Parliament Session: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाने की खबरों के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार, 11 फरवरी 2026 को कांग्रेस सांसदों पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाया है। रिजिजू ने दावा किया कि कम से कम 20-25 कांग्रेस सांसदों ने लोकसभा स्पीकर के चैंबर में अनधिकृत रूप से घुसकर उन्हें गाली-गलौच की और अभद्र व्यवहार किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस घटना के समय प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल समेत वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी वहीं मौजूद थे और वे सांसदों को उकसा रहे थे। रिजिजू ने कहा कि स्पीकर ओम बिरला इस घटना से “बहुत दुखी” हैं और उन्होंने स्वयं स्पीकर से इस बारे में बात की है। उन्होंने यह भी दावा किया कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि उन्हें सदन में बोलने के लिए किसी की परमिशन की जरूरत नहीं है। यह विवाद संसद के बजट सत्र में जारी गतिरोध को और गहरा कर सकता है।
20-25 कांग्रेस सांसद घुसे स्पीकर के चैंबर में

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने मीडिया से बातचीत करते हुए पूरी घटना का विस्तृत विवरण दिया। उन्होंने कहा, “कम से कम 20-25 कांग्रेस सांसद लोकसभा स्पीकर के चैंबर में घुस गए और उनके साथ गाली-गलौच की। मैं भी उस समय वहीं मौजूद था इसलिए मैं प्रत्यक्षदर्शी हूं।”
रिजिजू ने आगे कहा, “स्पीकर बहुत नरम इंसान हैं, नहीं तो इस तरह के अभद्र व्यवहार के लिए सख्त कार्रवाई होती। उन्होंने बहुत संयम दिखाया।”
घटना की गंभीरता:
-
लोकसभा स्पीकर का चैंबर संवैधानिक पद का कार्यालय है
-
अनधिकृत प्रवेश संसदीय मर्यादा का उल्लंघन
-
गाली-गलौच संसदीय शिष्टाचार के खिलाफ
-
संविधान द्वारा प्रदत्त पद का अपमान
यदि ये आरोप सत्य हैं तो यह संसदीय इतिहास में एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण घटना मानी जाएगी।
प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल भी मौजूद थे
रिजिजू के आरोपों में सबसे गंभीर पहलू यह है कि उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की उपस्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल समेत सीनियर कांग्रेस नेता भी उस समय वहीं मौजूद थे, और वे उन्हें लड़ने के लिए उकसा रहे थे।”
वरिष्ठ नेताओं की कथित भूमिका:
-
प्रियंका गांधी वाड्रा: लोकसभा सांसद, वायनाड
-
केसी वेणुगोपाल: कांग्रेस महासचिव (संगठन)
-
आरोप: सांसदों को उकसाना
-
दावा: स्थिति को शांत करने के बजाय भड़काना
यदि वरिष्ठ नेता वास्तव में मौजूद थे तो यह सवाल उठता है कि क्या उन्होंने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया या वास्तव में उसे बढ़ावा दिया।
स्पीकर बहुत दुखी, मैंने उनसे बात की – रिजिजू
किरेन रिजिजू ने बताया कि उन्होंने इस घटना के बाद स्पीकर ओम बिरला से व्यक्तिगत रूप से बात की है। उन्होंने कहा, “स्पीकर इस घटना से बहुत दुखी हैं। मैंने स्पीकर से बात की है। ऐसा व्यवहार संसदीय परंपरा और गरिमा के विपरीत है।”
स्पीकर की मानसिक स्थिति:
-
घटना से गहरा आघात
-
संसदीय मर्यादा के पतन से चिंतित
-
व्यक्तिगत अपमान का दर्द
-
संविधान द्वारा प्रदत्त पद की गरिमा पर प्रहार
रिजिजू ने यह भी कहा कि स्पीकर ने अपनी उदारता और नरम स्वभाव के कारण कोई कठोर कार्रवाई नहीं की, अन्यथा ऐसे अभद्र व्यवहार के लिए सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती थी।
