Jharkhand Liquor Scam: झारखंड के शराब घोटाला मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को एक और बड़ी सफलता मिली है। एसीबी ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ के शराब कारोबारी नवीन केडिया को गोवा से गिरफ्तार कर लिया है। नवीन केडिया के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट निकाला गया था और वह काफी समय से फरार चल रहा था। एसीबी की टीम ने उसका पता लगाकर गोवा से गिरफ्तार किया। अब उसे ट्रांजिट रिमांड पर लेकर रांची लाया जाएगा और उससे विस्तृत पूछताछ की जाएगी।
यह 13 अक्टूबर 2025 के बाद से शराब घोटाला मामले में छठी गिरफ्तारी है। इससे पहले एसीबी ने पांच अन्य आरोपितों को गिरफ्तार किया था जिनमें शराब कारोबारी और प्लेसमेंट एजेंसियों से जुड़े लोग शामिल हैं। नवीन केडिया की गिरफ्तारी से इस मामले में नए खुलासे होने की उम्मीद है।
नवीन केडिया कौन है?
नवीन केडिया छत्तीसगढ़ का एक जाना-माना शराब कारोबारी है। उसके झारखंड में शराब व्यापार से गहरे संबंध बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, नवीन केडिया को पूर्व प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे का करीबी माना जाता है। मई 2022 में जब झारखंड में नई उत्पाद नीति लागू की गई, तब छत्तीसगढ़ के कई शराब कारोबारियों को झारखंड में काम दिया गया था।
आरोप है कि इन कारोबारियों से मोटी रकम कमीशन के रूप में ली गई। नवीन केडिया भी उन कारोबारियों में से एक है जिन्हें झारखंड में शराब व्यापार का लाइसेंस दिया गया था। एसीबी की जांच में यह बात सामने आई है कि इन लाइसेंसों के लिए अनुचित तरीके से धन का लेन-देन हुआ।
गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद फरार
एसीबी ने नवीन केडिया के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसके बाद से ही वह फरार चल रहा था। उसने अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट में अर्जी भी लगा रखी थी। लेकिन एसीबी की टीम उसकी तलाश में लगी हुई थी।
आखिरकार गुरुवार को एसीबी को सूचना मिली कि नवीन केडिया गोवा में छिपा हुआ है। तुरंत एसीबी की टीम गोवा पहुंची और स्थानीय पुलिस के सहयोग से उसे गिरफ्तार कर लिया। यह एक बड़ी सफलता है क्योंकि केडिया काफी समय से पुलिस की पकड़ से बचता रहा था।
अब केडिया को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर रांची लाया जाएगा। वहां अदालत में पेश किया जाएगा और फिर रिमांड पर लेकर विस्तृत पूछताछ की जाएगी। एसीबी को उम्मीद है कि केडिया से मिलने वाली जानकारी इस मामले में नए खुलासे कर सकती है।
शराब घोटाले की पृष्ठभूमि
झारखंड शराब घोटाला मई 2022 से शुरू हुआ माना जाता है। उस समय उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे थे। उनके कार्यकाल में एक नई उत्पाद नीति लागू की गई जिसमें छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के शराब कारोबारियों को झारखंड में काम करने का मौका दिया गया।
साथ ही प्लेसमेंट एजेंसियों को भी शामिल किया गया जो शराब दुकानों पर कर्मचारी उपलब्ध कराती थीं। आरोप है कि इन सभी के चयन में भ्रष्टाचार हुआ। जिन कारोबारियों और एजेंसियों ने मोटी रकम दी, उन्हें लाइसेंस और अनुबंध दिए गए।
जांच में यह भी सामने आया है कि जिन अधिकारियों ने इस अनियमितता का विरोध किया, उनका तबादला कर दिया गया। और जो अधिकारी इसमें सहयोग करते रहे, उन्हें फायदा पहुंचाया गया। इस पूरे घोटाले में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ बताया जा रहा है।
अब तक की गिरफ्तारियां
13 अक्टूबर 2025 को एसीबी ने गुजरात के अहमदाबाद से पहली गिरफ्तारी की थी। प्लेसमेंट एजेंसी विजन हॉस्पिटालिटी सर्विसेज एंड कंस्लटेंट्स से जुड़े तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। ये थे परेश अभेसिंह ठाकोर, विक्रमासिंह अभेसिंह ठाकोर और महेश शिडगे। इन तीनों पर आरोप है कि उन्होंने अनुचित तरीके से शराब दुकानों पर कर्मचारी उपलब्ध कराने का अनुबंध हासिल किया।
14 नवंबर को दूसरी बड़ी गिरफ्तारी हुई। एसीबी ने छत्तीसगढ़ के विलासपुर से शराब कारोबारी राजेंद्र जायसवाल को गिरफ्तार किया। राजेंद्र जायसवाल उर्फ चुन्नू जायसवाल भी झारखंड में शराब व्यापार से जुड़े थे और उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं।
