Jharkhand News: झारखंड के रामगढ़ जिले में नगर परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं। वार्डों के आरक्षण की घोषणा ने कई निवर्तमान पार्षदों और संभावित उम्मीदवारों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। इस बार कुल 32 वार्डों में से 15 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। जो पार्षद पहले अपने वार्ड से फिर से चुनाव लड़ने के सपने देख रहे थे अब या तो दावेदारी छोड़ रहे हैं या फिर किसी और वार्ड में अपनी किस्मत आजमाने की तैयारी में जुटे हैं।
वार्ड आरक्षण की सूची जारी होने के बाद से ही रामगढ़ में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पहले तक जहां चुनाव लड़ने में किसी तरह की बाध्यता निवर्तमान पार्षदों को नहीं थी वहीं अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है। कई पुरुष पार्षद जिनके वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हो गए हैं वे अब अपनी पत्नी को चुनाव में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। जिन लोगों के लिए यह भी संभव नहीं हो पा रहा है वे चुनाव से ही तौबा कर रहे हैं।
32 वार्डों में 15 महिलाओं के लिए आरक्षित

रामगढ़ नगर परिषद के कुल 32 वार्डों में से 15 वार्ड विभिन्न श्रेणियों में महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। यह पूरे नगर परिषद का लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा है। इस आरक्षण में सामान्य वर्ग की महिलाओं के साथ साथ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अत्यंत पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए भी सीटें आरक्षित की गई हैं। यह व्यवस्था स्थानीय निकाय चुनावों में महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने और उन्हें सशक्त बनाने के उद्देश्य से की गई है।
वार्ड संख्या 9, 11, 19 और 20 अनारक्षित महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित किए गए हैं। इन वार्डों में सामान्य वर्ग की कोई भी महिला चुनाव लड़ सकती है। वार्ड संख्या 22, 23, 24 और 25 भी महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इन वार्डों में महिला उम्मीदवारों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा की उम्मीद है क्योंकि यहां किसी खास जाति का आरक्षण नहीं है।
अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षण
वार्ड संख्या 10, 12 और 18 अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। इन तीन वार्डों में केवल अनुसूचित जनजाति समुदाय की महिलाएं ही चुनाव लड़ सकेंगी। यह दोहरा आरक्षण है जहां जनजाति और महिला दोनों शर्तें पूरी करनी होंगी। इससे इन समुदायों की महिलाओं को स्थानीय प्रशासन में भागीदारी का मौका मिलेगा।
वार्ड संख्या 14 और 16 अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इन दोनों वार्डों में अनुसूचित जाति की महिला उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकेंगी। यह भी दोहरा आरक्षण है। अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षण संविधान में दिए गए प्रावधानों के अनुसार किया जाता है ताकि इन वंचित समुदायों को भी शासन में प्रतिनिधित्व मिल सके।
अत्यंत पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए सीटें
वार्ड संख्या 27 और 31 अत्यंत पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। अत्यंत पिछड़ा वर्ग वे समुदाय होते हैं जो सामाजिक और आर्थिक रूप से बहुत पिछड़े हुए हैं। इन वार्डों में केवल अत्यंत पिछड़ा वर्ग की महिलाएं ही चुनाव लड़ सकेंगी। यह प्रावधान इसलिए किया गया है ताकि समाज के सबसे पिछड़े वर्ग की महिलाओं को भी राजनीतिक भागीदारी का अवसर मिले।
इस तरह के आरक्षण से यह सुनिश्चित होता है कि नगर परिषद में सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व हो। जब विभिन्न समुदायों के लोग प्रशासन में शामिल होते हैं तो नीतियां और योजनाएं बनाते समय सभी वर्गों की जरूरतों का ध्यान रखा जाता है। महिला आरक्षण से महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर भी बेहतर ध्यान दिया जा सकता है।
निवर्तमान पार्षदों की मुश्किलें
वार्ड आरक्षण ने कई निवर्तमान यानी मौजूदा पार्षदों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। जो पार्षद पिछले कार्यकाल में अपने वार्ड का प्रतिनिधित्व कर रहे थे और फिर से चुनाव लड़ना चाहते थे उनमें से कई के वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हो गए हैं। अब वे पुरुष होने के कारण अपने ही वार्ड से चुनाव नहीं लड़ सकते। यह उनके लिए एक बड़ा झटका है।
कई निवर्तमान पार्षद अपने वार्ड में काफी लोकप्रिय थे। उन्होंने अपने कार्यकाल में अच्छा काम किया था और उन्हें उम्मीद थी कि फिर से चुनाव जीत जाएंगे। लेकिन आरक्षण ने उनकी सारी योजनाओं को धूमिल कर दिया। अब उनके सामने तीन विकल्प हैं। या तो वे अपनी पत्नी को उम्मीदवार बनाएं। या फिर किसी दूसरे अनारक्षित वार्ड से चुनाव लड़ने की कोशिश करें। या फिर इस बार चुनाव न लड़ें।
पत्नियों को उतारने की तैयारी
