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Autoimmune Disease Symptoms: सर्दियों में हाथ-पैर सुन्न होना, सिर्फ ठंड या ऑटोइम्यून बीमारी का संकेत?

Autoimmune Disease Symptoms: सर्दियों में हाथ-पैर सुन्न होना आम बात लगती है। ज्यादातर लोग इसे ठंड का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि बार-बार सुन्न होना सामान्य नहीं है। यह विटामिन की कमी, डायबिटीज, थायरॉइड या ऑटोइम्यून बीमारी का संकेत हो सकता है। अगर सुन्न होने के साथ झुनझुनी, जलन या कमजोरी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं। समय पर पता चलने से बड़ी बीमारी रोकी जा सकती है।

सुन्न होने के मुख्य कारण क्या हैं?

सर्दियों में ठंड से ब्लड सर्कुलेशन कम हो जाता है, जिससे हाथ-पैर सुन्न लगते हैं। लेकिन अगर गर्मी में भी ऐसा होता है तो ये कारण हो सकते हैं:

  • विटामिन B12 की कमी: नर्वस सिस्टम कमजोर होता है। शाकाहारी लोगों में ज्यादा होती है।
  • डायबिटीज: नसें खराब होने से सुन्नपन और झुनझुनी होती है।
  • थायरॉइड: हाइपोथायरॉइडिज्म में ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है।
  • ऑटोइम्यून बीमारी: जैसे रूमेटाइड आर्थराइटिस या ल्यूपस। शरीर की इम्यून सिस्टम खुद की नसों पर हमला करती है।
  • नस दबना: लंबे समय एक ही पोजीशन में बैठने से नर्व्स प्रेशर में आती हैं।

डॉक्टर कहते हैं कि सर्दियों में सुन्न होना अगर कुछ मिनट में ठीक हो जाए तो चिंता न करें। लेकिन बार-बार हो या रात में नींद खुल जाए तो जांच जरूरी है।

ऑटोइम्यून बीमारी के लक्षण क्या हैं?

अगर सुन्न होने के साथ ये लक्षण हों तो ऑटोइम्यून बीमारी का शक हो सकता है:

  • जोड़ों में दर्द और सूजन।
  • थकान और कमजोरी।
  • बाल झड़ना या त्वचा पर चकत्ते।
  • बार-बार बुखार आना।
  • हाथ-पैरों में जलन या सुई चुभने जैसा दर्द।

ऐसे में ब्लड टेस्ट (ANA टेस्ट) कराएं। समय पर इलाज से बीमारी कंट्रोल हो जाती है।

Autoimmune Disease Symptoms: बचाव और घरेलू उपाय

  • गर्म कपड़े पहनें: हाथ-पैर ढककर रखें।
  • व्यायाम करें: रोज सुबह हल्की एक्सरसाइज या योग करें। ब्लड सर्कुलेशन अच्छा रहेगा।
  • पौष्टिक खाना: विटामिन B12, D और आयरन वाली चीजें खाएं। अंडा, दूध, पालक, बादाम फायदेमंद।
  • मालिश: सरसों या तिल के तेल से हाथ-पैर की मालिश करें।
  • पानी पिएं: डिहाइड्रेशन से भी सुन्नपन होता है।

डॉक्टरों की सलाह है कि सुन्न होना नजरअंदाज न करें। शुरुआती लक्षणों पर जांच कराएं। सर्दियों में सेहत का ध्यान रखें। गरम चाय, सूप पिएं और सक्रिय रहें। अगर लक्षण ज्यादा हों तो न्यूरोलॉजिस्ट या रूमेटोलॉजिस्ट से मिलें। समय पर इलाज से बड़ी बीमारी रोकी जा सकती है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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