Top 5 This Week

Related Posts

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर 2 लाख से अधिक दावे और आपत्तियां दर्ज, भाजपा ने सबसे अधिक आवेदन किए

SIR in West Bengal: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर राजनीतिक दलों और आम नागरिकों की ओर से अब तक दो लाख से अधिक दावे और आपत्तियां दर्ज की जा चुकी हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय से जारी आंकड़े बताते हैं कि 16 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक चलने वाले क्लेम्स एंड ऑब्जेक्शंस पीरियड के दौरान भारी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। यह पूरी प्रक्रिया आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने बूथ लेवल एजेंटों के माध्यम से बड़ी संख्या में दावे और आपत्तियां दर्ज कराई हैं जिनकी जांच और निपटारे की प्रक्रिया चल रही है।

प्रारूप मतदाता सूची का विवरण

चुनाव आयोग कार्यालय के अनुसार पश्चिम बंगाल की प्रारूप मतदाता सूची में कुल 7,08,16,630 मतदाता दर्ज हैं। यह एक विशाल संख्या है जो पश्चिम बंगाल की विशाल जनसंख्या और चुनावी महत्व को दर्शाती है। इस विशाल मतदाता आधार की समीक्षा करना और उसे त्रुटिरहित बनाना एक जटिल और समय लेने वाला कार्य है।

विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया इसी उद्देश्य से शुरू की गई है ताकि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की त्रुटि, डुप्लीकेट नाम, मृत व्यक्तियों के नाम या गलत पते आदि को सुधारा जा सके। यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक चुनाव प्रणाली की पवित्रता सुनिश्चित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

दावे और आपत्तियों का विवरण

विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ लेवल एजेंट्स यानी बीएलए के माध्यम से कुल 2,09,438 दावे और आपत्तियां दर्ज कराई गईं। यह संख्या दर्शाती है कि मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक दलों में कितनी सक्रियता है। इनमें से 8 मामले नाम शामिल करने से जुड़े दावे हैं जबकि एक भी मामला आगे जांच लायक नहीं पाया गया।

बूथ लेवल एजेंट राजनीतिक दलों द्वारा प्रत्येक मतदान केंद्र पर नियुक्त किए जाते हैं जो मतदाता सूची की जांच करते हैं और अपनी पार्टी की ओर से दावे या आपत्तियां दर्ज कराते हैं। यह प्रक्रिया राजनीतिक दलों को मतदाता सूची में सक्रिय भागीदारी का अवसर देती है।

भाजपा ने सबसे अधिक दावे किए दर्ज

राष्ट्रीय दलों में सबसे अधिक दावे भारतीय जनता पार्टी की ओर से आए हैं। भाजपा ने कुल 61,451 दावे दर्ज कराए जिनमें 1 मामला नाम समावेशन का रहा। यह संख्या दर्शाती है कि भाजपा ने मतदाता सूची को लेकर अत्यंत सक्रिय रुख अपनाया है। भाजपा पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्षी दल है और वह आगामी चुनावों में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को चुनौती देने के लिए तैयारी कर रही है।

भाजपा के बाद सीपीआई मार्क्सवादी ने 49,436 दावे दर्ज कराए। सीपीआई एम भी पश्चिम बंगाल में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक शक्ति है जो कई दशकों तक राज्य में सत्ता में रही। कांग्रेस ने 18,772 दावे दर्ज कराए। कांग्रेस पश्चिम बंगाल में अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रही है।

बहुजन समाज पार्टी ने केवल 21 दावे दर्ज कराए जबकि आम आदमी पार्टी और नेशनल पीपुल्स पार्टी की ओर से बहुत सीमित या शून्य दावे दर्ज हुए। यह दर्शाता है कि इन दलों की पश्चिम बंगाल में जमीनी उपस्थिति सीमित है।

