Jharkhand Municipal Election: झारखंड में 2026 के नगर निकाय चुनावों की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने महापौर, अध्यक्ष और वार्ड पार्षद पदों के लिए चुनाव प्रतीक चिह्न निर्धारित करने का आदेश जारी कर दिया है। हालांकि चुनाव की तारीखों की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि मतदान फरवरी के अंत या मार्च के पहले सप्ताह में होगा। प्रशासनिक तैयारी पूरे जोरों पर है और इस आदेश के बाद राजनीतिक दलों में भी सरगर्मी बढ़ गई है।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किए गए आदेश के अनुसार, झारखंड की सभी नगर निकायों में महापौर व अध्यक्ष तथा वार्ड पार्षद व सदस्य पदों के लिए निर्धारित प्रतीकों पर ही चुनाव कराए जाएंगे। यह आदेश चास और फुसरो सहित राज्य की सभी नगरपालिकाओं पर लागू होगा।
महापौर और वार्ड पार्षद के लिए अलग प्रतीक

राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि महापौर या अध्यक्ष पद के लिए अलग चुनाव चिह्न निर्धारित किए गए हैं और वार्ड पार्षद या सदस्य पद के लिए अलग। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि मतदाताओं को भ्रम न हो और वे आसानी से अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट दे सकें।
आयोग के आदेश में कहा गया है कि नामांकन पत्रों की जांच के बाद वैध प्रत्याशियों के नाम प्रपत्र-9 में देवनागरी वर्णक्रमानुसार सूचीबद्ध किए जाएंगे। उसी क्रम के अनुसार उम्मीदवारों को प्रतीक आवंटित होंगे। यानी जिस उम्मीदवार का नाम देवनागरी के अनुसार पहले आएगा, उसे सूची में पहला प्रतीक मिलेगा।
महापौर और अध्यक्ष पद के लिए 50 प्रतीक
महापौर और अध्यक्ष पद के लिए आयोग ने कुल 50 चुनाव चिह्न निर्धारित किए हैं। इनमें एयर कंडीशनर, छड़ी, चूड़ियां, बैटरी टॉर्च, बेंच, बिस्कुट, बक्सा, ईंटें, बाल्टी, कैमरा, कार्पेट, सीसीटीवी कैमरा, चपाती रोलर, चिमनी, नारियल फार्म और कंप्यूटर माउस जैसे रोजमर्रा की वस्तुएं शामिल हैं।
इसके अलावा घन, हीरा, डोली, ड्रिल मशीन, बिजली का खंभा, बांसुरी, फव्वारा, कीप, गैस का चूल्हा, चाय छलनी, हरी मिर्च, ऊन व सिलाई, हेलमेट, आइसक्रीम, कटहल, भिंडी, कुंडी और लूडो भी सूची में हैं।
माचिस की डिब्बी, नेल कटर, कड़ाही, नाशपाती, कलम की निब जिसमें सात किरणें हैं, पेंसिल शार्पनर, पेट्रोल पंप, हाथ रेहड़ी, प्लेट स्टैंड, पंचिंग मशीन, अंगूठी, रूम कूलर, सेफ्टी पिन, कैंची, जूता और कूदने की रस्सी जैसे प्रतीक भी महापौर और अध्यक्ष पद के लिए निर्धारित किए गए हैं।
वार्ड पार्षद के लिए 50 अलग प्रतीक
वार्ड पार्षद और सदस्य पद के लिए भी आयोग ने 50 चुनाव चिह्न तय किए हैं। इनमें अलमारी, बेबी वॉकर, बल्ला, मोतियों का हार, साइकिल पंप, ब्लैकबोर्ड, डबल रोटी, ब्रीफकेस, केक, कैन, कैरम बोर्ड, जंजीर, चप्पलें, चिमटी और कलर ट्रे व ब्रश शामिल हैं।
चारपाई, सीटी, डीजल पंप, द्वार घंटी, डंबल, लिफाफा, कुआं, फ्रॉक, स्टूल, उपहार, ग्रामोफोन, खिड़की, हेडफोन, जुराबें और पानी गर्म करने की रॉड भी इस सूची में हैं।
दीवार खूंटी, लेडी पर्स, लेटर बॉक्स, लंच बॉक्स, माइक, गले की टाई, पैंट, मटर, पैन स्टैंड, पेंडुलम, फोन चार्जर, करनी, रेजर, रोड रोलर, रूम हीटर, आरी, सिलाई मशीन, शटर, स्लेट और मिक्सर ग्राइंडर को वार्ड पार्षद और सदस्य पद के लिए मुक्त प्रतीक के रूप में निर्धारित किया गया है।
