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AQI Explained: एयर क्वालिटी इंडेक्स क्या है, 0 से 500 तक के अंकों का मतलब और GRAP के चरण, आसान भाषा में समझें

AQI कैसे तय होता है, इसमें कौन से आठ प्रदूषक गिने जाते हैं, अच्छा से गंभीर तक छह श्रेणियों का मतलब, GRAP के चरण और खराब हवा में बरती जाने वाली सावधानियां।

मुख्य बातें

  • AQI क्या है?
  • AQI में किन प्रदूषकों को गिना जाता है?
  • AQI की गणना कैसे होती है?
  • AQI की छह श्रेणियां और उनका मतलब
56 मिनट पहले
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर स्मॉग के कारण कम दृश्यता - Smog and low visibility at New Delhi railway station
Photo: Sumita Roy Dutta / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

सर्दियों की शुरुआत के साथ ही दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई शहरों में “AQI” शब्द खबरों और मोबाइल ऐप्स पर बार-बार दिखने लगता है। कभी AQI 150 बताया जाता है, कभी 350 और कभी 450 से ऊपर। लेकिन इन अंकों का असल मतलब क्या है, AQI कैसे तय होता है और किस स्तर पर हमें क्या सावधानी बरतनी चाहिए? इस लेख में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की आधिकारिक जानकारी के आधार पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index) को आसान भाषा में समझाया गया है।

AQI क्या है?

AQI यानी Air Quality Index (वायु गुणवत्ता सूचकांक) हवा में मौजूद अलग-अलग प्रदूषकों के जटिल आंकड़ों को एक संख्या, एक रंग और एक विवरण में बदल देता है, ताकि आम लोग आसानी से समझ सकें कि उनके आसपास की हवा कितनी साफ या प्रदूषित है। पत्र सूचना कार्यालय (PIB) के अनुसार राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक को 17 अक्टूबर 2014 को नई दिल्ली में लॉन्च किया गया था। उस समय इसे “One Number, One Colour, One Description” के रूप में पेश किया गया था। इसे CPCB ने विशेषज्ञ समूह की मदद से विकसित किया, जिसमें चिकित्सा विशेषज्ञ, वायु गुणवत्ता विशेषज्ञ और IIT कानपुर का तकनीकी सहयोग शामिल था।

AQI में किन प्रदूषकों को गिना जाता है?

भारत के राष्ट्रीय AQI में आठ प्रदूषकों को शामिल किया गया है, जिनके लिए अल्पकालिक (24 घंटे तक) राष्ट्रीय मानक तय हैं:

  • PM10: 10 माइक्रोमीटर या उससे छोटे कण
  • PM2.5: 2.5 माइक्रोमीटर या उससे छोटे बेहद महीन कण, जो फेफड़ों में गहराई तक जा सकते हैं
  • NO2: नाइट्रोजन डाइऑक्साइड
  • SO2: सल्फर डाइऑक्साइड
  • CO: कार्बन मोनोऑक्साइड
  • O3: ओजोन
  • NH3: अमोनिया
  • Pb: सीसा (लेड)

AQI की गणना कैसे होती है?

CPCB के अनुसार हर प्रदूषक की मापी गई सांद्रता के आधार पर एक “सब-इंडेक्स” निकाला जाता है। जिस प्रदूषक का सब-इंडेक्स सबसे खराब (सबसे ज्यादा) होता है, वही उस जगह का कुल AQI माना जाता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी जगह PM2.5 का सब-इंडेक्स 320 और बाकी प्रदूषकों का इससे कम है, तो वहां का AQI 320 होगा। AQI निकालने के लिए कम से कम तीन प्रदूषकों का डेटा जरूरी है, जिनमें एक PM2.5 या PM10 होना अनिवार्य है। सर्दियों में उत्तर भारत में अक्सर PM2.5 और PM10 ही AQI को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं।

AQI की छह श्रेणियां और उनका मतलब

AQIश्रेणीसंभावित स्वास्थ्य प्रभाव (CPCB के अनुसार)
0–50अच्छा (Good)न्यूनतम प्रभाव
51–100संतोषजनक (Satisfactory)संवेदनशील लोगों को सांस लेने में मामूली तकलीफ हो सकती है
101–200मध्यम (Moderate)अस्थमा जैसी फेफड़ों की बीमारी वालों, हृदय रोगियों, बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी हो सकती है
201–300खराब (Poor)लंबे समय तक संपर्क में रहने पर अधिकांश लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है
301–400बहुत खराब (Very Poor)लंबे संपर्क से सांस संबंधी बीमारी हो सकती है; फेफड़े और हृदय रोगियों पर असर ज्यादा
401–500गंभीर (Severe)स्वस्थ लोगों पर भी असर; बीमार लोगों पर गंभीर प्रभाव, हल्की शारीरिक गतिविधि में भी

