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CAG रिपोर्ट का खुलासा: हावड़ा समेत 458 रेलवे स्टेशन सुविधाविहीन, पीने के पानी में मिला खतरनाक E-Coli बैक्टीरिया

Kolkata/New Delhi: भारतीय रेलवे के यात्रियों के लिए एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की ताजा रिपोर्ट में देश के रेलवे स्टेशनों की बदहाली की पोल खोल दी है।

रिपोर्ट के अनुसार देश के 512 गैर-उपनगरीय स्टेशनों में से 458 स्टेशन यानी 89% से अधिक स्टेशन न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं से वंचित हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई स्टेशनों पर पीने के पानी में E-Coli जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं जो गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

यह रिपोर्ट “भारतीय रेलवे के गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाएं और स्वच्छता” शीर्षक से 12 अगस्त को संसद में पेश की गई। CAG ने 2019-20 से 2023-24 तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया है।

मूत्रालय, शौचालय, कूड़ेदान और इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन सूचना बोर्ड जैसी बुनियादी सुविधाएं भी गायब

हावड़ा-सियालदह जैसे बड़े स्टेशन भी बदहाल

रिपोर्ट में देश के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण NSG-1 श्रेणी के स्टेशनों की स्थिति पर भी सवाल उठाए गए हैं। इनमें मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, कोलकाता का हावड़ा और सियालदह, दिल्ली का नई दिल्ली और मुंबई सेंट्रल शामिल हैं।

CAG के अनुसार इन स्टेशनों पर भी यात्रियों के लिए बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। मूत्रालय, शौचालय, कूड़ेदान और इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन सूचना बोर्ड जैसी बुनियादी सुविधाएं भी गायब हैं। प्रतिदिन लाखों यात्रियों का आवागमन वाले इन स्टेशनों पर इस तरह की लापरवाही सीधे तौर पर यात्रियों की परेशानी बढ़ा रही है।

आंकड़ों में देखें रेलवे की हालत

CAG की रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं:

  • 2035 स्टेशनों पर पीने के पानी के नलों की कमी है
  • 201 स्टेशनों पर शौचालयों की कमी है
  • 403 स्टेशनों पर मूत्रालयों की कमी है
  • 12 स्टेशनों पर पीने के पानी के नल ही नहीं हैं
  • 8 स्टेशनों पर पंखे और वाटर कूलर नहीं हैं

रेलवे बोर्ड ने अप्रैल 2018 में ही सभी स्टेशनों के लिए न्यूनतम सुविधाओं के मानदंड तय कर दिए थे और 31 अगस्त 2018 तक इन्हें लागू करने का निर्देश दिया था। इनमें पेयजल, प्रतीक्षा कक्ष, बैठने का क्षेत्र, प्लेटफॉर्म कैनोपी, शौचालय, ऊंचा प्लेटफॉर्म, पंखा, फुट ओवरब्रिज, कूड़ेदान, घड़ी और सार्वजनिक संबोधन प्रणाली शामिल थीं। लेकिन 7 साल बाद भी जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।

पानी में E-Coli बैक्टीरिया

पीने का पानी बना जानलेवा

रिपोर्ट का सबसे खतरनाक हिस्सा पीने के पानी की गुणवत्ता से जुड़ा है। CAG ने छह रेलवे क्षेत्रों के 59 केंद्रों पर पेयजल के नमूने लिए। जांच में कई जगहों पर पानी में E-Coli बैक्टीरिया की पुष्टि हुई।

कहां मिला E-Coli:

  • दक्षिणी रेलवे के कोयंबटूर और पलक्कड़ जंक्शन
  • दक्षिण मध्य रेलवे का हैदराबाद स्टेशन
  • सेंट्रल रेलवे का छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला
  • पूर्वी रेलवे का मधुपुर स्टेशन

इसके अलावा 2022-23 में 8 जोन के 49 स्टेशनों और 2023-24 में 9 जोन के 56 स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म के नलों से लिए गए नमूनों में भी E-Coli सहित अन्य बैक्टीरिया पाए गए।

डॉक्टरों के अनुसार E-Coli बैक्टीरिया पेट में जाने पर डायरिया, उल्टी, पेट दर्द और गंभीर मामलों में किडनी फेल तक हो सकती है। ऐसे में करोड़ों यात्री रोजाना अनजाने में खतरा मोल ले रहे हैं।

प्लेटफॉर्म के नलों से लिए गए नमूनों में भी E-Coli सहित अन्य बैक्टीरिया पाए गए।

यात्रियों पर असर

CAG ने रिपोर्ट में कहा है कि 2023-24 में भारतीय रेलवे ने प्रतिदिन 7,424 से अधिक गैर-उपनगरीय यात्री ट्रेनें चलाईं।  देश में कुल 5,908 गैर-उपनगरीय समूह स्टेशन हैं।

इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों के सफर करने के बावजूद स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव गंभीर चिंता का विषय है। खासकर गर्मी के मौसम में पीने के पानी और शौचालय की कमी बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए सबसे बड़ी समस्या बन जाती है।

CAG की सिफारिशें

CAG ने रेलवे से पेयजल की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा है। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि जल आपूर्ति प्रणालियों का नियमित निरीक्षण किया जाए और सभी निर्धारित मानकों के अनुसार पेयजल की नियमित जांच हो।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यात्री सुविधाओं को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए बल्कि जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू किया जाए।

यात्रियों को सलाह दी जाती है कि सफर के दौरान स्टेशन के वाटर कूलर का पानी पीने से बचें

यात्रियों के लिए सलाह

CAG रिपोर्ट आने के बाद यात्रियों को सलाह दी जाती है कि सफर के दौरान स्टेशन के वाटर कूलर का पानी पीने से बचें। हमेशा सीलबंद बोतलबंद पानी का ही इस्तेमाल करें। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।

निष्कर्ष:

CAG की यह रिपोर्ट भारतीय रेलवे के लिए एक आईना है। 2018 में तय किए गए मानकों को 2026 तक भी लागू न कर पाना रेलवे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।

हावड़ा और सियालदह जैसे स्टेशन जब सुविधाओं से वंचित हैं तो छोटे स्टेशनों की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है। अब देखना होगा कि संसद में पेश हुई इस रिपोर्ट के बाद रेलवे प्रशासन कितनी जल्दी एक्शन लेता है।

फिलहाल यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है।

Manpreet Singh
Author: Manpreet Singh

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