Sirmaur/Shimla: जम्मू-कश्मीर के राजोरी क्षेत्र से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां कथित तौर पर चंद पैसों के लिए माता-पिता ने अपने नाबालिग बेटे को एक ठेकेदार को सौंप दिया।
ठेकेदार बच्चे को हिमाचल प्रदेश लेकर आया और सिरमौर जिले में एक व्यक्ति के घर पर उससे काम करवाया गया। शिकायत मिलने के बाद चाइल्डलाइन, बाल कल्याण समिति (CWC) और सिरमौर पुलिस की मदद से नाबालिग को रेस्क्यू कर शिमला के शेल्टर होम में सुरक्षित पहुंचाया गया।
कुछ महीने पहले सिरमौर लाया गया था बच्चा
मामला कुछ महीने पुराना बताया जा रहा है। करीब 15-16 वर्ष के नाबालिग से सिरमौर में एक घर पर जबरन काम करवाए जाने की शिकायत मिली थी। सूचना के बाद चाइल्डलाइन और बाल कल्याण समिति की टीम ने पुलिस के सहयोग से बच्चे को वहां से मुक्त कराया।
जिस घर से बच्चे को बरामद किया गया, उसके मालिक ने दावा किया कि नाबालिग अपनी इच्छा से काम करने के लिए तैयार था और इसी आधार पर उसे काम पर रखा गया था। हालांकि, शिमला पहुंचने के बाद बच्चे से कई बार बातचीत की गई। शुरुआत में वह अपने घर का पता स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रहा था।
काउंसलिंग में सामने आई पूरी कहानी
बच्चे की स्थिति को देखते हुए उसकी काउंसलिंग कराई गई। मनोवैज्ञानिक मनोज सहगल की काउंसलिंग के दौरान नाबालिग ने अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी।
नाबालिग के अनुसार, उसके पिता ने दूसरी शादी की थी। उसने आरोप लगाया कि उसकी सौतेली मां ने पिता के साथ मिलकर उसे कुछ महीने पहले एक ठेकेदार को सौंप दिया था। इसके बाद ठेकेदार उसे हिमाचल प्रदेश लेकर आया और सिरमौर में एक व्यक्ति के घर पर काम करवाया गया।
काउंसलिंग के दौरान बच्चे ने अपने स्कूल से जुड़ी जानकारी भी साझा की। इन्हीं जानकारियों के आधार पर बाल कल्याण समिति ने उसके राजोरी स्थित घर का पता लगाने में सफलता हासिल की।
माता-पिता ने बाद में स्वीकार किया बेटा
बाल कल्याण समिति की ओर से बच्चे के परिवार से संपर्क किया गया। शुरुआत में माता-पिता की ओर से कथित तौर पर टालमटोल की गई, लेकिन बाद में उन्होंने बच्चे को अपना बेटा स्वीकार कर लिया।
हालांकि, नाबालिग ने अपने घर वापस जाने की इच्छा नहीं जताई है। उसे आशंका है कि यदि उसे सीधे माता-पिता के पास भेजा गया तो उसे दोबारा किसी अन्य व्यक्ति को सौंपा जा सकता है।
जम्मू-कश्मीर की CWC के संरक्षण में भेजने की तैयारी
बच्चे की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उसे फिलहाल सीधे अभिभावकों को सौंपने के बजाय जम्मू-कश्मीर की बाल कल्याण समिति के संरक्षण में भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई है। वहां उसकी सुरक्षा और पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बाल कल्याण समिति की चेयरपर्सन संतोष शर्मा ने बताया कि सूचना मिलते ही चाइल्डलाइन और CWC की टीम ने पुलिस की मदद से नाबालिग को सिरमौर से रेस्क्यू किया था। बच्चे को फिलहाल शिमला के शेल्टर होम में सुरक्षित रखा गया है। जम्मू-कश्मीर भेजने के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
मामला नाबालिगों से मजदूरी करवाने और उनके संरक्षण से जुड़ा होने के कारण संबंधित एजेंसियां बच्चे की सुरक्षा, परिवार की भूमिका और पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाने में लगी हैं।