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Jharkhand News: सीएम के निर्देश के बाद भी विश्वविद्यालय सेवा आयोग का गठन अधूरा, हजारों पद खाली

मुख्य बातें

  • विवि सेवा आयोग गठन में देरी के पीछे क्या कारण हैं?
  • इससे कितनी नियुक्तियां और प्रोन्नतियां प्रभावित हुई हैं?
  • अधिनियम में आयोग का प्रावधान क्या है और उसका उद्देश्य क्या था?
  • विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी का पढ़ाई और शोध पर क्या असर पड़ रहा है?
2 घंटे पहले
Jharkhand News
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Jharkhand News: झारखंड के सरकारी विश्वविद्यालयों में शिक्षकों और कर्मियों की भारी कमी के बीच विश्वविद्यालय सेवा आयोग का गठन अब भी अधर में है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 13 जुलाई 2026 को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को 15 दिनों के अंदर आयोग गठित कर उसे सक्रिय करने का स्पष्ट निर्देश दिया था। इसका मकसद था कि विश्वविद्यालयों में अधिकारी, शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मियों के रिक्त पदों पर समय पर नियुक्ति व प्रोन्नति हो सके। लेकिन साढ़े तीन महीने बीत जाने के बावजूद स्थिति जस की तस है। उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार, आयोग गठन संबंधी फाइल अभी वित्त विभाग में लंबित पड़ी है। नतीजा यह कि राज्य में 6000 से अधिक नियुक्तियां प्रभावित हो गई हैं।

विवि सेवा आयोग गठन में देरी के पीछे क्या कारण हैं?

मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद आयोग का गठन नहीं हो पाना प्रशासनिक देरी का स्पष्ट संकेत है। 28 अप्रैल 2026 को जारी झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 में आयोग के गठन का प्रावधान किया गया था। अधिनियम के तहत आयोग का मुख्यालय रांची में होना था। इसमें एक अध्यक्ष, एक प्रशासनिक सदस्य और तीन अन्य सदस्य शामिल होने थे। सभी पद पूर्णकालिक हैं और नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जानी थी। अध्यक्ष पद के लिए प्रधान सचिव स्तर के अधिकारी, पूर्व कुलपति या संस्थान के निदेशक को प्राथमिकता दी गई थी। प्रशासनिक सदस्य और अन्य सदस्यों के लिए भी सेवानिवृत्त सचिव, प्रोफेसर और न्यायिक अधिकारी जैसी योग्यताएं तय थीं।

इन प्रावधानों के बावजूद अध्यक्ष और सदस्यों के चयन की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी। विभाग सूत्रों के अनुसार, फाइल वित्त विभाग में अटकी होने से आगे की कार्रवाई ठप है। कई शिक्षाविद इसे प्राथमिकता की कमी मानते हैं, क्योंकि उच्च शिक्षा में रिक्तियों का मुद्दा वर्षों पुराना है।

इससे कितनी नियुक्तियां और प्रोन्नतियां प्रभावित हुई हैं?

आयोग न बनने से करीब 6000 पदों पर नियुक्तियां अटकी हुई हैं। इनमें लगभग 3500 शिक्षकों की नियुक्ति, अधिकारियों के 23 रिक्त पद और शिक्षकेतर कर्मियों के करीब 1500 पद शामिल हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की नियुक्ति अब आउटसोर्सिंग के जरिए करने का निर्णय लिया गया है। प्रोन्नति का मुद्दा और भी गंभीर है। वर्ष 2008 में नियुक्त शिक्षकों की प्रोन्नति लंबे समय से विवादों में फंसी रही। अक्टूबर 2025 में जेपीएससी ने 488 सहायक प्रोफेसरों को स्टेज वान से टू में प्रोन्नति देने की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन जेपीएससी की परीक्षाओं की सीआईडी जांच और सदस्यों के इस्तीफे के कारण आगे की प्रोन्नतियां अटकी रहीं। नतीजा यह कि राज्य के सरकारी विश्वविद्यालयों में अब सिर्फ दो प्रोफेसर बचे हैं।

प्रोन्नति में देरी से शिक्षकों के वेतनमान और उच्च पदों के लिए पात्रता दोनों प्रभावित हो रहे हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह स्थिति न सिर्फ व्यक्तिगत नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि शैक्षणिक गुणवत्ता भी गिर रही है।

अधिनियम में आयोग का प्रावधान क्या है और उसका उद्देश्य क्या था?

झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 के तहत विश्वविद्यालय सेवा आयोग को नियुक्ति और प्रोन्नति की केंद्रीय एजेंसी बनाया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालयों में पारदर्शी और समयबद्ध भर्ती सुनिश्चित करना था। अधिनियम में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आयोग के सदस्य पूर्णकालिक होंगे और उनकी नियुक्ति राज्य सरकार करेगी। मुख्यालय रांची निर्धारित किया गया था, ताकि पूरे राज्य की जरूरतें एक जगह से पूरी हो सकें।

आयोग को झारखंड पात्रता परीक्षा (जेट) आयोजित करने की जिम्मेदारी भी दी गई थी। लेकिन गठन न होने से यह प्रावधान कागजों तक सीमित रह गया। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय पर आयोग बना होता तो नियुक्तियों में पारदर्शिता बढ़ती और वर्षों से लंबित पद भरे जा सकते थे।

विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी का पढ़ाई और शोध पर क्या असर पड़ रहा है?

शिक्षकों के खाली पदों का सीधा असर कक्षाओं, प्रैक्टिकल, शोध निर्देशन और परीक्षा मूल्यांकन पर पड़ रहा है। दिसंबर 2024 में झारखंड हाईकोर्ट में विश्वविद्यालयों की ओर से दिए गए शपथपत्रों के अनुसार, रांची विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के 850 स्वीकृत पदों में से 528 रिक्त हैं। सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय में 809 में 575, विनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय में 536 में 373, नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में 326, कोल्हान विश्वविद्यालय में 753 में 508 और डीएसपीएमयू में नियमित तथा बैकलॉग के कई पद खाली हैं।

प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के दर्जनों पद भी रिक्त हैं। कोल्हान में प्रोफेसर के 64, रांची में 46 और अन्य विश्वविद्यालयों में भी दोहरे अंकों में रिक्तियां हैं। कई विभागों में 600 से अधिक अतिथि और आवश्यकता-आधारित शिक्षकों पर निर्भरता बढ़ गई है। इससे नियमित शिक्षण प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और छात्र शोध तथा उच्च शिक्षा के अवसरों से वंचित हो रहे हैं।

जेट परीक्षा और अभ्यर्थियों पर देरी का क्या प्रभाव पड़ रहा है?

राज्य में लगभग 18 वर्षों के अंतराल के बाद 2025 में झारखंड पात्रता परीक्षा आयोजित की गई थी। छह जिलों के 434 केंद्रों पर करीब 1.75 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे, लेकिन बाद में परीक्षा रद्द कर दी गई। नए अधिनियम के तहत अब जेट आयोजित करने की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय सेवा आयोग को सौंपी गई है। आयोग के गठन में देरी से अगली परीक्षा की तारीख अनिश्चित बनी हुई है।

इसका सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है जो असिस्टेंट प्रोफेसर बनने या पीएचडी में नामांकन की तैयारी कर रहे हैं। वर्षों की मेहनत के बाद भी परीक्षा न होने से उनकी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। शिक्षा विभाग के पास अब तक कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं है कि आयोग कब सक्रिय होगा और जेट कब आयोजित होगी।

कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद विश्वविद्यालय सेवा आयोग का न बनना उच्च शिक्षा क्षेत्र में गहरी समस्या पैदा कर रहा है। रिक्त पदों की भरमार, प्रोन्नति में वर्षों की देरी और पात्रता परीक्षा की अनिश्चितता ने विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली को कमजोर कर दिया है। छात्रों की पढ़ाई और शोध दोनों प्रभावित हो रहे हैं। अब देखना होगा कि वित्त विभाग में अटकी फाइल कब आगे बढ़ती है और आयोग कब जमीन पर उतरता है। जब तक यह नहीं होता, झारखंड के उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षक और कर्मचारी दोनों की कमी बनी रहेगी।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

Sanjana Gupta Hindi Content Writer | New Media Kiran Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

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कवरेज: Sanjna Gupta, News Media Kiran

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