Jharkhand News: झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक और सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। राज्य सरकार ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत प्रत्येक जिले के एक सरकारी और एक निजी अस्पताल को डिजिटल सेवाओं में मॉडल बनाने का निर्णय लिया है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना अगले एक महीने में पूरी की जाएगी, जिससे अन्य अस्पताल भी प्रेरणा लेकर डिजिटल रूप से सक्षम बन सकेंगे।
स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव सह आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन झारखंड के निदेशक विद्यानंद शर्मा ने बुधवार को मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ मिशन एवं आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में सदर अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के पदाधिकारियों को डिजिटलीकरण को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए।
ई-सुश्रुत मॉड्यूल से होगा अस्पतालों का डिजिटलीकरण

समीक्षा बैठक में बताया गया कि राज्य के समस्त जिला अस्पतालों में बाह्य रोगी विभाग, आंतरिक रोगी विभाग एवं फार्मेसी लैब को सीडैक के ई-सुश्रुत मॉड्यूल के अंतर्गत डिजिटल बनाया जा रहा है। यह एक एकीकृत अस्पताल प्रबंधन प्रणाली है जो मरीजों के रिकॉर्ड, उपचार विवरण और दवाओं की जानकारी को डिजिटल रूप में संग्रहित करेगी।
ई-सुश्रुत मॉड्यूल के माध्यम से मरीजों का पंजीकरण, डॉक्टरों की नियुक्ति, जांच रिपोर्ट और दवाओं का वितरण सब कुछ कंप्यूटरीकृत हो जाएगा। इससे न केवल कागजी कार्रवाई में कमी आएगी बल्कि सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। मरीजों को अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक आसानी से पहुंच मिल सकेगी और डॉक्टर भी मरीज का पूरा इतिहास देखकर बेहतर उपचार दे सकेंगे।
यह प्रणाली राज्य भर में एक समान होगी, जिससे यदि कोई मरीज एक जिले से दूसरे जिले में जाता है तो उसका रिकॉर्ड वहां भी उपलब्ध रहेगा। यह सुविधा विशेष रूप से गंभीर बीमारियों और दीर्घकालिक उपचार में लाभदायक साबित होगी।
निजी अस्पतालों के लिए अनिवार्य सॉफ्टवेयर
आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना से जुड़े सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को डिजिटल सेवाओं के लिए एबीडीएम इनेबल्ड सॉफ्टवेयर का उपयोग करना अनिवार्य होगा। मिशन निदेशक ने 28 फरवरी तक सभी निजी अस्पतालों को इस सॉफ्टवेयर के उपयोग के सख्त निर्देश दिए हैं।
यह निर्णय राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मानकीकृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। निजी अस्पताल जो आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का उपचार करते हैं, उन्हें अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी सेवाओं को दर्ज करना होगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और धोखाधड़ी की संभावना कम होगी।
निजी क्षेत्र के छोटे क्लिनिक और नर्सिंग होम को भी इस डिजिटल ढांचे में शामिल किया जाएगा। उन्हें तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा ताकि वे इस परिवर्तन को आसानी से अपना सकें। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी स्वास्थ्य सुविधा केंद्र इस डिजिटल क्रांति से अछूता न रहे।
दवा दुकानों का हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री में पंजीकरण
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत राज्य की सभी दवा दुकानों का हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री में पंजीकरण किया जा रहा है। यह एक राष्ट्रीय डेटाबेस है जिसमें देश की सभी स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी संग्रहित होती है।
बैठक में उपस्थित औषधि निदेशक ऋतु सहाय ने राज्य के सभी जिलों के सहायक निदेशकों एवं ड्रग इंस्पेक्टरों को एक महीने के भीतर सभी फार्मेसी दुकानों का एचएफआर तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस कार्य को तेजी से पूरा करने के लिए विशेष शिविर लगाने का सुझाव दिया गया है।
दवा दुकानों का डिजिटल पंजीकरण कई मायनों में महत्वपूर्ण है। इससे नकली दवाओं की बिक्री पर अंकुश लगेगा और दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला पर नजर रखना आसान होगा। मरीज भी अपने नजदीकी लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।
रामगढ़ और गुमला बनेंगे अग्रणी जिले
समीक्षा बैठक में मिशन निदेशक ने स्पष्ट किया कि रामगढ़ और गुमला जिले को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के लिए मॉडल जिला बनाने की पहल की जा रही है। इन दोनों जिलों में डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा और इन्हें अन्य जिलों के लिए उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
रामगढ़ और गुमला को मॉडल जिला बनाने का निर्णय सोच-समझकर लिया गया है। इन जिलों में स्वास्थ्य सुविधाओं का बेहतर ढांचा है और प्रशासनिक सहयोग भी मिलने की संभावना है। यहां सफलतापूर्वक डिजिटलीकरण होने के बाद इसी मॉडल को अन्य जिलों में दोहराया जाएगा।
प्रत्येक जिले में मॉडल सुविधा केंद्रों की पहचान
राज्य के शेष सभी जिलों में एक प्राइवेट और एक सरकारी अस्पताल को मॉडल फैसिलिटी के रूप में चिन्हित किया गया है। इन चयनित अस्पतालों में डिजिटल सेवाओं को पूर्ण रूप से लागू किया जाएगा और इनके अनुभव के आधार पर अन्य अस्पतालों में विस्तार किया जाएगा।
मॉडल फैसिलिटी का चयन करते समय अस्पताल के आकार, मरीजों की संख्या, उपलब्ध बुनियादी ढांचे और तकनीकी क्षमता को ध्यान में रखा गया है। बड़े जिला अस्पतालों को सरकारी क्षेत्र में और प्रतिष्ठित निजी अस्पतालों को निजी क्षेत्र में मॉडल के रूप में चुना गया है।
कंप्यूटर और मानव संसाधन की कमी दूर करने के निर्देश
मिशन निदेशक ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन जिलों में कंप्यूटर और मानव संसाधन की कमी है, उसे तत्काल दूर किया जाए। डिजिटलीकरण के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचा और प्रशिक्षित कर्मचारी होना आवश्यक है।
कई जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में कंप्यूटर की संख्या अपर्याप्त है या मौजूदा कंप्यूटर पुराने हो चुके हैं। इस समस्या का तुरंत समाधान करने के लिए नए कंप्यूटर खरीदने और इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। मानव संसाधन की कमी को भी तत्काल दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।
Jharkhand News: मरीजों और डॉक्टरों के लिए लाभ
यह डिजिटल परिवर्तन मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा। मरीजों को लंबी कतारों में खड़े होने की जरूरत नहीं होगी और उनका रिकॉर्ड सुरक्षित रूप से संग्रहित रहेगा। वे अपनी जांच रिपोर्ट ऑनलाइन देख सकेंगे और जरूरत पड़ने पर कहीं भी अपना मेडिकल इतिहास दिखा सकेंगे।
डॉक्टरों के लिए भी काम आसान हो जाएगा। उन्हें मरीज का संपूर्ण इतिहास एक क्लिक पर मिल जाएगा, जिससे सही निदान और उपचार में मदद मिलेगी। दवाओं के बीच परस्पर प्रभाव की जांच करना और एलर्जी की जानकारी रखना भी सरल हो जाएगा।
प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी यह व्यवस्था लाभदायक है। सरकार को वास्तविक समय में स्वास्थ्य सेवाओं के उपयोग का डेटा मिलेगा, जिसके आधार पर नीतियां बनाई जा सकेंगी।



