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कांग्रेस ने झारखंड में मंत्री-विधायक विवाद सुलझाया, खरगे ने दिया कार्यकर्ताओं की बात सुनने का निर्देश

Jharkhand Politics: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने झारखंड में मंत्रियों और विधायकों के बीच चल रहे विवाद का निदान निकाल लिया है। दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में झारखंड के सभी प्रमुख कांग्रेस नेताओं को बुलाकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए। पार्टी ने मंत्रियों को सख्त हिदायत दी है कि वे कार्यकर्ताओं की बात सुनें और किसी की अनदेखी न करें। साथ ही विधायकों से भी अपेक्षा की गई है कि वे अपनी समस्याएं पार्टी फोरम पर ही उठाएं और दिल्ली आकर शिकायत करने से बचें।

खरगे का स्पष्ट संदेश – समन्वय बनाकर काम करें

Jharkhand Politics
Jharkhand Politics: Congress President Mallikarjun Kharage

दिल्ली में आयोजित बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने झारखंड में कांग्रेस कोटे के मंत्रियों और विधायकों को समन्वय बनाकर काम करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आपसी मतभेदों को लेकर कोई भी दिल्ली आकर शिकायत नहीं करे।

खरगे ने कहा, “सारे मामलों को प्रदेश स्तर पर प्रभारी, विधायक दल के नेता और प्रदेश अध्यक्ष के समक्ष रखें और उनका निबटारा भी वहीं कर लें। दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व का समय राष्ट्रीय मुद्दों पर लगाना चाहिए, न कि स्थानीय विवादों में।”

मंत्रियों के लिए विशेष निर्देश

पार्टी अध्यक्ष ने मंत्रियों को विशेष रूप से निर्देशित किया कि वे कार्यकर्ताओं की बात अवश्य सुनें। खरगे ने कहा, “कार्यकर्ताओं की वजह से ही आप विधायक और मंत्री बने हैं। उनकी अनदेखी करना पार्टी के हित में नहीं है। जमीनी कार्यकर्ता पार्टी की रीढ़ हैं और उनकी समस्याओं को प्राथमिकता देना हर मंत्री और विधायक का कर्तव्य है।”

मंत्रियों को यह भी कहा गया कि वे अपने विभागों को प्रभावी ढंग से चलाएं और जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरें। साथ ही, विधायकों के क्षेत्रों में होने वाले विकास कार्यों में उनसे उचित समन्वय रखें।

विधायकों से अपेक्षा – पार्टी फोरम का इस्तेमाल करें

दूसरी ओर, विधायकों से भी उम्मीद की गई है कि वे अपनी समस्याएं और शिकायतों को पार्टी के आंतरिक मंचों पर ही उठाएं। यदि उन्हें लगता है कि मंत्री उनकी बात नहीं सुन रहे या उनके क्षेत्र में विकास कार्य नहीं हो रहे, तो वे इसकी शिकायत प्रदेश अध्यक्ष, विधायक दल के नेता या प्रभारी से करें।

खरगे ने कहा, “यदि प्रदेश स्तर पर समाधान नहीं होता, तो प्रभारी के माध्यम से केंद्रीय नेतृत्व तक अपनी बातें पहुंचाएं। लेकिन मीडिया में या सार्वजनिक रूप से आपसी मतभेदों को उजागर करना पार्टी की छवि खराब करता है।”

राहुल गांधी की उपस्थिति से बढ़ा बैठक का महत्व

इस महत्वपूर्ण बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी उपस्थित थे। राहुल गांधी की उपस्थिति ने बैठक को और भी महत्वपूर्ण बना दिया। हालांकि उन्होंने बैठक के बाद कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया, लेकिन सूत्रों के अनुसार उन्होंने भी नेताओं को एकजुट रहने और संगठन को मजबूत करने की सलाह दी।

बैठक में संगठन महासचिव केसी वेनुगोपाल, झारखंड प्रभारी के. राजू, विधायक दल के नेता प्रदीप यादव, उप नेता राजेश कच्छप भी मौजूद थे।

झारखंड के सभी प्रमुख नेता थे उपस्थित

बैठक में झारखंड से आए प्रमुख नेताओं में शामिल थे:

