SIR in Jharkhand: झारखंड की राजधानी रांची में मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाने का काम जोर-शोर से चल रहा है। प्रेसिर (PRE-SIR) प्रक्रिया के तहत दस्तावेज जमा करने का काम शुरू हो गया है। यह काम 2003 की पुरानी मतदाता सूची से मौजूदा सूची की तुलना करके किया जा रहा है। जिन मतदाताओं का नाम या उनके परिवार का नाम 2003 की सूची में नहीं मिल रहा, उन्हें दस्तावेज जमा करने को कहा जा रहा है। अगर दस्तावेज नहीं दिए गए, तो नाम मतदाता सूची से हट सकता है।
यह प्रक्रिया पूरे झारखंड में चल रही है, लेकिन रांची में विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिला प्रशासन और निर्वाचन विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। लोगों को घर-घर जाकर नोटिस दिए जा रहे हैं। यह खबर हर मतदाता के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि अपना वोट का हक बचाने के लिए समय पर दस्तावेज जमा करना जरूरी है।
प्रेसिर क्या है और क्यों हो रहा है?
प्रेसिर का मतलब प्री-स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन है। यह विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की तैयारी का हिस्सा है। एसआईआर फरवरी 2026 में होगा। इसका मकसद मतदाता सूची को पूरी तरह साफ करना है। मृत लोगों के नाम हटाना, डुप्लीकेट नाम निकालना और फर्जी प्रवेश रोकना।
अभी प्रेसिर में 2003 की मतदाता सूची (झारखंड राज्य बनने के बाद की पहली बड़ी सूची) से मौजूदा मतदाताओं को जोड़ा जा रहा है। इसे पैरेंटल मैपिंग कहते हैं। मतलब, आपके पिता या दादा का नाम 2003 में था, तो उससे आपका नाम लिंक किया जाएगा। इससे साबित होता है कि आप पुराने निवासी हैं।
रांची में हजारों मतदाता ऐसे हैं जिनकी मैपिंग नहीं हो पाई। इन्हें नोटिस भेजे जा रहे हैं। दस्तावेज जमा करने का काम शुरू हो गया है।
दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया क्या है?
प्रक्रिया बहुत आसान है
- अगर आपको नोटिस मिला है, तो घबराएं नहीं।
- बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) आपके घर आएगा या आप स्कूल/पंचायत में कैंप में जा सकते हैं।
- जरूरी दस्तावेज जमा करें।
- दस्तावेज की जांच होगी।
- अगर सब ठीक रहा, तो नाम सुरक्षित रहेगा।
रांची में कई जगहों पर कैंप लगाए गए हैं। जिला निर्वाचन कार्यालय से पूरी लिस्ट ली जा सकती है।
कौन से दस्तावेज देने होंगे?
मतदाताओं को ये दस्तावेज तैयार रखने चाहिए
- जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल का सर्टिफिकेट।
- आधार कार्ड (सहायक सबूत के रूप में)।
- राशन कार्ड, बिजली बिल या अन्य पता प्रमाण।
- परिवार के पुराने मतदाता का प्रमाण (खासकर 2003 सूची से)।
- अगर 2003 की सूची में परिवार का नाम है, तो उसकी कॉपी।
2003 की मतदाता सूची मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट https://ceojharkhand.nic.in पर उपलब्ध है। अपना नाम सर्च कर सकते हैं।
अगर दस्तावेज नहीं हैं तो क्या करें?
- घबराएं नहीं। बीएलओ से बात करें।
- वैकल्पिक सबूत जैसे पंचायत प्रमाण पत्र या अन्य कागजात दे सकते हैं।
- समय पर जमा करें, वरना नाम कट सकता है।
रांची में कितने मतदाता प्रभावित?
रांची जिले में हजारों मतदाता ऐसे हैं जिनकी पैरेंटल मैपिंग नहीं हुई। पूरे झारखंड में यह संख्या लाखों में है। जिला प्रशासन ने बीएलओ को सक्रिय किया है। घर-घर जाकर नोटिस दिए जा रहे हैं। स्कूलों और पंचायतों में कैंप लगाए गए हैं।
जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि प्रक्रिया पारदर्शी है। असली मतदाताओं को कोई दिक्कत नहीं होगी। सिर्फ फर्जी या गलत नाम हटाए जाएंगे।
फर्जी दस्तावेज पर क्या होगा?
चुनाव आयोग ने सख्त निर्देश दिए हैं। अगर कोई फर्जी दस्तावेज देता है, तो नाम कटने के साथ कानूनी कार्रवाई होगी। इसलिए सच्चे और सही कागजात ही जमा करें।
इस प्रक्रिया से क्या फायदे होंगे?
प्रेसिर और एसआईआर से कई फायदे हैं
- मतदाता सूची साफ होगी।
- फर्जी वोटिंग रुकेगी।
- असली मतदाताओं को वोट डालने में आसानी।
- नए युवा मतदाता जुड़ेंगे।
- चुनाव निष्पक्ष होंगे।
रांची जैसे बड़े शहर में मतदाता संख्या ज्यादा है। सूची साफ होने से चुनाव व्यवस्था बेहतर होगी।
मतदाताओं को क्या करना चाहिए?
- अगर नोटिस मिले, तो समय पर दस्तावेज जमा करें।
- अपना नाम वेबसाइट पर चेक करें।
- बीएलओ या जिला निर्वाचन कार्यालय से संपर्क करें।
- हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें।
अगर नाम कट गया, तो बाद में आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। लेकिन शुरुआत में ही दस्तावेज देना बेहतर है।
SIR in Jharkhand: अपना वोट का हक सुरक्षित रखें
रांची में प्रेसिर के तहत दस्तावेज जमा करने का काम शुरू हो गया है। 2003 की सूची से मैपिंग नहीं होने वालों को दस्तावेज देने हैं। यह प्रक्रिया मतदाता सूची को साफ करने के लिए है। फर्जी नाम हटेंगे और असली मतदाता सुरक्षित रहेंगे।
हर मतदाता जागरूक रहे और समय पर दस्तावेज जमा करे। अपना वोट का अधिकार बचाएं। लोकतंत्र मजबूत बनाने में यह छोटा कदम बड़ा योगदान देगा।