13 दिसंबर को तीसरी बड़ी कार्रवाई हुई। महाराष्ट्र के ठाणे से एसीबी ने प्लेसमेंट एजेंसी मेसर्स मार्शन के निदेशक जगन तुकाराम देसाई को गिरफ्तार किया। देसाई की एजेंसी ने भी झारखंड में शराब दुकानों पर कर्मचारी उपलब्ध कराने का अनुबंध पाया था।
अब नवीन केडिया की गिरफ्तारी छठी गिरफ्तारी है। इन सभी गिरफ्तारियों से एसीबी को इस घोटाले के विभिन्न पहलुओं की जानकारी मिल रही है। हर आरोपी से पूछताछ में नए नाम और तथ्य सामने आ रहे हैं।
विनय चौबे मास्टरमाइंड

एसीबी की जांच में पूर्व प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे का नाम बार-बार सामने आ रहा है। कई अधिकारियों ने कोर्ट में बयान दिया है कि विनय चौबे ने ही इस पूरे घोटाले की रूपरेखा बनाई थी। उन्होंने ही तय किया कि किन कारोबारियों और एजेंसियों को काम दिया जाए।
अधिकारियों ने बताया कि विनय चौबे का दबाव था। जिन अधिकारियों ने विरोध किया, उनका तबादला कर दिया गया। और जिन्होंने उनकी बात मानी, उन्हें फायदा पहुंचाया गया। यह एक सुनियोजित साजिश थी जिसमें सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया गया।
विनय चौबे को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। उन्हें शराब घोटाला और आय से अधिक संपत्ति के मामले में एसीबी ने हिरासत में लिया था। सात दिनों तक पूछताछ की गई। लेकिन उन्होंने कई सवालों के जवाब देने से इनकार कर दिया और कहा कि उन्हें कुछ याद नहीं है।
प्लेसमेंट एजेंसियों की भूमिका
इस पूरे घोटाले में प्लेसमेंट एजेंसियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उत्पाद नीति के तहत शराब दुकानों पर कर्मचारी उपलब्ध कराने के लिए प्लेसमेंट एजेंसियों को अनुबंध दिया गया। लेकिन इन एजेंसियों के चयन में भारी अनियमितता हुई।
जांच में पता चला है कि कई एजेंसियां योग्य नहीं थीं। उनके पास न तो अनुभव था और न ही पर्याप्त संसाधन। लेकिन फिर भी उन्हें करोड़ों रुपये के अनुबंध दे दिए गए। कारण साफ है – उन्होंने मोटी रकम कमीशन के रूप में दी थी।
अब उत्पाद विभाग इन एजेंसियों की देनदारी तय करने में भी समस्या का सामना कर रहा है। इससे संबंधित फाइलें एसीबी के कब्जे में हैं। विभाग यह तय नहीं कर पा रहा कि इन एजेंसियों को कितना भुगतान करना है और क्या ये अनुबंध वैध हैं या नहीं।
राजनीतिक सवाल
इस पूरे मामले पर राजनीतिक सवाल भी उठ रहे हैं। विपक्षी दलों ने सरकार से सवाल किया है कि पूर्व उत्पाद आयुक्तों ने विनय चौबे के दबाव की जानकारी सरकार को क्यों नहीं दी। यदि अधिकारियों पर दबाव था तो उन्हें तुरंत मुख्यमंत्री या अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित करना चाहिए था।
भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने एसीबी जांच पर ही सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जांच पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। जितने भी दोषी हैं, चाहे वे किसी भी पद पर हों, उन्हें सजा मिलनी चाहिए। राजनीतिक दबाव में आकर किसी को नहीं बख्शा जाना चाहिए।
सरकार का कहना है कि जांच निष्पक्ष रूप से चल रही है। एसीबी को पूरी स्वतंत्रता दी गई है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह मामला अदालत में है और कानून अपना काम कर रहा है।
Jharkhand Liquor Scam: अब आगे की जांच में क्या होगा?
नवीन केडिया की गिरफ्तारी के बाद एसीबी उससे विस्तृत पूछताछ करेगी। उससे यह पूछा जाएगा कि उसने झारखंड में शराब व्यापार का लाइसेंस कैसे हासिल किया। किस-किस को कितना पैसा दिया। किन अधिकारियों से मिला। किसने मदद की। यह सारी जानकारी जांच के लिए महत्वपूर्ण होगी।
एसीबी यह भी देखेगी कि क्या केडिया के अलावा और भी लोग इस मामले में शामिल हैं। क्या कोई बड़ा नाम है जो अभी तक सामने नहीं आया है। क्या कोई राजनेता भी इसमें शामिल था। ये सभी पहलू जांच के दायरे में हैं।
यह मामला झारखंड में भ्रष्टाचार के सबसे बड़े मामलों में से एक बन गया है। अब तक छह लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच अभी जारी है। आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि अंततः इस घोटाले में कितने लोग फंसते हैं और कितनी राशि की गड़बड़ी सामने आती है।