मंत्रीगण:

  • राधाकृष्ण किशोर (वित्त मंत्री)

  • इरफान अंसारी (ग्रामीण विकास मंत्री)

  • दीपिका पांडेय सिंह (महिला, बाल विकास मंत्री)

  • शिल्पी नेहा तिर्की (जनजातीय कल्याण मंत्री)

अन्य प्रमुख नेता:

  • केशव महतो कमलेश (प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष)

  • प्रदीप यादव (विधायक दल के नेता)

  • राजेश कच्छप (विधायक दल के उप नेता)

  • सुखदेव भगत (लोकसभा सांसद, लोहरदगा)

  • कालीचरण मुंडा (लोकसभा सांसद, खूंटी)

  • राजेश ठाकुर (पूर्व प्रदेश अध्यक्ष)

  • प्रदीप बलमुचू (पूर्व प्रदेश अध्यक्ष)

प्रदेश अध्यक्ष का दावा: कोई विधायक नाराज नहीं

बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि झारखंड में कोई विधायक नाराज नहीं है। उन्होंने कहा, “जो भी छोटे-मोटे मतभेद थे, उन्हें आज की बैठक में सुलझा लिया गया है। अब सभी मिलकर पार्टी और सरकार के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए काम करेंगे।”

हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि वास्तव में कोई समस्या नहीं होती तो इतने बड़े स्तर पर बैठक बुलाने की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन यह सकारात्मक संकेत है कि पार्टी नेतृत्व ने समय रहते मामले को संभाल लिया।

पेसा एक्ट की उपलब्धि पर जोर

केशव महतो ने केंद्रीय नेतृत्व को राज्य में किए गए कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने पेसा एक्ट (Panchayats Extension to Scheduled Areas Act) को लागू करने को बड़ी उपलब्धि बताया।

उन्होंने कहा, “महागठबंधन की सात गारंटी में पेसा एक्ट को लागू करना भी शामिल था और हमने इसे पूरा किया है। यह एक्ट परंपरागत, रुढ़िवादी और कस्टमरी लॉ को आधार बनाकर बनाया गया है।”

महतो ने बताया कि इस एक्ट को बनाने से पहले जनजातीय क्षेत्र में मानकी, मुंडा और अन्य पारंपरिक नेताओं से विस्तृत चर्चा की गई। उनकी राय और सुझावों को शामिल किया गया। उन्होंने दावा किया कि झारखंड का पेसा एक्ट अन्य राज्यों से कहीं बेहतर है।

मनरेगा के पक्ष में आंदोलन जारी रखने का निर्देश

बैठक में केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के बजट में कटौती के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए भी निर्देश दिए गए।

कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार मनरेगा के बजट में लगातार कटौती कर रही है, जिससे ग्रामीण गरीबों के रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं। झारखंड में भी मनरेगा मजदूरी के भुगतान में देरी हो रही है।

पार्टी ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस मुद्दे पर जनता को जागरूक करे और केंद्र सरकार पर दबाव बनाए।

संगठन मजबूती पर चर्चा

बैठक में कांग्रेस के आगामी कार्यक्रमों और संगठन सृजन पर भी विस्तृत चर्चा की गई। पार्टी नेतृत्व ने प्रदेश इकाई को निर्देश दिया है कि वह जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करे।

जिला और प्रखंड स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं से नियमित संपर्क बनाए रखने, उनकी समस्याओं को सुनने और उन्हें पार्टी की नीतियों और कार्यक्रमों से जोड़ने के निर्देश दिए गए।

Jharkhand Politics: निष्कर्ष

दिल्ली में हुई यह बैठक झारखंड कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई। पार्टी नेतृत्व ने मंत्रियों और विधायकों के बीच के मतभेदों को सुलझाने का प्रयास किया है और स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं।

अब देखना यह होगा कि क्या सभी नेता इन निर्देशों का पालन करते हैं और आपसी समन्वय बनाकर काम करते हैं। झारखंड में कांग्रेस JMM के नेतृत्व वाले महागठबंधन का हिस्सा है और पार्टी की आंतरिक एकता सरकार की स्थिरता के लिए भी जरूरी है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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