Bihar CM Oath: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने सबको चौंका दिया है। एनडीए ने 200 से ज्यादा सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया है। अब जीत के जश्न के बाद बारी है सरकार गठन की। पटना के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अमर उजाला की ताज़ा रिपोर्ट और सूत्रों के मुताबिक, नई सरकार के शपथ ग्रहण की तारीख लगभग तय हो गई है। 19 नवंबर को एनडीए विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें नेता का चुनाव औपचारिक रूप से किया जाएगा। इसके अगले ही दिन, यानी 20 नवंबर को नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होने की संभावना है।
हालांकि नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री बनना तय माना जा रहा है, लेकिन इस बार बीजेपी के पास जेडीयू से ज्यादा सीटें हैं। ऐसे में मंत्रिमंडल के बंटवारे, स्पीकर पद और डिप्टी सीएम को लेकर नए समीकरण बन रहे हैं। आइए जानते हैं कि अगले 48 घंटों में बिहार की राजनीति में क्या कुछ खास होने वाला है।
Bihar CM Oath: 19 नवंबर को होगा नेता का चुनाव
चुनाव आयोग द्वारा 14 नवंबर को नतीजे घोषित किए जाने के बाद से ही बैठकों का दौर जारी है। 15 नवंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कैबिनेट की बैठक कर विधानसभा भंग करने की सिफारिश राज्यपाल से कर दी थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया। अब 19 नवंबर का दिन बेहद अहम है।
इस दिन पटना में एनडीए के सभी नवनिर्वाचित विधायकों की संयुक्त बैठक होगी। इस बैठक में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और हम (HAM) के विधायक शामिल होंगे। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में औपचारिक रूप से नीतीश कुमार को एनडीए विधायक दल का नेता चुना जाएगा। इसके बाद एनडीए का एक प्रतिनिधिमंडल राजभवन जाकर राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के सामने सरकार बनाने का दावा पेश करेगा।
20 नवंबर को भव्य शपथ ग्रहण समारोह
राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि शपथ ग्रहण समारोह 20 नवंबर को आयोजित किया जा सकता है। यह समारोह ऐतिहासिक गांधी मैदान या राजभवन के राजेंद्र मंडप में हो सकता है। इस भव्य आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत एनडीए शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की उम्मीद है। प्रशासन ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं क्योंकि इस बार जनादेश ऐतिहासिक है।
बीजेपी का स्पीकर पद पर दावा
इस बार के चुनाव परिणामों ने बीजेपी को बड़े भाई की भूमिका में ला खड़ा किया है। बीजेपी ने 89 सीटें जीती हैं, जबकि नीतीश कुमार की जेडीयू को 85 सीटें मिली हैं। चिराग पासवान की पार्टी ने भी 22 सीटों पर जीत दर्ज की है। आंकड़ों के इस खेल में बीजेपी का पलड़ा भारी है।
सूत्रों के हवाले से खबर है कि बीजेपी इस बार विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) का पद अपने पास रखना चाहती है। पिछले कार्यकाल में भी यह पद बीजेपी के पास था, लेकिन बीच में हुए राजनीतिक उलटफेर के कारण समीकरण बदल गए थे। बीजेपी का मानना है कि सदन को सुचारू रूप से चलाने और पार्टी के एजेंडे को मजबूती देने के लिए स्पीकर का पद उनके पास होना जरूरी है। हालांकि, जेडीयू की तरफ से अभी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि नीतीश कुमार इस मांग को स्वीकार कर सकते हैं।
कौन बनेगा नीतीश का सारथी?
सबसे बड़ा सवाल डिप्टी सीएम के पद को लेकर है। क्या बिहार में फिर से दो डिप्टी सीएम होंगे? बीजेपी के अंदरखाने से जो खबरें आ रही हैं, उनके मुताबिक पार्टी इस बार भी दो डिप्टी सीएम का फॉर्मूला अपना सकती है।
सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा का नाम रेस में सबसे आगे चल रहा है। हालांकि, कुछ नए नामों पर भी चर्चा हो रही है। बीजेपी किसी अति-पिछड़ा वर्ग या दलित चेहरे को भी आगे लाकर चौंका सकती है। वहीं, कुछ जानकारों का कहना है कि इस बार चिराग पासवान की पार्टी का प्रदर्शन शानदार रहा है, इसलिए एलजेपी (आर) भी डिप्टी सीएम पद के लिए दावेदारी पेश कर सकती है। लेकिन बीजेपी अपने कोटे से ही डिप्टी सीएम बनाने के पक्ष में दिख रही है।
किसे मिलेंगे कितने मंत्री?
एनडीए की इस नई सरकार में मंत्रियों की संख्या और विभागों का बंटवारा एक टेढ़ी खीर साबित हो सकता है। 2020 के फॉर्मूले के तहत बीजेपी और जेडीयू के बीच मंत्रियों की संख्या लगभग बराबर थी। लेकिन इस बार बीजेपी की सीटें ज्यादा हैं, इसलिए वह कैबिनेट में बड़ी हिस्सेदारी की मांग कर सकती है।
चर्चा है कि गृह विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग, जो पारंपरिक रूप से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास रहते हैं, उन पर भी बीजेपी की नजर हो सकती है। हालांकि, नीतीश कुमार इन अहम विभागों को छोड़ने के लिए शायद ही राजी हों। इसके अलावा चिराग पासवान और जीतन राम मांझी की पार्टी को भी उनके कोटे के हिसाब से मंत्री पद दिए जाएंगे।
दिल्ली से आएंगे पर्यवेक्षक
बीजेपी आलाकमान ने बिहार में सरकार गठन की प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। ये पर्यवेक्षक 18 या 19 नवंबर को पटना पहुंचेंगे और विधायकों के साथ बैठक करेंगे। विधायक दल के नेता के चुनाव और डिप्टी सीएम के नामों पर अंतिम मुहर इन्हीं पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में लगेगी।
बिहार के लिए नई सुबह
अगले दो दिन बिहार की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। जनता ने एनडीए को पूर्ण बहुमत देकर स्थिरता और विकास के लिए वोट किया है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनने वाली यह नई सरकार जनता की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है, यह तो वक्त बताएगा। लेकिन फिलहाल सभी की निगाहें 19 नवंबर की बैठक और 20 नवंबर के शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हैं। बिहार एक बार फिर ‘डबल इंजन’ की सरकार के साथ विकास की रफ्तार पकड़ने को तैयार है।



