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झारखंड में सरकारी स्कूलों के बच्चों को मुफ्त किताबें-बैग, टेंडर प्रक्रिया शुरू, अगले सत्र से वितरण

कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों को मुफ्त किताबें, 1 से 8 तक के छात्रों को मिलेंगे रंगीन स्कूल बैग।

Jharkhand News: झारखंड सरकार ने सरकारी स्कूलों के छात्रों को पढ़ाई के लिए मुफ्त सामग्री देने का बड़ा ऐलान किया है। शिक्षा विभाग ने किताबें, नोटबुक और बैग के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं। अगले साल सत्र शुरू होते ही कक्षा 1 से 12 तक के लाखों बच्चों को ये चीजें मुफ्त मिलेंगी। यह कदम समग्र शिक्षा अभियान और राज्य की विद्यालय किट योजना के तहत उठाया गया है। इससे गरीब परिवारों के बच्चे बिना परेशानी पढ़ाई कर सकेंगे। शिक्षा पर जोर देने वाली हेमंत सोरेन सरकार का यह फैसला छात्रों के लिए राहत लेकर आया है।

टेंडर की पूरी प्रक्रिया, कौन-कौन सी चीजें मिलेंगी

झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने किताबों के छपाई, नोटबुक की आपूर्ति और बैग बनाने के लिए अलग-अलग टेंडर निकाले हैं। पहले यह काम जेसीईसीईआरटी के पास था, लेकिन इस साल परिषद को सौंपा गया है। कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को किताबें समग्र शिक्षा अभियान से मुफ्त मिलेंगी। कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों को राज्य बजट से किताबें दी जाएंगी। साथ ही, कक्षा 1 से 12 तक सभी को नोटबुक मिलेंगी। बैग सिर्फ कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को दिए जाएंगे। कुल 36 लाख 40 हजार 251 छात्रों को बैग मिलेंगे। इनमें कक्षा 1-2 के 8 लाख 3 हजार 668, कक्षा 3-5 के 15 लाख 24 हजार 318 और कक्षा 6-8 के 13 लाख 12 हजार 265 बच्चे शामिल हैं। बैग के रंग भी तय हैं- कक्षा 1-2 के लिए गुलाबी, 3-5 के लिए आकाश नीला और 6-8 के लिए गहरा नीला। हर बैग पर झारखंड सरकार का लोगो और ‘निश्शुल्क वितरित’ लिखा होगा।

वितरण का समय, तीन महीने में पहुंचानी होंगी सामग्री

टेंडर मिलने के तीन महीने के अंदर सभी सामग्री जिला के ब्लॉक संसाधन केंद्रों तक पहुंचानी होगी। इससे अगले सत्र की शुरुआत में ही बच्चों को किताबें-बैग मिल जाएंगे। शिक्षा और साक्षरता विभाग के निर्देश पर यह काम तेजी से हो रहा है। आपूर्तिकर्ताओं को गुणवत्ता के सख्त नियम मानने पड़ेंगे। अगर कोई कमी हुई तो टेंडर रद्द हो सकता है। इस योजना से राज्य के दूरदराज इलाकों के स्कूलों में पढ़ाई सुगम होगी।

छात्रों के भविष्य के लिए जरूरी कदम, शिक्षा में नई गति

यह योजना झारखंड के 36 लाख से ज्यादा बच्चों के लिए वरदान साबित होगी। पहले सामग्री देरी से मिलती थी, जिससे बच्चे परेशान होते थे। अब समय पर सब कुछ मिलेगा तो पढ़ाई में रुचि बढ़ेगी। विशेषज्ञ कहते हैं कि मुफ्त सामग्री से ड्रॉपआउट रेट कम होगा। सरकार का लक्ष्य है कि हर बच्चा अच्छी शिक्षा पाए। यह कदम न सिर्फ शिक्षा को मजबूत करेगा बल्कि राज्य के विकास में भी मददगार साबित होगा। अभिभावक खुश हैं कि अब बच्चों की फीस के अलावा किताब-बैग की चिंता नहीं रहेगी।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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