अधिक उम्मीदवारों के लिए सुरक्षित प्रतीक
यदि किसी निर्वाचन क्षेत्र में प्रत्याशियों की संख्या तय 50 चुनाव चिह्नों से अधिक हो जाती है, तो शेष उम्मीदवारों को आयोग द्वारा निर्धारित सुरक्षित चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि किसी भी उम्मीदवार को प्रतीक न मिलने की समस्या का सामना न करना पड़े।
सुरक्षित चुनाव चिह्नों में सेब, गुब्बारा, बल्लेबाज, बेल्ट, दूरबीन, पाल युक्त नाव, ब्रेड टोस्टर, ब्रश, कैलकुलेटर, शिमला मिर्च, फूलगोभी, चक्की, शतरंज बोर्ड, कोट, कंप्यूटर, क्रेन और कटिंग प्लायर शामिल हैं।
इसके अलावा डिश एंटेना, दरवाजे का हैंडल, कान की बालियां, एक्सटेंशन बोर्ड, फुटबॉल खिलाड़ी, फ्राइंग पैन, गैस सिलेंडर, अदरक, अंगूर, हारमोनियम, टाइप मशीन, रेत घड़ी, चिमटा, किचन सिंक और लैपटॉप भी सुरक्षित प्रतीकों में हैं।
लाइटर, टायर, नूडल्स कटोरा, मूंगफली, पेन ड्राइव, पेंसिल डिब्बा, मूसल-खरल, तकिया, खाने से भरी थाली, प्रेशर कुकर, रेफ्रिजरेटर, रोबोट, रबर की मुहर, स्कूल का बस्ता, पानी का जहाज, सितार, साबुनदानी और फूलदान जैसे सुरक्षित मुक्त प्रतीक भी आवंटित किए जाएंगे।
देवनागरी वर्णक्रम के अनुसार आवंटन
आयोग के आदेश के अनुसार, चुनाव प्रतीकों का आवंटन देवनागरी वर्णक्रम के अनुसार होगा। यानी उम्मीदवारों के नाम अ, आ, इ, ई के क्रम में सूचीबद्ध किए जाएंगे। जिस उम्मीदवार का नाम सबसे पहले आएगा, उसे पहला प्रतीक मिलेगा। इस तरह क्रमिक रूप से सभी उम्मीदवारों को प्रतीक दिए जाएंगे।
यह व्यवस्था पारदर्शी है और किसी भी तरह के भेदभाव या पक्षपात की गुंजाइश नहीं छोड़ती। उम्मीदवार को यह भी पता रहेगा कि उसका नाम किस क्रम पर है और उसे कौन सा प्रतीक मिलेगा।
प्रतीक आवंटन अंतिम और अपरिवर्तनीय
आदेश में यह भी स्पष्ट रूप से कहा गया है कि निर्वाची पदाधिकारी द्वारा एक बार आवंटित किया गया चुनाव चिह्न अंतिम होगा। राज्य निर्वाचन आयोग की पूर्व स्वीकृति के बिना उसमें किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जा सकेगा।
यह प्रावधान इसलिए जरूरी है ताकि चुनाव प्रक्रिया के दौरान कोई भ्रम या विवाद न हो। एक बार प्रतीक मिलने के बाद उम्मीदवार को उसी पर चुनाव लड़ना होगा। वह बाद में प्रतीक बदलने की मांग नहीं कर सकता।
2022 की अधिसूचना निरस्त
राज्य निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2022 में जारी पूर्व अधिसूचना को निरस्त करते हुए नए प्रतीक आवंटन आदेश को लागू कर दिया है। 2022 में जो चुनाव चिह्न निर्धारित किए गए थे, वे अब मान्य नहीं होंगे। केवल इस नए आदेश में दिए गए प्रतीक ही वैध होंगे।
इस बदलाव के पीछे कई कारण हो सकते हैं। संभव है कि पुराने प्रतीकों में कुछ ऐसे थे जो विवादास्पद या भ्रामक थे। या फिर आयोग ने मतदाताओं की सुविधा के लिए अधिक सरल और पहचानने योग्य प्रतीक चुने हैं।
फरवरी अंत या मार्च में संभावित चुनाव
हालांकि आधिकारिक रूप से चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार मतदान फरवरी के अंत या मार्च के पहले सप्ताह में होने की संभावना है। चुनाव आयोग जल्द ही आधिकारिक घोषणा कर सकता है।
चुनाव की तैयारियां पूरे जोरों पर हैं। मतदाता सूची का संशोधन किया जा रहा है। चुनाव अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मतदान केंद्रों की पहचान की जा रही है और उनकी मरम्मत का काम चल रहा है। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की जांच की जा रही है।
