Jharkhand Politics: झारखंड की राजनीति में बुधवार को एक अहम बदलाव होने जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष आदित्य साहू को राज्य का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाएगा। बुधवार दोपहर दो बजे इसकी आधिकारिक घोषणा होगी। आदित्य साहू भाजपा अध्यक्ष के रूप में बाबूलाल मरांडी का स्थान लेंगे, जो अब विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं।
मंगलवार को पार्टी के संगठन पर्व के आखिरी दिन दोपहर 12 बजे से 2 बजे के बीच नामांकन पत्र जमा हुए। प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए सिर्फ आदित्य साहू ने ही अपना नामांकन दाखिल किया। इस तरह उनका चुनाव तय माना जा रहा है।
46 साल की राजनीतिक यात्रा
आदित्य साहू की राजनीतिक यात्रा किसी प्रेरक कहानी से कम नहीं है। साल 1980 में ओरमांझी के कुचू गांव में एक साधारण बूथ कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी शुरू की थी। 46 वर्षों की इस लंबी यात्रा में उन्होंने धैर्य, संघर्ष, समर्पण और अनुशासन का परिचय दिया।
भाजपा ने हमेशा यह कहा है कि उनकी पार्टी में बूथ स्तर का कार्यकर्ता भी प्रदेश या राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकता है। आदित्य साहू इस बात का जीता जागता उदाहरण हैं। उन्होंने संगठन की हर सीढ़ी को धीरे-धीरे पार किया और अपनी मेहनत से यहां तक पहुंचे।
उनकी राजनीति में कोई शॉर्टकट नहीं रहा। न कोई गॉडफादर और न ही किसी गुटबाजी का ठप्पा। वे हर बड़े नेता के साथ काम करते रहे लेकिन किसी एक गुट में नहीं बंधे। यही कारण है कि पार्टी के सभी धड़ों में उनकी स्वीकार्यता है।
किनसे सीखी राजनीति की बारीकियां
आदित्य साहू ने राजनीति की बारीकियां और संगठन के दांव-पेंच पूर्व सांसद रामटहल चौधरी से सीखे। उन्होंने संयुक्त बिहार में भाजपा के पितामह कैलाशपति मिश्र से लेकर झारखंड के वरिष्ठ नेताओं कड़िया मुंडा, बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और रघुवर दास की छत्रछाया में काम किया।
किसी भी गुट का हिस्सा न होने के बावजूद वे सभी के प्रिय बने रहे। पार्टी के बहुसंख्यक कार्यकर्ता उनकी सरलता और सहजता के कायल हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि बिना कड़वी बात बोले भी वे सबसे शत प्रतिशत काम करवा लेते हैं।
पलामू में दिखाई संगठनात्मक क्षमता

आदित्य साहू का संगठनात्मक रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली रहा है। खासकर पलामू प्रमंडल के प्रभारी के रूप में उन्होंने भाजपा को लगातार सफलता दिलाई। उनकी रणनीति और जमीनी काम करने की क्षमता ने उन्हें पार्टी में अलग पहचान दिलाई।
वर्तमान में वे राज्यसभा सदस्य हैं और 3 अक्टूबर से प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उन पर राज्य में पार्टी को मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
राष्ट्रीय परिषद के लिए 21 नाम
प्रदेश चुनाव अधिकारी और केंद्रीय मंत्री जुएल उरांव ने बताया कि राष्ट्रीय परिषद की 21 सीटों के लिए 21 नामांकन पत्र मिले हैं। बुधवार को इनकी भी विधिवत घोषणा की जाएगी।
राष्ट्रीय परिषद के लिए नामांकन करने वालों में कड़िया मुंडा, अर्जुन मुंडा, रघुवर दास, चंपाई सोरेन, मधु कोड़ा, संजय सेठ, अन्नपूर्णा देवी, अभयकांत प्रसाद, यदुनाथ पांडेय, पशुपति नाथ सिंह, रवींद्र कुमार राय, दिनेशानंद गोस्वामी, दीपक प्रकाश, प्रदीप वर्मा, समीर उरांव, अनंत ओझा, गीता कोड़ा, अमर कुमार बाउरी, नीलकंठ सिंह मुंडा, भानु प्रताप शाही और जीतू चरण राम शामिल हैं।
Jharkhand Politics: आदित्य साहू के सामने चुनौतियां
प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद आदित्य साहू के सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली। पार्टी को झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाले गठबंधन से हार का सामना करना पड़ा। अब आदित्य साहू को संगठन को मजबूत करना होगा और आगामी चुनावों की तैयारी शुरू करनी होगी। उन्हें पार्टी के सभी गुटों को साथ लेकर चलना होगा और कार्यकर्ताओं के बीच नई ऊर्जा भरनी होगी।
झारखंड में आदिवासी समाज का बड़ा वोट बैंक है। भाजपा को इस वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की जरूरत है। साथ ही युवाओं और महिलाओं को भी पार्टी से जोड़ना होगा। आदित्य साहू की संगठनात्मक क्षमता और जमीनी जुड़ाव इन चुनौतियों से निपटने में मददगार साबित हो सकता है।
पार्टी को उम्मीद है कि आदित्य साहू के नेतृत्व में झारखंड भाजपा नई ऊंचाइयां हासिल करेगी और आने वाले चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करेगी।