हर श्रेणी के लिए एक रंग भी तय है, जो हरे (अच्छा) से शुरू होकर गहरे लाल/मैरून (गंभीर) तक जाता है। इससे ऐप या डिस्प्ले बोर्ड पर एक नजर में हवा की स्थिति समझ आ जाती है।

GRAP क्या है और AQI से इसका संबंध

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से निपटने के लिए “ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान” (GRAP) लागू किया जाता है, जिसे वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) संचालित करता है। CAQM के GRAP दस्तावेज के अनुसार इसके चार चरण दिल्ली के AQI पर आधारित हैं:

  • चरण I – खराब: AQI 201–300
  • चरण II – बहुत खराब: AQI 301–400
  • चरण III – गंभीर: AQI 401–450
  • चरण IV – गंभीर+: AQI 450 से ऊपर

हर चरण में निर्माण कार्य, वाहनों, डीजल जनरेटर और उद्योगों से जुड़े अलग-अलग प्रतिबंध लगाए जाते हैं। मौसम पूर्वानुमान के आधार पर ये कदम AQI के उस स्तर तक पहुंचने से पहले भी लागू किए जा सकते हैं।

सर्दियों में AQI क्यों बिगड़ता है?

  • ठंड में हवा की गति कम हो जाती है और जमीन के पास ठंडी हवा की परत प्रदूषकों को ऊपर जाने से रोकती है।
  • वाहनों, निर्माण कार्य की धूल और उद्योगों का उत्सर्जन लगातार जारी रहता है।
  • कुछ इलाकों में फसल अवशेष (पराली) और कचरा जलाने से धुआं बढ़ता है।
  • ठंड से बचने के लिए लकड़ी, कोयला आदि जलाने से भी प्रदूषण बढ़ता है।

अपने शहर का AQI कैसे देखें

CPCB की वेबसाइट (cpcb.nic.in और airquality.cpcb.gov.in) पर देशभर के निगरानी केंद्रों का लगभग रियल-टाइम डेटा उपलब्ध है। CPCB का “SAMEER” मोबाइल ऐप भी AQI की जानकारी देता है। CPCB हर दिन शहरों का AQI बुलेटिन भी जारी करता है।

खराब AQI में क्या सावधानियां रखें

  • AQI खराब या उससे ऊपर होने पर बाहर लंबे समय तक तेज व्यायाम या दौड़ से बचें।
  • बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और सांस या हृदय रोगियों का विशेष ध्यान रखें।
  • बाहर निकलना जरूरी हो तो अच्छी फिटिंग वाला मास्क (जैसे N95) उपयोगी हो सकता है।
  • सबसे ज्यादा प्रदूषण वाले समय में खिड़कियां बंद रखें और घर के अंदर धुआं करने वाली चीजें (अगरबत्ती, अंगीठी) कम जलाएं।
  • कूड़ा या पत्ते न जलाएं, और जहां संभव हो सार्वजनिक परिवहन या कार-पूल का उपयोग करें।
  • सांस लेने में तकलीफ, लगातार खांसी या सीने में दर्द होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

AQI कितना होना अच्छा माना जाता है?

0 से 50 के बीच AQI “अच्छा” और 51 से 100 के बीच “संतोषजनक” माना जाता है।

भारत में राष्ट्रीय AQI कब शुरू हुआ?

17 अक्टूबर 2014 को, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा।

AQI में कितने प्रदूषक शामिल होते हैं?

आठ: PM10, PM2.5, NO2, SO2, CO, O3, NH3 और लेड (Pb)।

GRAP का चरण IV कब लागू होता है?

जब दिल्ली का AQI 450 से ऊपर “गंभीर+” श्रेणी में पहुंचता है या पहुंचने का अनुमान होता है।

Sudhanshu Tiwari
Author: Sudhanshu Tiwari

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कवरेज: Sudhanshu Tiwari, News Media Kiran

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