानदारी चला रहे हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह और मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सह उपविकास आयुक्त सन्नी राज के बीच एक अहम बैठक हुई, जिसमें क्यूआर कोड लगाने की योजना को हरी झंडी दे दी गई।
Dhanbad Update: नोटिस के बाद भी नहीं सुधरे हालात तो उठाना पड़ा कदम
जिला परिषद ने हाल ही में बकाएदारों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाते हुए उन्हें नोटिस जारी किए थे। इस कार्रवाई का कुछ असर तो देखने को मिला और लगभग 1.5 करोड़ रुपये की राशि परिषद के खजाने में जमा हुई। हालांकि, अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे दुकानदार हैं जो भुगतान में आनाकानी कर रहे हैं। क्यूआर कोड लगने के बाद भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और आसान हो जाएगी। दुकानदार अपने मोबाइल फोन से कोड स्कैन करके तुरंत भुगतान कर सकेंगे, जिसका सीधा रिकॉर्ड परिषद के डिजिटल डेटाबेस में दर्ज हो जाएगा।
नियमों का उल्लंघन करने वालों पर गिरेगी गाज
परिषद की अध्यक्ष शारदा सिंह ने स्पष्ट किया है कि केवल किराया वसूली ही उनका लक्ष्य नहीं है, बल्कि दुकानों के आवंटन में हो रही अनियमितताओं को भी ठीक करना है। परिषद के नियमों के मुताबिक, जिस व्यक्ति के नाम पर दुकान आवंटित की गई है, वह उसे किसी और को बेच या हस्तांतरित नहीं कर सकता। यदि कोई दुकानदार अपनी दुकान चलाने में असमर्थ है, तो उसे वह दुकान जिला परिषद को वापस सौंपनी होगी।
जांच में यह बात सामने आई है कि धनबाद में कई दुकानदारों ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए आवंटित दुकानें दूसरों को बेच दी हैं। इसके अलावा, कुछ प्रभावशाली लोगों ने एक ही जगह पर एक से अधिक दुकानों पर कब्जा जमा रखा है, जो परिषद के नियमों के विरुद्ध है। प्रशासन अब ऐसे लोगों की सूची तैयार कर रहा है। सूची फाइनल होते ही इन अवैध कब्जाधारियों और नियम तोड़ने वालों का आवंटन तत्काल प्रभाव से रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
राजस्व बढ़ाने की दिशा में अहम प्रयास
जिला परिषद के पास आय के स्रोत काफी सीमित हैं। ऐसे में दुकानों से प्राप्त होने वाला किराया परिषद की आय का एक मुख्य जरिया है। इस राशि का उपयोग जिले के विकास कार्यों और जनसुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। अध्यक्ष ने बताया कि क्यूआर कोड लगने से न केवल पारदर्शिता आएगी, बल्कि इससे ‘कैशलेस’ लेनदेन को भी बढ़ावा मिलेगा।
परिषद के इस फैसले से जहां एक ओर ईमानदार दुकानदारों को सुविधा होगी, वहीं दूसरी ओर जानबूझकर किराया दबाकर बैठने वाले लोगों पर लगाम कसेगी। आने वाले दिनों में परिषद की टीम हर दुकान का भौतिक सत्यापन भी करेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दुकान का उपयोग वही व्यक्ति कर रहा है जिसके नाम पर आवंटन हुआ है।
Dhanbad Update: डिजिटल व्यवस्था से बढ़ेगी कार्यक्षमता
धनबाद जिला परिषद की यह पहल अन्य जिलों के लिए भी एक मिसाल बन सकती है। सरकारी तंत्र में अक्सर फाइलों और रसीदों के चक्कर में किराया वसूली की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। क्यूआर कोड लगने से मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी समाप्त होगी। प्रशासन को उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद अगले कुछ महीनों के भीतर बकाया तीन करोड़ की राशि का एक बड़ा हिस्सा वसूल लिया जाएगा।
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