Health Tips: सुबह उठते ही अकड़ जाते हैं हाथ-पैर? डॉक्टर ने बताया आर्थराइटिस के किन संकेतों को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज
By Netsha Singh | News Media Kiran
प्रकाशित: · 4 मिनट में पढ़ें
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1 मिनट पहले
Health Tips
Health Tips: सुबह सोकर उठने के बाद हाथ-पैरों में अकड़न महसूस होना, उंगलियों को मोड़ने में परेशानी होना या जोड़ों में दर्द रहना आर्थराइटिस के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। आमतौर पर लोग इसे उम्र बढ़ने, थकान या सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
लेकिन लगातार ऐसा होना जोड़ों से जुड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है। दिल्ली स्थित श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट में निदेशक एवं प्रमुख, ऑर्थोपेडिक्स, डॉक्टर एच.एस. छाबड़ा बता रहे हैं कि किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
आर्थराइटिस कितने प्रकार का होता है?
डॉक्टर एच.एस. छाबड़ा के अनुसार आर्थराइटिस कई प्रकार का होता है, जिसमें रूमेटाइड आर्थराइटिस और ऑस्टियोआर्थराइटिस प्रमुख हैं। रूमेटाइड आर्थराइटिस में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता गलती से अपने ही जोड़ों पर हमला करने लगती है। इससे जोड़ों में सूजन, दर्द और अकड़न होने लगती है। इसमें सुबह उठने के बाद अकड़न आमतौर पर 30 मिनट से अधिक समय तक रह सकती है।
ऑस्टियोआर्थराइटिस में जोड़ों के बीच मौजूद कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसने लगता है। इससे चलने-फिरने, सीढ़ियां चढ़ने या कोई सामान उठाने पर दर्द हो सकता है। जोड़ों में सूजन, गर्माहट, लालिमा, उंगलियों की पकड़ कमजोर होना और घुटनों में दर्द भी इसके लक्षण हो सकते हैं।
किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
डॉक्टर के अनुसार सुबह उठने पर हाथ-पैरों या जोड़ों में लंबे समय तक रहने वाली अकड़न को हल्के में नहीं लेना चाहिए। जोड़ों में सूजन, लालिमा और चलने-फिरने में कठिनाई जैसी समस्याएं भी महत्वपूर्ण संकेत हैं। अगर ये समस्याएं कई दिनों तक बनी रहें तो फौरन डॉक्टर से मिलना चाहिए। समय पर ध्यान देने से आगे की परेशानी को कम किया जा सकता है।
रूमेटाइड और ऑस्टियोआर्थराइटिस में क्या अंतर है?
रूमेटाइड आर्थराइटिस ऑटोइम्यून समस्या है जिसमें शरीर खुद के जोड़ों पर हमला करता है। इसमें अकड़न सुबह के समय ज्यादा और लंबे समय तक रहती है। ऑस्टियोआर्थराइटिस में कार्टिलेज घिसने से दर्द होता है, जो गतिविधि के दौरान बढ़ता है। दोनों में सूजन और दर्द आम है, लेकिन कारण और उपचार का तरीका अलग होता है। सही जांच से ही प्रकार की पहचान होती है।
समस्या को कैसे कंट्रोल कर सकते हैं?
डॉक्टर कहते हैं कि अगर ये परेशानियां लगातार बनी रहती हैं या धीरे-धीरे बढ़ रही हैं तो इन्हें सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर डॉक्टर से परामर्श लेकर जरूरी जांच कराना महत्वपूर्ण है। नियमित हल्का व्यायाम करें, वजन नियंत्रित रखें और संतुलित खानपान अपनाएं। जोड़ों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालने से बचें। ये आदतें लक्षणों को नियंत्रित रखने में मददगार हो सकती हैं।
डॉक्टर से कब सलाह लें?
सुबह की अकड़न अगर आधे घंटे से ज्यादा समय तक रहती है या जोड़ों में सूजन और दर्द बढ़ रहा है तो देर न करें। उंगलियों की पकड़ कमजोर होना, सीढ़ियां चढ़ने में दिक्कत या रोजमर्रा के काम में परेशानी होना भी डॉक्टर से मिलने के संकेत हैं। शुरुआती चरण में इलाज शुरू करने से जोड़ों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
सुबह उठते ही हाथ-पैरों में अकड़न आर्थराइटिस का शुरुआती संकेत हो सकता है। रूमेटाइड और ऑस्टियोआर्थराइटिस दोनों में ये लक्षण दिख सकते हैं। लंबे समय तक अकड़न, सूजन या दर्द को नजरअंदाज न करें। डॉक्टर से सलाह लेकर जांच कराना और जीवनशैली में छोटे बदलाव करना समस्या को नियंत्रित रखने में मदद करता है। समय पर ध्यान देने से जोड़ों की सेहत बेहतर रखी जा सकती है।