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Aja Ekadashi 2026: 6 या 7 सितंबर, कब रखें व्रत? जानें सही डेट, शुभ मुहूर्त और बनने वाले खास योग

Aja Ekadashi 2026: हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली अजा एकादशी को लेकर भक्तों के मन में अक्सर एक कन्फ्यूजन बना रहता है, कि आखिर व्रत किस दिन रखा जाए। इस साल भी यही सवाल लोगों के जेहन में घूम रहा है, क्योंकि एकादशी तिथि दो दिनों में बंटी हुई नजर आ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अजा एकादशी का व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति होती है, साथ ही आत्मशुद्धि का भी अवसर मिलता है। लेकिन सही तारीख जाने बिना व्रत रखना कहीं आपकी पूरी पूजा का फल कम न कर दे, इसलिए यह जानना बेहद जरूरी है कि पंचांग के हिसाब से सही डेट क्या है।

इस बार अजा एकादशी पर कई शुभ योगों का भी निर्माण होने जा रहा है, जो इस व्रत को और भी खास बना सकते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं इस व्रत की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और बनने वाले धार्मिक योगों के बारे में।

Aja Ekadashi 2026: अजा एकादशी की सही डेट को लेकर न रहें कन्फ्यूज

हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 सितंबर की रात 7 बजकर 31 मिनट से शुरू होगी। यह तिथि अगले दिन यानी 7 सितंबर को सुबह 5 बजकर 6 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। अब सवाल यह है कि जब तिथि दो दिन में फैली हुई है, तो व्रत किस दिन रखा जाए।

धार्मिक परंपरा में उदयातिथि को खास महत्व दिया जाता है, और इस हिसाब से एकादशी तिथि 7 सितंबर को सूर्योदय के समय मौजूद रहेगी। यही वजह है कि अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर को ही रखा जाना सही माना जाएगा, न कि 6 सितंबर को। जो भक्त पहले से इसकी तैयारी में जुटे हैं, उनके लिए यह जानकारी काफी काम की साबित हो सकती है।

व्रत का पारण कब होगा

व्रत रखने के साथ-साथ उसका पारण भी सही समय पर करना उतना ही जरूरी माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार अजा एकादशी का व्रत रखने वाले भक्त 8 सितंबर को सुबह 6 बजे के बाद ही अपना व्रत खोल सकेंगे। देखने पर लगता है कि यह नियम इसलिए रखा गया है, ताकि व्रत के पूरे फल में किसी तरह की कमी न रह जाए।

जानकार बताते हैं कि पारण के समय का पालन करना भी व्रत की विधि का एक अहम हिस्सा है, इसलिए भक्तों को इस तारीख और समय को अच्छी तरह नोट कर लेना चाहिए।

अजा एकादशी के दिन के शुभ मुहूर्त

अजा एकादशी के दिन पूजा-पाठ और अन्य शुभ कार्यों के लिए कई मुहूर्त बताए गए हैं। सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 52 मिनट से 5 बजकर 38 मिनट तक रहेगा, जिसे दिन की शुरुआत के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है। इसके बाद प्रातः सन्ध्या का समय सुबह 5 बजकर 15 मिनट से 6 बजकर 25 मिनट तक रहेगा।

दोपहर के समय अभिजित मुहूर्त 12 बजकर 12 मिनट से 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगा, जो किसी भी शुभ कार्य के लिए अनुकूल माना जाता है। शाम के समय गोधूलि मुहूर्त 6 बजकर 48 मिनट से 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अमृत काल दोपहर 3 बजकर 59 मिनट से शाम 5 बजकर 29 मिनट तक और सायाह्न सन्ध्या शाम 6 बजकर 48 मिनट से 7 बजकर 58 मिनट तक रहेगी।

इस साल बन रहे हैं कई दुर्लभ योग

इस बार अजा एकादशी सिर्फ एक सामान्य व्रत का दिन नहीं, बल्कि कई खास ग्रह-नक्षत्रों के संयोग वाला दिन भी साबित होने जा रहा है। इस दिन सुबह के समय पुनर्वसु नक्षत्र रहेगा, जबकि रात के समय पुष्य नक्षत्र का संयोग बनेगा। यह दोनों ही नक्षत्र धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

इसके साथ ही चंद्रमा और गुरु की युति से इस दिन गजकेसरी योग का निर्माण होगा, जिसे शुभ फलदायी योगों में गिना जाता है। मामला कुछ इस तरह से बन रहा है कि शुक्र के अपनी स्वराशि में होने से पंचमहापुरुष योगों में से एक मालव्य योग भी इसी दिन बनेगा। इतना ही नहीं, बुध ग्रह के अपनी उच्च राशि में स्थित होने से भद्र योग का निर्माण भी इसी तिथि पर होगा।

Aja Ekadashi 2026: व्रत और उपायों से मिल सकते हैं शुभ फल

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब एक साथ इतने सारे शुभ योग बन रहे हों, तो उस दिन किए गए व्रत और पूजा-पाठ का महत्व और भी बढ़ जाता है। ऐसे में जो भक्त अजा एकादशी का व्रत रखने की सोच रहे हैं, उनके लिए यह दिन विशेष फलदायी माना जा रहा है।

इसके अलावा इस दिन तुलसी से जुड़े धार्मिक उपाय करने से भी भक्तों को शुभ परिणाम मिलने की मान्यता है। जो लोग किसी वजह से व्रत या विशेष उपाय नहीं कर पाते, उनके लिए भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना भी एक सरल और असरदार विकल्प बताया गया है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो इस बार अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर को रखा जाना ही शास्त्र सम्मत माना जाएगा, जबकि पारण 8 सितंबर की सुबह किया जाएगा। इस दिन बनने वाले गजकेसरी, मालव्य और भद्र जैसे शुभ योग इसे और भी खास बना रहे हैं। जो भक्त सच्ची श्रद्धा और सही विधि-विधान से इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु व मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं, उन्हें मनचाहे फल मिलने की मान्यता है। हालांकि यह जानकारी पूरी तरह धार्मिक आस्था और परंपराओं पर आधारित है, इसलिए व्रत से जुड़े किसी भी नियम का पालन करने से पहले स्थानीय पंडित या ज्योतिष से भी सलाह ली जा सकती है।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।)

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Author: Sanjna Gupta

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