डेस्क – एक 60 साल की भारतीय मूल की महिला को अमेरिका में ग्रीन कार्ड इंटरव्यू के दौरान अचानक गिरफ्तार कर लिया गया। महिला का नाम ममता शर्मा (नाम बदल दिया गया है) है। वे दिल्ली से अमेरिका आई थीं और पिछले 15 सालों से यहां अपनी बेटी के साथ रह रही थीं। इस घटना ने पूरे भारतीय समुदाय में हड़कंप मचा दिया है।
कैसे हुई गिरफ्तारी?
ममता शर्मा ने 2025 के शुरू में ग्रीन कार्ड (परमानेंट रेजिडेंसी) के लिए आवेदन किया था। पिछले महीने उन्हें इंटरव्यू के लिए USCIS (यूनाइटेड स्टेट्स सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज) के न्यूयॉर्क ऑफिस में बुलाया गया। इंटरव्यू के दौरान अधिकारी ने अचानक पूछा, “क्या आपने कभी कोई अपराध किया है?” ममता ने ईमानदारी से कहा कि 30 साल पहले भारत में एक छोटा-सा मामला था, जिसमें वे शामिल थीं।यह मामला 1995 का था। उस समय ममता ने एक पड़ोसी के साथ झगड़े में हाथापाई कर दी थी। मामला कोर्ट में पहुंचा, लेकिन बाद में दोनों पक्षों में समझौता हो गया और केस खारिज हो गया। ममता ने सोचा कि यह पुराना मामला अब किसी काम का नहीं है। लेकिन अमेरिकी अधिकारी ने इसे “क्राइम ऑफ मोरल टर्पिट्यूड” (नैतिकता के खिलाफ अपराध) मान लिया और तुरंत उनकी इमिग्रेशन स्टेटस रद्द कर दिया।इंटरव्यू खत्म होते ही दो ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) अधिकारी वहां पहुंचे और ममता को हथकड़ी लगाकर ले गए। उनकी बेटी और परिवार वाले बाहर इंतजार कर रहे थे। उन्हें बताया गया कि उनकी मां को डिटेंशन सेंटर भेजा जा रहा है।
परिवार का दर्द और सदमा
ममता की 35 साल की बेटी रिया ने रोते हुए बताया, “मां को कभी किसी ने जेल नहीं देखा। वे कभी किसी से झगड़ा नहीं करतीं। यह पुराना मामला इतने साल बाद कैसे उनके ग्रीन कार्ड में आ गया? हमें लगता था कि सब ठीक हो जाएगा, लेकिन अब वे जेल में हैं।”परिवार ने तुरंत वकील से संपर्क किया। वकील ने बताया कि अमेरिका में 1996 के बाद “इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट” के तहत कुछ पुराने अपराध भी डिपोर्टेशन का कारण बन सकते हैं, भले ही वे छोटे हों और समझौता हो चुका हो।
कानूनी पक्ष क्या कहता है?
अमेरिकी कानून में “क्राइम इन्वॉल्विंग मोरल टर्पिट्यूड” (CIMT) जैसे अपराधों पर सख्ती है। अगर कोई व्यक्ति ऐसे अपराध का दोषी पाया जाता है, तो उसका ग्रीन कार्ड या वीजा रद्द हो सकता है, भले ही वह अपराध कितने साल पुराना हो।हालांकि, कई वकील मानते हैं कि इस मामले में ममता को “वेवर” (माफी) मिल सकती है, क्योंकि अपराध छोटा था, समझौता हो चुका था और पिछले 30 सालों में उनका कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है। लेकिन यह प्रक्रिया लंबी और महंगी होती है।
भारतीय समुदाय में आक्रोश
इस घटना के बाद न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी के भारतीय समुदाय में गुस्सा है। कई संगठनों ने सोशल मीडिया पर #JusticeForMamta जैसे हैशटैग चलाए हैं। एक भारतीय एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा, “हमारे बुजुर्गों को इस तरह अपमानित करना ठीक नहीं है। अमेरिका ने हमें अपने परिवार के साथ रहने का सपना दिया था, लेकिन अब हम डर रहे हैं।”
क्या हो सकता है आगे?
वकीलों का कहना है कि ममता को 6 महीने से 2 साल तक डिटेंशन सेंटर में रहना पड़ सकता है। अगर वेवर मिल जाता है तो वे वापस आ सकती हैं, वरना उन्हें भारत भेज दिया जाएगा। अभी वे न्यू जर्सी के एक ICE डिटेंशन सेंटर में हैं। परिवार हर हफ्ते उनसे मिलने जाता है।
निष्कर्ष:
यह घटना सिर्फ ममता शर्मा की नहीं, बल्कि लाखों भारतीय प्रवासियों के लिए एक चेतावनी है। पुराने छोटे-छोटे मामले भी आज अमेरिका में ग्रीन कार्ड या नागरिकता के रास्ते में बाधा बन सकते हैं। प्रवासियों को अपने पुराने रिकॉर्ड्स की पूरी जानकारी रखनी चाहिए और इंटरव्यू से पहले अच्छे इमिग्रेशन वकील से सलाह लेनी चाहिए।अमेरिका की इमिग्रेशन पॉलिसी बहुत सख्त है, लेकिन इसमें मानवीयता की कमी दिखती है। एक 60 साल की मां, जो अपनी बेटी के साथ शांतिपूर्ण जीवन जी रही थी, आज जेल में है। यह सिर्फ कानून का मामला नहीं, बल्कि इंसानियत का सवाल भी है।