चास और फुसरो में बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
प्रतीक चिह्न आवंटन के आदेश के बाद बोकारो जिले के चास और फुसरो में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार करना शुरू कर दिया है। पार्टी कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं।
चास नगर निगम और फुसरो नगर परिषद दोनों ही महत्वपूर्ण निकाय हैं। यहां की स्थानीय राजनीति काफी सक्रिय रहती है। महापौर और अध्यक्ष पद के लिए कई दावेदार मैदान में हैं। वार्डों में भी प्रत्याशियों की भीड़ उमड़ने की उम्मीद है।
प्रमुख राजनीतिक दलों की तैयारी
झारखंड मुक्ति मोर्चा, भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दल अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। सत्तारूढ़ झामुमो की सरकार है, लेकिन स्थानीय निकाय चुनावों में क्षेत्रीय मुद्दे ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं।
भाजपा पिछले चुनावों में कई नगर निकायों पर कब्जा जमाने में सफल रही थी। इस बार भी वह अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है। झामुमो और कांग्रेस का गठबंधन भी पूरी ताकत से मैदान में उतरेगा। अन्य क्षेत्रीय दल और निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मतदाता जागरूकता अभियान
चुनाव आयोग मतदाता जागरूकता अभियान भी चलाएगा। लोगों को प्रोत्साहित किया जाएगा कि वे अधिक से अधिक संख्या में मतदान करें। विशेष रूप से युवा मतदाताओं और महिला मतदाताओं को जागरूक करने पर जोर दिया जाएगा।
चुनाव आयोग का लक्ष्य है कि पिछली बार की तुलना में इस बार मतदान प्रतिशत बढ़े। इसके लिए विभिन्न माध्यमों से प्रचार किया जाएगा। सोशल मीडिया, रेडियो, टेलीविजन और पोस्टरों के जरिए संदेश फैलाया जाएगा।
स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के प्रयास
राज्य निर्वाचन आयोग ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। चुनाव अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी तरह के दबाव या प्रभाव में न आएं। आदर्श आचार संहिता सख्ती से लागू की जाएगी।
धन और बाहुबल के दुरुपयोग पर विशेष नजर रखी जाएगी। उम्मीदवारों को अपने खर्च का पूरा हिसाब देना होगा। चुनाव प्रचार के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
Jharkhand Municipal Election: नगर निकाय चुनाव का महत्व
नगर निकाय चुनाव स्थानीय स्वशासन की बुनियाद हैं। महापौर, अध्यक्ष और वार्ड पार्षद शहर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सड़कें, नालियां, पानी की आपूर्ति, कचरा प्रबंधन, सार्वजनिक शौचालय और अन्य नागरिक सुविधाएं नगर निकाय की जिम्मेदारी होती हैं।
इसलिए यह जरूरी है कि मतदाता समझदारी से अपना वोट डालें। उन उम्मीदवारों को चुनें जो ईमानदार हों, काम करने वाले हों और शहर के विकास के प्रति प्रतिबद्ध हों। चुनाव प्रतीक तो केवल एक माध्यम है, असली मुद्दा उम्मीदवार की योग्यता और इरादे हैं।
झारखंड के नगर निकाय चुनावों में लाखों मतदाता अपना मताधिकार का प्रयोग करेंगे। राज्य के विकास में शहरी क्षेत्रों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसलिए यह चुनाव राज्य के भविष्य के लिए अहम हैं। अब देखना होगा कि कौन से दल और उम्मीदवार जनता का विश्वास जीतने में सफल होते हैं।