जिन निवर्तमान पार्षदों के वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हो गए हैं उनमें से कई अपनी पत्नी को चुनाव में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। यह एक आम रणनीति है जो आरक्षित सीटों पर अक्सर अपनाई जाती है। इससे परिवार की पकड़ उसी वार्ड पर बनी रहती है। पार्षद अपनी पत्नी को उम्मीदवार बनाकर पर्दे के पीछे से काम चला सकते हैं।
हालांकि यह रणनीति हमेशा सफल नहीं होती। कई बार मतदाता इसे पसंद नहीं करते और किसी और महिला उम्मीदवार को वोट दे देते हैं। फिर भी निवर्तमान पार्षद इस विकल्प को आजमाना चाहते हैं क्योंकि यह उनके लिए सबसे आसान रास्ता है। उन्हें अपने वार्ड की जमीनी राजनीति की अच्छी समझ है और उन्हें लगता है कि अपनी पत्नी के नाम पर वे फिर से जीत सकते हैं।
किसी और वार्ड में किस्मत आजमाने की कोशिश
कुछ निवर्तमान पार्षद किसी दूसरे अनारक्षित वार्ड से चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हैं। रामगढ़ नगर परिषद में 17 वार्ड ऐसे हैं जो आरक्षित नहीं हैं। इनमें से कुछ पुरुषों के लिए खुले हैं। जिन पार्षदों के अपने वार्ड आरक्षित हो गए हैं वे इन वार्डों में अपना भाग्य आजमाना चाहते हैं।
लेकिन यह आसान नहीं है। नए वार्ड में उनकी पकड़ नहीं होती। वहां पहले से कोई और नेता मजबूत हो सकता है। नए वार्ड के मतदाता उन्हें बाहरी समझ सकते हैं। फिर भी कुछ पार्षद यह जोखिम उठाने को तैयार हैं क्योंकि उन्हें राजनीति में बने रहना है। वे अपने अनुभव और नेटवर्क के दम पर नए वार्ड में भी जीतने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
चुनाव से तौबा करने वाले भी हैं
कुछ निवर्तमान पार्षद और संभावित उम्मीदवार चुनाव से ही तौबा कर रहे हैं। जिन्हें अपनी पत्नी को उतारना संभव नहीं लग रहा और किसी दूसरे वार्ड में भी जीतने की संभावना नहीं दिख रही वे इस बार चुनाव नहीं लड़ने का फैसला कर रहे हैं। उनके लिए यह निराशाजनक स्थिति है। वे चुनाव लड़ने के लिए तैयारी कर रहे थे लेकिन आरक्षण ने उनके सभी सपने तोड़ दिए।
कुछ लोग अगले चुनाव का इंतजार करेंगे जब आरक्षण बदल सकता है। स्थानीय निकाय चुनावों में आरक्षण को घुमाया जाता है यानी हर चुनाव में अलग वार्ड आरक्षित होते हैं। इसलिए जो वार्ड अभी आरक्षित है वह अगली बार खुला हो सकता है। तब ये नेता फिर से मैदान में उतरने की कोशिश करेंगे। फिलहाल वे किनारे बैठकर राजनीतिक घटनाक्रम देखेंगे।
नए उम्मीदवारों को मौका
वार्ड आरक्षण से एक फायदा यह हुआ है कि कई नए उम्मीदवारों को मौका मिलेगा। खासकर महिला उम्मीदवारों को। जो महिलाएं पहले राजनीति में आने से हिचकिचाती थीं अब उन्हें आरक्षण के कारण प्रोत्साहन मिलेगा। 15 वार्डों में महिला पार्षद चुनी जाएंगी। यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
नई महिला पार्षद स्थानीय प्रशासन में महिलाओं के दृष्टिकोण को लाएंगी। वे महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर ज्यादा ध्यान देंगी। सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे क्षेत्रों में उनका योगदान महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि शुरुआत में उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है लेकिन धीरे धीरे वे अपनी जगह बना लेंगी। रामगढ़ के लिए यह एक नया अनुभव होगा।
राजनीतिक दलों की रणनीति
वार्ड आरक्षण ने राजनीतिक दलों की रणनीति को भी प्रभावित किया है। सभी दल अब महिला उम्मीदवारों की तलाश में जुटे हैं। उन्हें ऐसी महिलाएं चाहिए जो चुनाव लड़ सकें और जीत सकें। कुछ दल अनुभवी नेताओं की पत्नियों को टिकट देने पर विचार कर रहे हैं। कुछ नई और सक्रिय महिला कार्यकर्ताओं को मौका देना चाहते हैं।
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर दलों को उसी समुदाय की महिलाओं को उम्मीदवार बनाना होगा। यह एक चुनौती है क्योंकि इन समुदायों में अक्सर शिक्षित और राजनीतिक रूप से जागरूक महिलाओं की संख्या कम होती है। फिर भी दल कोशिश कर रहे हैं। चुनाव नजदीक आने के साथ राजनीतिक गतिविधियां तेज होंगी।
Jharkhand News: चुनाव की तैयारियां जोरों पर
जिला निर्वाचन विभाग की ओर से चुनाव की तैयारियां जोर शोर से शुरू कर दी गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग लगातार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिले के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दे रहा है। मतदाता सूची को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मतदान केंद्रों की व्यवस्था की जा रही है। सुरक्षा इंतजाम की योजना बनाई जा रही है।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से हो। आचार संहिता का सख्ती से पालन कराया जाए। किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जल्द ही चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होगी जिसमें नामांकन, प्रचार और मतदान की तारीखें तय होंगी। रामगढ़ की जनता इस चुनाव का बेसब्री से इंतजार कर रही है। आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियां चरम पर होंगी।