स्पीकर की रूलिंग का उल्लंघन
किरेन रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसदों ने केवल स्पीकर के चैंबर में अभद्र व्यवहार ही नहीं किया बल्कि सदन में भी स्पीकर की रूलिंग का उल्लंघन किया।
उन्होंने कहा, “स्पीकर ने एक रूलिंग दी थी, लेकिन उसका पालन नहीं किया गया। संसदीय परंपरा में स्पीकर की रूलिंग अंतिम होती है और सभी सदस्यों को उसका पालन करना अनिवार्य है।”
संसदीय नियमों का उल्लंघन:
-
स्पीकर की रूलिंग संसद में सर्वोच्च
-
सभी सांसद बाध्य हैं पालन करने के लिए
-
उल्लंघन अवमानना माना जाता है
-
अनुशासनात्मक कार्रवाई का आधार
यह आरोप संसदीय अनुशासन के गंभीर उल्लंघन का संकेत देता है।
राहुल गांधी बोले “मुझे परमिशन की जरूरत नहीं”
रिजिजू के सबसे विवादास्पद आरोपों में से एक यह है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें सदन में बोलने के लिए किसी की परमिशन की जरूरत नहीं है।
रिजिजू ने कहा, “राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें बोलने के लिए किसी की परमिशन की जरूरत नहीं है। वह अपनी मर्जी से बोलेंगे, बिना किसी नियम के।”
संसदीय परंपरा और नियम:
रिजिजू ने संसदीय परंपरा की याद दिलाते हुए कहा, “जब तक चेयर से परमिशन नहीं मिलती, सदस्य सदन में नहीं बोल सकते। यहां तक कि प्रधानमंत्री भी चेयर की परमिशन से ही बोलते हैं। हर कोई परमिशन लेकर ही बोलता है।”
यह बयान संसदीय लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांत – स्पीकर की सर्वोच्चता – को चुनौती देता प्रतीत होता है।
अविश्वास प्रस्ताव की पृष्ठभूमि
ये आरोप ऐसे समय आए हैं जब विपक्ष लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर पक्षपातपूर्ण व्यवहार कर रहे हैं और विपक्षी सांसदों को बोलने नहीं दे रहे हैं।
विपक्ष की शिकायतें:
-
राहुल गांधी को पर्याप्त समय नहीं
-
विपक्षी सांसदों को बोलने से रोका जाता है
-
महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं होने दी जाती
-
सत्ता पक्ष के पक्ष में झुकाव
सत्ता पक्ष का पलटवार:
-
स्पीकर निष्पक्ष हैं
-
विपक्ष नियमों का पालन नहीं करता
-
जानबूझकर सदन में व्यवधान
-
संसदीय मर्यादा का उल्लंघन
संसदीय गतिरोध जारी
संसद का बजट सत्र शुरू से ही गतिरोध का शिकार है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, असम के मुख्यमंत्री के विवादित वीडियो और अन्य मुद्दों पर तीखी बहस हो रही है।
गतिरोध के मुख्य कारण:
-
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर विवाद
-
असम सीएम के वीडियो पर हंगामा
-
राहुल गांधी को बोलने का मुद्दा
-
स्पीकर के रवैये पर असंतोष
कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक राहुल गांधी को बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जाता, तब तक सदन की कार्यवाही सुचारू नहीं चल सकती।
Parliament Session: आगे क्या होगा?
किरेन रिजिजू के ये गंभीर आरोप संसद में तनाव को और बढ़ा सकते हैं। यदि कांग्रेस ने वास्तव में इस तरह का व्यवहार किया है तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
संभावित परिणाम:
-
विशेषाधिकार हनन का मामला
-
संबंधित सांसदों के खिलाफ कार्रवाई
-
संसदीय समिति द्वारा जांच
-
आचार संहिता का उल्लंघन
हालांकि, कांग्रेस की ओर से इन आरोपों का खंडन आना बाकी है। यदि यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा है तो स्थिति और जटिल हो सकती है। फिलहाल, संसद का बजट सत्र गतिरोध के बादलों में घिरा हुआ है और किसी समाधान के संकेत नहीं दिख रहे हैं।



