DTC Pink Saheli Card 2026: दिल्ली परिवहन निगम की बसों में महिलाओं का मुफ्त सफर फिलहाल गुलाबी टिकट पर चल रहा है, पर यह रास्ता ज्यादा दिन खुला नहीं रहने वाला। सरकार पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड को अनिवार्य करने की दिशा में बढ़ चुकी है। गुलाबी टिकट की मियाद पहले 30 सितंबर को खत्म होनी थी। अब इसे 10 अक्टूबर तक खिसका दिया गया है, ताकि बाकी महिलाएं कार्ड बनवा लें। परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह की बैठक में प्रस्ताव मंजूर हो चुका है और फाइल अंतिम मुहर के लिए उपराज्यपाल के पास भेज दी गई है।
पिंक सहेली कार्ड 8 मार्च से जारी हो रहे हैं। अब तक 19 लाख से ज्यादा महिलाओं ने इसे बनवा लिया है। डीटीसी बसों में रोज 6 से 7 लाख महिलाएं सफर करती हैं। 30 सितंबर तक स्मार्ट कार्ड से यात्रा करने वाली महिलाओं की संख्या करीब 25 से 28 हजार थी। जागरूकता मुहिम के बाद गुरुवार को 3 लाख से अधिक महिलाओं ने कार्ड से बस पकड़ी। विभाग का रुख साफ है कि कार्ड अनिवार्य होते ही गुलाबी टिकट बंद हो जाएगी।
गुलाबी टिकट की बढ़ाई मियाद कब तक है और कार्ड कब जरूरी होगा?
गुलाबी टिकट अभी पूरी तरह नहीं रोकी गई है। डीटीसी ने इसे 10 अक्टूबर तक जारी रखने का फैसला किया है। कंडक्टरों को कहा गया है कि जिनके पास पिंक सहेली कार्ड नहीं है, उन्हें अंतिम आदेश आने तक गुलाबी टिकट दी जाए। कई महिलाओं का कहना है कि तारीख बढ़ने के बाद भी कुछ रूटों पर कंडक्टर टिकट देने से हिचक रहे हैं और कार्ड ही मांग रहे हैं। विभाग ने माना है कि अधिसूचना से पहले टिकट रोकना उचित नहीं।
कार्ड को अनिवार्य करने वाला प्रस्ताव काफी समय से अटका था। सूत्रों के मुताबिक फाइल अब उपराज्यपाल के पास अंतिम स्वीकृति के लिए है। मंजूरी मिलते ही गुलाबी टिकट बंद करने की अधिसूचना आ सकती है। उसके बाद मुफ्त यात्रा सिर्फ पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड से चलेगी।
अब तक कितने कार्ड बने और असल इस्तेमाल कितना रहा?
8 मार्च से कार्ड बनना शुरू हुआ था। 19 लाख से अधिक महिलाएं इसे ले चुकी हैं। रोजाना बस में चढ़ने वाली महिलाओं की तादाद 6 से 7 लाख है, इसलिए बड़ी संख्या अभी कार्ड के बिना है। 30 सितंबर तक कार्ड से सफर करने वाली महिलाओं की गिनती 25 से 28 हजार थी। टीमें उतरने के बाद गुरुवार को यह आंकड़ा 3 लाख पार कर गया। विभाग इसे अच्छी शुरुआत मान रहा है, पर अनिवार्य तारीख से पहले और कार्ड बनवाने पर जोर दे रहा है।
पिंक सहेली कार्ड कहां बनता है और कौन से कागज लगेंगे?
कार्ड नजदीकी डीटीसी बस डिपो में बनता है। साथ में दिल्ली के पते वाला आधार कार्ड, वोटर पहचान पत्र और पासपोर्ट आकार का फोटो रखना होगा। डिपो पर प्रक्रिया पूरी होते ही कार्ड मिल जाता है। परिवहन विभाग ने महिलाओं को समझाने के लिए टीमें बनाई हैं। बसों और डिपो पर बताया जा रहा है कि जल्द गुलाबी टिकट नहीं बचेगी और मुफ्त किराया कार्ड से ही मिलेगा।
| मुद्दा | ताजा स्थिति |
|---|---|
| गुलाबी टिकट की नई मियाद | 10 अक्टूबर 2026 |
| कार्ड जारी होने की शुरुआत | 8 मार्च |
| अब तक जारी कार्ड | 19 लाख से अधिक |
| रोजाना महिला यात्री | 6 से 7 लाख |
| 30 सितंबर तक कार्ड से सफर | 25 से 28 हजार |
| गुरुवार को कार्ड से सफर | 3 लाख से अधिक |
| कार्ड बनने की जगह | नजदीकी डीटीसी बस डिपो |
| मांगे गए दस्तावेज | दिल्ली पते वाला आधार, वोटर आईडी, फोटो |
कंडक्टर टिकट क्यों नहीं दे रहे और डीटीसी का निर्देश क्या है?
मियाद बढ़ने के बाद भी कई रूटों पर महिलाओं को गुलाबी टिकट नहीं मिल रही। शिकायत है कि कंडक्टर सीधे पिंक सहेली कार्ड मांग रहे हैं। डीटीसी का कहना है कि अंतिम आदेश से पहले टिकट चलती रहनी चाहिए। कंडक्टरों को लिखकर कहा गया है कि बिना कार्ड वाली महिलाओं को गुलाबी टिकट दें। जागरूकता अभियान का मकसद टिकट बंद करना नहीं, कार्ड बनवाने की रफ्तार बढ़ाना है। यदि बिना वजह टिकट रोकी जा रही हो तो यात्री डिपो या परिवहन विभाग की हेल्पलाइन पर शिकायत कर सकते हैं।
कार्ड अनिवार्य होने के बाद मुफ्त सफर किस तरह चलेगा?
प्रस्ताव पास होने और अधिसूचना आने के बाद मुफ्त यात्रा केवल पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड पर रहेगी। गुलाबी टिकट तब हटा ली जाएगी। कार्ड दिल्ली की महिला यात्रियों के लिए है, इसलिए डिपो पर दिल्ली का पता वाले कागज मांगे जा रहे हैं। कार्ड बनवा चुकी महिलाएं बस में कार्ड दिखाकर या मशीन पर इस्तेमाल कर मुफ्त चढ़ सकेंगी। जिनके पास कार्ड नहीं होगा, उन्हें किराया देना पड़ सकता है। विभाग का कहना है कि 10 अक्टूबर तक का अतिरिक्त समय इसी तैयारी के लिए दिया गया है। आधिकारिक आदेश से पहले केवल परिवहन विभाग या डीटीसी की सूचना पर भरोसा करें।
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Sanjana Gupta
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