तृणमूल कांग्रेस ने भी बड़ी संख्या में दावे किए

SIR in West Bengal: CM Mamta Banerjee
SIR in West Bengal: CM Mamta Banerjee

राज्य स्तरीय दलों में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने सबसे अधिक 77,867 दावे दाखिल किए जिनमें 3 मामले नाम जोड़ने से जुड़े रहे। तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी है और उसकी राज्य में मजबूत जमीनी उपस्थिति है। तृणमूल ने भाजपा से भी अधिक दावे दर्ज कराए हैं जो उसकी संगठनात्मक मजबूती को दर्शाता है।

इसी प्रकार ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक की ओर से 1,885 दावे सामने आए जिनमें 1 समावेशन का मामला शामिल है। फॉरवर्ड ब्लॉक वाम मोर्चे का हिस्सा रहा है और पश्चिम बंगाल में इसकी एक सीमित लेकिन समर्पित आधार है।

इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि मतदाता सूची को लेकर सभी प्रमुख राजनीतिक दल सक्रिय हैं और वे आगामी चुनावों के लिए अपनी तैयारियां कर रहे हैं। मतदाता सूची में नाम जोड़ना या हटाना चुनावी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

फॉर्म 6 और फॉर्म 7 के आवेदन

ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन से पहले फॉर्म 6 के तहत 3,31,075 आवेदन नाम जोड़ने के लिए प्राप्त हुए। फॉर्म 6 वह फॉर्म है जिसके माध्यम से नए मतदाता अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वा सकते हैं। यह बड़ी संख्या दर्शाती है कि पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में नए मतदाता पंजीकृत हो रहे हैं।

फॉर्म 7 के जरिए 56,867 आवेदन नाम हटाने के लिए दर्ज किए गए। फॉर्म 7 का उपयोग तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो गई हो, वह किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित हो गया हो, या उसका नाम डुप्लीकेट हो। यह प्रक्रिया मतदाता सूची को साफ और अद्यतन रखने में मदद करती है।

ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद आम मतदाताओं से भी बड़ी संख्या में आवेदन मिले। इस दौरान 2,71,048 फॉर्म 6 या 6ए यानी नाम शामिल करने के आवेदन और 38,694 फॉर्म 7 यानी नाम हटाने के आवेदन प्राप्त हुए। यह दर्शाता है कि आम नागरिक भी मतदाता सूची को लेकर सजग हैं और अपने मताधिकार को सुरक्षित रखने के लिए सक्रिय हैं।

चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण

चुनाव आयोग कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि सभी वैध दावों और आपत्तियों का निपटारा तय प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा। आवश्यक घोषणा के बाद ही अंतिम मतदाता सूची में नाम जोड़े जाएंगे या हटाए जाएंगे। यह स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि प्रक्रिया पारदर्शी और नियमानुसार होगी।

चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि प्रत्येक दावे और आपत्ति की विस्तृत जांच की जाएगी। केवल वैध दावों को ही स्वीकार किया जाएगा। यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न रहे और साथ ही कोई भी अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो, कड़ाई से जांच की जाएगी।

SIR in West Bengal: बंगाल में SIR का राजनीतिक महत्व

यह पूरी प्रक्रिया आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 में होने हैं और सभी राजनीतिक दल इसकी तैयारी में जुटे हुए हैं।

मतदाता सूची को लेकर विवाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। विपक्षी दल विशेष रूप से भाजपा ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं और इसका उद्देश्य विपक्ष के वोट बैंक को कमजोर करना है। तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है और कहा है कि यह एक नियमित प्रक्रिया है।

चुनाव आयोग की भूमिका इस विवाद में तटस्थ और निष्पक्ष रहने की है। आयोग ने आश्वासन दिया है कि सभी दावों और आपत्तियों का निष्पक्ष रूप से निपटारा किया जाएगा।

निष्कर्ष: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया लोकतंत्र की मजबूती के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। दो लाख से अधिक दावे और आपत्तियां दर्शाती हैं कि राजनीतिक दल और आम नागरिक दोनों ही इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह सभी दावों और आपत्तियों का निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से निपटारा करे ताकि एक स्वच्छ और सटीक मतदाता सूची तैयार हो सके जो आगामी चुनावों में उचित और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित कर सके।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles