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Jharkhand News: झारखंड के 11 हजार वकीलों के लाइसेंस रद्द हो जाएंगे! क्या है वजह

Jharkhand News: झारखंड बार काउंसिल के चुनावों से जुड़े सत्यापन प्रक्रिया में लापरवाही के कारण करीब 11 हजार वकीलों के लाइसेंस रद्द होने का खतरा मंडरा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के नए निर्देशों और बार काउंसिल ऑफ इंडिया की अधिसूचनाओं के तहत यह कार्रवाई हो सकती है। आइए जानते हैं पूरी स्थिति।

मुख्य बिंदु

  • प्रभावित वकील: झारखंड बार काउंसिल में कुल 35 हजार वकील पंजीकृत हैं। इनमें से करीब 11 हजार वकील ऐसे हैं जिन्होंने प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए फॉर्म नहीं लिया या फॉर्म लेने के बाद उसे भरकर आवेदन नहीं दिया।

सत्यापन प्रक्रिया: अक्टूबर में झारखंड बार काउंसिल की बैठक में इन 11 हजार वकीलों को सत्यापन फॉर्म भरने का अंतिम मौका दिया गया था। करीब 5 हजार वकीलों ने फॉर्म लिया और प्रक्रिया शुरू की, लेकिन 6 हजार ने फॉर्म ही नहीं लिया।

चुनाव पर प्रभाव: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, जिन वकीलों का सत्यापन लंबित है, वे मतदान कर सकते हैं, लेकिन उनका मतदान औपबंधिक (प्राविजनल) होगा। सत्यापन परिणामों के आधार पर उनका मतदान प्रभावित हो सकता है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने स्पष्ट किया है कि फॉर्म न लेने या प्रक्रिया न शुरू करने वालों को मतदान से वंचित किया जाएगा।

Jharkhand News: रद्दीकरण के कारण

बार काउंसिल ऑफ इंडिया का निर्देश: जिन वकीलों ने सत्यापन प्रक्रिया शुरू नहीं की, उनके लाइसेंस पहले निलंबित किए जाएंगे और बाद में स्थायी रूप से रद्द हो सकते हैं। यह चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए है।

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप: कोर्ट ने सदस्यता सत्यापन के नाम पर चुनाव रोकने की अनुमति नहीं दी। जिन राज्यों में बार काउंसिल चुनाव नहीं हुए, वहां 31 जनवरी 2026 से अप्रैल 2026 तक चुनाव कराने का आदेश दिया गया है। झारखंड में सत्यापन पूरा न होने से चुनाव स्थगित थे, लेकिन अब प्रक्रिया तेज हो रही है।

कार्रवाई का रास्ता साफ: अक्टूबर बैठक में तय हुआ था कि फॉर्म न भरने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनाव प्रक्रिया समाप्ति तिथि निर्धारित होने के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया झारखंड चुनाव की तिथियां घोषित करेगा, जिससे फॉर्म न लेने वालों की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

वर्तमान स्थिति

झारखंड बार काउंसिल का कार्यकाल 28 जुलाई 2023 को समाप्त हो गया था। तब से तदर्थ कमेटी संचालन कर रही है। सत्यापन कार्य पूरा न होने पर कार्यकाल बढ़ाया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश से चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, और गैर-अनुपालन करने वाले वकीलों पर सख्ती होगी। यह कदम वकील पेशे की अखंडता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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