Bihar Politics: बिहार की राजधानी पटना में एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार को लेकर सियासी हलचल मच गई है। शहर की सड़कों और जदयू कार्यालय के आसपास पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें निशांत से अपील की गई है कि वे जदयू में शामिल होकर पार्टी और युवाओं का भविष्य संवारें। पोस्टरों में लिखा है – “चाचा जी के हाथों में सुरक्षित अपना बिहार। अब पार्टी के अगले जेनरेशन का भविष्य संवारें निशांत कुमार।” ये पोस्टर छात्र जदयू के प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्णा पटेल ने लगवाए हैं। पोस्टरों में नववर्ष और मकर संक्रांति की शुभकामनाएं भी दी गई हैं।
यह घटना कोई नई नहीं है। कुछ दिनों पहले ही जदयू कार्यकर्ताओं ने निशांत को राजनीति में लाने की मांग को लेकर पटना के गर्दनीबाग में 12 घंटे की भूख हड़ताल की थी। अब पोस्टरों से यह मांग और तेज हो गई है। जदयू कार्यकर्ता मानते हैं कि निशांत पढ़े-लिखे हैं और पार्टी की कमान संभाल सकते हैं। वे उन्हें भविष्य का मुख्यमंत्री तक मान रहे हैं।
निशांत कुमार कौन हैं?
निशांत कुमार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी दिवंगत पत्नी मंजू सिन्हा के इकलौते बेटे हैं। उनका जन्म 20 जुलाई 1975 को हुआ था। निशांत ने पटना के सेंट केरन्स स्कूल से शुरुआती पढ़ाई की और फिर मसूरी के मानव भारती इंडिया इंटरनेशनल स्कूल से आगे की शिक्षा पूरी की। वे इंजीनियर हैं और बिट मेसरा से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की डिग्री ली है। निशांत हमेशा राजनीति से दूर रहे हैं। वे कभी सार्वजनिक कार्यक्रमों में कम ही नजर आते हैं। नीतीश कुमार भी कई बार कह चुके हैं कि वे वंशवाद के खिलाफ हैं और अपने बेटे को राजनीति में नहीं लाना चाहते।
लेकिन जदयू के जमीनी कार्यकर्ता लंबे समय से निशांत की एंट्री की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि नीतीश जी के बाद पार्टी को नई पीढ़ी के नेतृत्व की जरूरत है। निशांत पढ़े-लिखे और समझदार हैं, इसलिए वे पार्टी को नई दिशा दे सकते हैं।
पोस्टरों में क्या लिखा है?
पोस्टरों में नीतीश कुमार को “चाचा जी” कहा गया है, जो उनके कार्यकर्ताओं और समर्थकों में लोकप्रिय संबोधन है। मुख्य संदेश है
- “चाचा जी के हाथों में सुरक्षित अपना बिहार।”
- “अब पार्टी के अगले जेनरेशन का भविष्य संवारें निशांत कुमार।”
यह पोस्टर छात्र जदयू के प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्णा पटेल ने लगवाए हैं। पोस्टरों में नववर्ष 2026 और मकर संक्रांति की शुभकामनाएं भी हैं, जो दिखाता है कि यह अभियान नए साल के साथ जोड़ा गया है।
इससे पहले क्या हुआ था?
यह पहली बार नहीं है जब निशांत के लिए ऐसी मांग उठी है।
- कुछ दिनों पहले जदयू कार्यकर्ताओं ने गर्दनीबाग में 12 घंटे की भूख हड़ताल की थी।
- जदयू नेता मुकुंद कुमार ने कहा था, “हम नीतीश जी से मांग करते हैं कि निशांत को पार्टी में शामिल करें। वे पढ़े-लिखे हैं और पार्टी की कमान संभाल सकते हैं।”
- अजय कुमार सिंह ने कहा, “हम निशांत के पक्ष में हस्ताक्षर अभियान चला रहे हैं। वे भविष्य में मुख्यमंत्री बन सकते हैं।”
- पहले भी कई बार पटना में जदयू दफ्तर के बाहर ऐसे पोस्टर लग चुके हैं। जैसे “विकास पुरुष का बेटा बिहार का भविष्य” या “बिहार करे पुकार, आइए निशांत कुमार”।
ये सभी घटनाएं दिखाती हैं कि जदयू के एक धड़े में निशांत को लाने की इच्छा मजबूत है।
नीतीश कुमार का रुख क्या है?
नीतीश कुमार हमेशा वंशवाद के खिलाफ बोलते रहे हैं। वे लालू प्रसाद यादव और अन्य नेताओं की परिवारवाद की राजनीति की आलोचना करते हैं। नीतीश ने कई बार कहा है कि उनके बेटे को राजनीति में नहीं लाएंगे। निशांत भी सार्वजनिक रूप से राजनीति से दूर रहते हैं। वे कभी चुनाव प्रचार में भी कम नजर आते हैं।
लेकिन कार्यकर्ताओं की यह मांग नीतीश के लिए दबाव बना सकती है। खासकर जब 2025 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। जदयू में उत्तराधिकारी का सवाल भी उठ रहा है। नीतीश की उम्र 74 साल हो चुकी है। पार्टी को नई पीढ़ी के नेता की जरूरत महसूस हो रही है।
राजनीतिक असर क्या होगा?
यह घटना बिहार की राजनीति में कई सवाल खड़े कर रही है
- अगर निशांत आए, तो नीतीश का वंशवाद विरोधी स्टैंड कमजोर पड़ेगा।
- विपक्ष जैसे राजद और कांग्रेस इसे मुद्दा बना सकते हैं।
- जदयू के अंदर एकता पर असर पड़ सकता है।
- एनडीए सहयोगी भाजपा का रुख क्या होगा?
विपक्षी नेता पहले ही कह चुके हैं कि नीतीश अब परिवारवाद की ओर जा रहे हैं। लेकिन जदयू नेता कहते हैं कि कार्यकर्ताओं की भावना है, अंतिम फैसला नीतीश और निशांत का होगा।
कार्यकर्ता क्यों चाहते हैं निशांत को?
जदयू कार्यकर्ताओं का मानना है
- निशांत पढ़े-लिखे और समझदार हैं।
- नीतीश की विरासत को आगे बढ़ा सकते हैं।
- युवाओं को प्रेरणा देंगे।
- पार्टी में नई ऊर्जा आएगी।
- भविष्य में मजबूत नेतृत्व मिलेगा।
वे हस्ताक्षर अभियान और प्रदर्शन कर रहे हैं।
Bihar Politics: निशांत की एंट्री की अटकलें तेज
पटना में निशांत कुमार के लिए लगे पोस्टरों और पहले की भूख हड़ताल से साफ है कि जदयू कार्यकर्ता उन्हें राजनीति में देखना चाहते हैं। वे निशांत को पार्टी का भविष्य और अगला नेता मान रहे हैं। लेकिन नीतीश कुमार और निशांत ने अभी कोई बयान नहीं दिया है।
यह मांग 2025 चुनाव से पहले और तेज हो सकती है। बिहार की राजनीति में उत्तराधिकार का सवाल बड़ा मुद्दा बन सकता है। देखना होगा कि नीतीश इस दबाव को कैसे हैंडल करते हैं।



