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रोज नाश्ते में ब्रेड खा रहे हैं? सावधान! ये 5 बड़े नुकसान कर सकते हैं आपकी सेहत बर्बाद

वाराणसी – आजकल ज्यादातर लोगों का नाश्ता ब्रेड से शुरू होता है। टोस्ट लगाओ, जाम या बटर लगाओ और चाय के साथ खाओ – आसान और जल्दी तैयार। खासकर सफेद ब्रेड (मैदा वाली) बहुत लोकप्रिय है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोजाना ब्रेड खाना, खासकर सफेद ब्रेड, आपकी सेहत को चुपके से नुकसान पहुंचा सकता है? कई अध्ययनों में पाया गया है कि मैदे से बनी ब्रेड में फाइबर और पोषक तत्व कम होते हैं, जिससे कई समस्याएं हो सकती हैं। इस लेख में हम बताएंगे ब्रेड खाने के 5 बड़े नुकसान।

ब्रेड क्या है और क्यों है इतनी आम?

ब्रेड मुख्य रूप से गेहूं के आटे से बनती है। बाजार में दो तरह की ब्रेड मिलती है – सफेद ब्रेड (मैदा से बनी) और ब्राउन ब्रेड (होल व्हीट से बनी)। सफेद ब्रेड ज्यादा सॉफ्ट और स्वादिष्ट लगती है, इसलिए लोग इसे ज्यादा पसंद करते हैं। लेकिन सफेद ब्रेड बनाने में गेहूं को इतना रिफाइंड किया जाता है कि उसमें से फाइबर, विटामिन और मिनरल्स निकल जाते हैं। नतीजा? सिर्फ खाली कैलोरी बचती हैं। रोज नाश्ते में ऐसी ब्रेड खाने से शरीर को फायदा कम और नुकसान ज्यादा होता है।

ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है, डायबिटीज का खतरा

सफेद ब्रेड में ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत ज्यादा होता है। मतलब, इसे खाने के बाद ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ता है और फिर जल्दी गिरता है। इससे इंसुलिन रेसिस्टेंस हो सकता है, जो टाइप-2 डायबिटीज का कारण बनता है। कई रिसर्च में पाया गया कि रिफाइंड फ्लोर (मैदा) वाली चीजें रोज खाने से डायबिटीज का रिस्क बढ़ जाता है। अगर आपको पहले से शुगर की समस्या है, तो ब्रेड से दूर रहें। ब्राउन ब्रेड बेहतर है क्योंकि उसमें फाइबर ज्यादा होता है, जो शुगर को धीरे रिलीज करता है।

वजन बढ़ने का बड़ा कारण

ब्रेड में कैलोरी तो ज्यादा होती है, लेकिन पेट भरने की ताकत कम। फाइबर न होने से जल्दी भूख लग जाती है और आप ज्यादा खाने लगते हैं। नतीजा – ओवरईटिंग और वजन बढ़ना। अध्ययनों में देखा गया है कि रिफाइंड कार्ब्स वाली डाइट से पेट की चर्बी तेजी से बढ़ती है। खासकर नाश्ते में ब्रेड खाने से दिन भर क्रेविंग्स रहती हैं। अगर वजन कंट्रोल करना चाहते हैं, तो मैदा वाली ब्रेड छोड़ दें। इसके बजाय होल ग्रेन ऑप्शन चुनें।

पाचन तंत्र हो जाता है कमजोरImage result for ब्रेड का नाश्ता: hanikark

मैदा में फाइबर नहीं होता, इसलिए यह आसानी से पचता नहीं। रोज ब्रेड खाने से कब्ज, ब्लोटिंग और पेट फूलना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। फाइबर की कमी से आंतों की सेहत खराब होती है। लंबे समय में यह डाइजेस्टिव इश्यूज का कारण बनता है। ब्राउन ब्रेड में फाइबर ज्यादा होता है, जो पाचन सुधारता है और कब्ज दूर रखता है। अगर आपको पहले से पेट की दिक्कत है, तो सफेद ब्रेड बिल्कुल न खाएं।

हृदय रोग और कोलेस्ट्रॉल का खतरा बढ़ता है

रिफाइंड फ्लोर वाली ब्रेड से बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ता है और गुड कोलेस्ट्रॉल कम होता है। इससे हार्ट डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक का रिस्क बढ़ जाता है। कुछ स्टडीज में पाया गया कि मैदा ज्यादा खाने से सूजन (इन्फ्लेमेशन) बढ़ती है, जो दिल की बीमारियों का कारण बनती है। रोज ब्रेड खाने से ट्राइग्लिसराइड्स भी बढ़ सकते हैं। हेल्दी हार्ट के लिए होल व्हीट या मल्टीग्रेन ब्रेड चुनें।

पोषक तत्वों की कमी और कमजोरी

सफेद ब्रेड में विटामिन, मिनरल्स और फाइबर बहुत कम होते हैं। रोज इसे खाने से शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिलता। इससे थकान, कमजोरी और इम्यूनिटी कम हो सकती है। मैदा को प्रोसेस करने में कई केमिकल्स इस्तेमाल होते हैं, जो लंबे समय में सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं। ब्राउन ब्रेड में ये पोषक तत्व ज्यादा होते हैं, इसलिए वह बेहतर विकल्प है।

क्या ब्राउन ब्रेड भी पूरी तरह सुरक्षित है?

बाजार में कई ब्राउन ब्रेड सिर्फ कलर की गई सफेद ब्रेड होती हैं। असली होल व्हीट ब्रेड चुनें, जिसमें 100% होल ग्रेन लिखा हो। लेबल जरूर पढ़ें।

क्या करें बेहतर स्वास्थ्य के लिए?

ब्रेड की जगह ओट्स, दलिया, पोहा, उपमा या बेसन चीला ट्राई करें।

. अगर ब्रेड खानी ही है, तो होल व्हीट या मल्टीग्रेन चुनें।

. ब्रेड को प्रोटीन (अंडा, पनीर) और सब्जियों के साथ खाएं।

. हफ्ते में 2-3 बार से ज्यादा ब्रेड न खाएं।

निष्कर्ष :

नाश्ते में रोज ब्रेड खाना आसान लगता है, लेकिन खासकर सफेद ब्रेड से सेहत को लंबे समय में बड़ा नुकसान हो सकता है। ब्लड शुगर बढ़ना, वजन बढ़ना, पाचन समस्या, हार्ट रिस्क और पोषण की कमी – ये 5 बड़े नुकसान आपको सावधान कर रहे हैं। थोड़ा बदलाव करके होल ग्रेन ऑप्शन चुनें या ट्रेडिशनल भारतीय नाश्ता अपनाएं। छोटा बदलाव बड़ा फायदा देगा। अपनी सेहत का ख्याल रखें और संतुलित डाइट लें। अगर कोई बीमारी है, तो डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट से सलाह जरूर लें।

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

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